A última palavra vem do Senhor
A última palavra pertence ao Senhor. Os planos do homem estão sujeitos à soberania de Deus. Ele rege toda a história e nenhum de seus propósitos pode ser frustrado.
दिल की तदबीरें इंसान से हैं,
लेकिन ज़बान का जवाब ख़ुदावन्द की तरफ़ से है।
ख़ुदावन्द ने हर एक चीज़ ख़ास मक़सद के लिए बनाई,
हाँ शरीरों को भी उसने बुरे दिन के लिए बनाया।
ख़ुदा इंसान नहीं कि झूठ बोले, और न वह आदमज़ाद है कि अपना इरादा बदले। क्या, जो कुछ उसने कहा उसे न करे? या, जो फ़रमाया है उसे पूरा न करे?
ख़ुदावन्द ने मूसा से कहा, "क्या ख़ुदावन्द का हाथ छोटा हो गया है? अब तू देख लेगा कि जो मैंने तुझ से कहा है वह पूरा होता है या नहीं।"
उसी तरह मेरा कलाम जो मेरे मुँह से निकलता है होगा, वह बेअन्जाम मेरे पास वापस न आएगा, बल्कि जो कुछ मेरी ख़्वाहिश होगी वह उसे पूरा करेगा और उस काम में जिसके लिए मैंने उसे भेजा मो’अस्सिर होगा।
देख, मैं ख़ुदावन्द, तमाम बशर का ख़ुदा हूँ, क्या मेरे लिए कोई काम दुश्वार है?
"मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है,
और तेरा कोई इरादा रुक नहीं सकता।
आसमान और ज़मीन में, समन्दर और गहराओ में;
ख़ुदावन्द ने जो कुछ चाहा वही किया।
वही सब चीज़ों से पहले है और उसी में सब कुछ क़ाईम रहता है।
आसमान और ज़मीन टल जाएँगी लेकिन मेरी बातें हरगिज़ न टलेंगी।"
देख, वह पहुँचा और वजूद में आया, ख़ुदावन्द ख़ुदा फ़रमाता है; यह वही दिन है जिसके ज़रिए' मैंने फ़रमाया था।
और ये जानते नहीं कि कल क्या होगा; ज़रा सुनो तो; तुम्हारी ज़िन्दगी चीज़ ही क्या है? बुख़ारात का सा हाल है अभी नज़र आए अभी ग़ायब हो गए।
यूँ कहने की जगह तुम्हें ये कहना चाहिए अगर ख़ुदावन्द चाहे तो हम ज़िन्दा भी रहेंगे और ये और वो काम भी करेंगे।