A última palavra vem do Senhor
A última palavra pertence ao Senhor. Os planos do homem estão sujeitos à soberania de Deus. Ele rege toda a história e nenhum de seus propósitos pode ser frustrado.
मन की युक्ति मनुष्य के वश में रहती है,
परन्तु मुँह से कहना यहोवा की ओर से होता है।
यहोवा ने सब वस्तुएँ विशेष उद्देश्य के लिये बनाई हैं,
वरन् दुष्ट को भी विपत्ति भोगने के लिये बनाया है। (कुलु. 1:16)
परमेश्वर मनुष्य नहीं कि झूठ बोले,
और न वह आदमी है कि अपनी इच्छा बदले।
क्या जो कुछ उसने कहा उसे न करे?
क्या वह वचन देकर उसे पूरा न करे? (रोम. 9:6, 2 तीमु. 2:13)
यहोवा ने मूसा से कहा, "क्या यहोवा का हाथ छोटा हो गया है? अब तू देखेगा कि मेरा वचन जो मैंने तुझ से कहा है वह पूरा होता है कि नहीं।"
उसी प्रकार से मेरा वचन भी होगा जो मेरे मुख से निकलता है; वह व्यर्थ ठहरकर मेरे पास न लौटेगा, परन्तु, जो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगाजो मेरी इच्छा है उसे वह पूरा करेगा: मेरी इच्छा पूरी किए बिना वह लौटेगा नहीं। , और जिस काम के लिये मैंने उसको भेजा है उसे वह सफल करेगा।
"मैं तो सब प्राणियों का परमेश्वर यहोवा हूँ; क्या मेरे लिये कोई भी काम कठिन है?
"मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता हैमैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है: यह परमेश्वर के सर्वशक्तिमान होने का स्वीकरण है और मनुष्य को उसकी अधीनता में रहना है, उसकी असीम शक्ति के अधीन।,
और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती। (यशा. 14:27, नीति. 19:21, मर. 10:27)
जो कुछ यहोवा ने चाहा
उसे उसने आकाश और पृथ्वी और समुद्र
और सब गहरे स्थानों में किया है।
और वही सब वस्तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएँ उसी में स्थिर रहती हैं। (प्रका. 1:8)
आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परन्तु मेरे शब्द कभी न टलेंगे।
यह घटना होनेवाली है और वह हो जाएगी, परमेश्वर यहोवा की यही वाणी है। यह वही दिन है जिसकी चर्चा मैंने की है।
और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा। सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो धुंध के समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। (नीति. 27:1) इसके विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, "यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे।"