O adultério
O adultério é pecado grave que destrói alianças, famílias e vidas. A Bíblia condena firmemente a infidelidade conjugal e chama à pureza, fidelidade e santidade no casamento.
A lei de Deus
Não adulterarás. Quem comete adultério destrói a própria alma. A Palavra de Deus é clara e direta sobre este pecado.
तुम व्यभिचार नहीं करना.
" ‘यदि कोई व्यक्ति किसी अन्य व्यक्ति की पत्नी से व्यभिचार करता है, तो जिसने अपने मित्र की पत्नी के साथ व्यभिचार किया है, निश्चय ही उस व्यभिचारी और उस व्यभिचारिणी दोनों का वध किये जाए.
" ‘तुम अपने पड़ोसी की पत्नी के साथ संभोग करके उसके साथ स्वयं को भ्रष्ट न करना.
वह, जो व्यभिचार में लिप्त हो जाता है, निरा मूर्ख है;
वह, जो यह सब कर रहा है, स्वयं का विनाश कर रहा है.
वह, जो व्यभिचार में लिप्त हो जाता है, निरा मूर्ख है;
वह, जो यह सब कर रहा है, स्वयं का विनाश कर रहा है.
घाव और अपमान उसके अंश होंगे,
उसकी नामधराई मिटाई न जा सकेगी.
ईर्ष्या किसी भी व्यक्ति को क्रोध में भड़काती है,
प्रतिशोध की स्थिति में उसकी सुरक्षा संभव नहीं.
उसे कोई भी क्षतिपूर्ति स्वीकार्य नहीं होती;
कितने भी उपहार उसे लुभा न सकेंगे.
क्या यह संभव है कि कोई व्यक्ति अपनी छाती पर आग रखे
और उसके वस्त्र न जलें?
अथवा क्या कोई जलते कोयलों पर चले
और उसके पैर न झुलसें?
यही नियति है उस व्यक्ति की, जो पड़ोसी की पत्नी के साथ यौनाचार करता है;
उसके साथ इस रूप से संबंधित हर एक व्यक्ति का दंड निश्चित है.
Jesus ensina
Quem olhar para uma mulher com intenção impura já adulterou no coração. Jesus elevou o padrão da pureza.
"यह तो तुम सुन ही चुके हो कि यह कहा गया था: ‘व्यभिचार मत करो.’ किंतु मेरा तुमसे कहना है कि हर एक, जो किसी स्त्री को कामुक दृष्टि से मात्र देख लेता है, वह अपने मन में उसके साथ व्यभिचार कर चुका.
किंतु मेरा तुमसे कहना है कि हर एक, जो वैवाहिक व्यभिचार के अलावा किसी अन्य कारण से अपनी पत्नी से तलाक लेता है, वह अपनी पत्नी को व्यभिचार की ओर ढकेलता है और जो कोई उस त्यागी हुई से विवाह करता है, व्यभिचार करता है.
क्योंकि हृदय से ही बुरे विचार, हत्या, व्यभिचार, वेश्यागामी, चोरियां, झूठी गवाही तथा निंदा उपजा करती हैं.
मसीह येशु ने उन्हें समझाया, "यदि कोई अपनी पत्नी से तलाक लेकर अन्य स्त्री से विवाह करता है, वह उस अन्य स्त्री के साथ व्यभिचार करता है. यदि स्वयं स्त्री अपने पति से तलाक लेकर अन्य पुरुष से विवाह कर लेती है, वह भी व्यभिचार करती है."
"वह, जो अपनी पत्नी से तलाक लेकर अन्य स्त्री से विवाह करता है, व्यभिचार करता है; और वह पुरुष, जो उस त्यागी हुई स्त्री से विवाह करता है, व्यभिचार करता है."
और मसीह येशु से प्रश्न किया, "गुरु, यह स्त्री व्यभिचार करते हुए पकड़ी गई है. मोशेह ने व्यवस्था में हमें ऐसी स्त्रियों को पथराव द्वारा मार डालने की आज्ञा दी है; किंतु आप क्या कहते हैं?" उन्होंने मसीह येशु को परखने के लिए यह प्रश्न किया था कि उन पर आरोप लगाने के लिए उन्हें कोई आधार मिल जाए.
किंतु मसीह येशु झुककर भूमि पर उंगली से लिखने लगे. जब वे मसीह येशु से बार-बार प्रश्न करते रहे, मसीह येशु ने सीधे खड़े होकर उनसे कहा, "तुममें से जिस किसी ने कभी कोई पाप न किया हो, वही उसे सबसे पहला पत्थर मारे." और वह दोबारा झुककर भूमि पर लिखने लगे.
यह सुनकर वरिष्ठ से प्रारंभ कर एक-एक करके सब वहां से चले गए—केवल वह स्त्री और मसीह येशु ही वहां रह गए. मसीह येशु ने सीधे खड़े होते हुए स्त्री की ओर देखकर उससे पूछा, "हे स्त्री! वे सब कहां हैं? क्या तुम्हें किसी ने भी दंडित नहीं किया?"
उसने उत्तर दिया, "किसी ने भी नहीं, प्रभु."
मसीह येशु ने उससे कहा, "मैं भी तुम्हें दंडित नहीं करता. जाओ, अब फिर पाप न करना."
Armadilhas e consequências
Os lábios da mulher estranha destilam mel, mas o seu fim é amargo. Fuja da imoralidade — o adultério escraviza.
क्योंकि व्यभिचारिणी की बातों से मानो मधु टपकता है,
उसका वार्तालाप तेल से भी अधिक चिकना होता है;
किंतु अंत में वह चिरायते सी कड़वी
तथा दोधारी तलवार-सी तीखी-तीक्ष्ण होती है.
उसका मार्ग सीधा मृत्यु तक पहुंचता है;
उसके पैर अधोलोक के मार्ग पर आगे बढ़ते जाते हैं.
जीवन मार्ग की ओर उसका ध्यान ही नहीं जाता;
उसके चालचलन का कोई लक्ष्य नहीं होता और यह वह स्वयं नहीं जानती.
क्योंकि व्यभिचारिणी की बातों से मानो मधु टपकता है,
उसका वार्तालाप तेल से भी अधिक चिकना होता है;
किंतु अंत में वह चिरायते सी कड़वी
तथा दोधारी तलवार-सी तीखी-तीक्ष्ण होती है.
उसका मार्ग सीधा मृत्यु तक पहुंचता है;
उसके पैर अधोलोक के मार्ग पर आगे बढ़ते जाते हैं.
जीवन मार्ग की ओर उसका ध्यान ही नहीं जाता;
उसके चालचलन का कोई लक्ष्य नहीं होता और यह वह स्वयं नहीं जानती.
और अब, मेरे पुत्रो, ध्यान से मेरी शिक्षा को सुनो;
मेरे मुख से बोले शब्दों से कभी न मुड़ना.
तुम उससे दूर ही दूर रहना,
उसके घर के द्वार के निकट भी न जाना,
कहीं ऐसा न हो कि तुम अपना सम्मान किसी अन्य को सौंप बैठो
और तुम्हारे जीवन के दिन किसी क्रूर के वश में हो जाएं,
तुम उससे दूर ही दूर रहना,
उसके घर के द्वार के निकट भी न जाना,
कहीं ऐसा न हो कि तुम अपना सम्मान किसी अन्य को सौंप बैठो
और तुम्हारे जीवन के दिन किसी क्रूर के वश में हो जाएं,
कहीं अपरिचित व्यक्ति तुम्हारे बल का लाभ उठा लें
और तुम्हारे परिश्रम की सारी कमाई परदेशी के घर में चली जाए.
और जीवन के संध्याकाल में तुम कराहते रहो,
जब तुम्हारी देह और स्वास्थ्य क्षीण होता जाए.
और तब तुम यह विचार करके कहो, "क्यों मैं अनुशासन तोड़ता रहा!
क्यों मैं ताड़ना से घृणा करता रहा!
मैंने शिक्षकों के शिक्षा की अनसुनी की,
मैंने शिक्षाओं पर ध्यान ही न दिया.
आज मैं विनाश के कगार पर,
सारी मण्डली के सामने, खड़ा हूं."
वह हिरणी सी कमनीय और मृग सी आकर्षक है.
उसी के स्तन सदैव ही तुम्हें उल्लास से परिपूर्ण करते रहें,
उसका प्रेम ही तुम्हारा आकर्षण बन जाए.
मेरे पुत्र, वह व्यभिचारिणी भली क्यों तुम्हारे आकर्षण का विषय बने?
वह व्यभिचारिणी क्यों तुम्हारे सीने से लगे?
उसका घर-परिवार मृत्यु के गर्त में समाता जा रहा है,
उसके पांव अधोलोक की राह पर हैं.
जो कोई उसके पास गया, वह लौटकर कभी न आ सकता,
और न उनमें से कोई पुनः जीवन मार्ग पा सकता है.
चरित्रहीन स्त्री का मुख गहरे गड्ढे-समान है;
याहवेह द्वारा शापित व्यक्ति ही इसमें जा गिरता है.
वेश्यागामी से दूर भागो! मनुष्य द्वारा किए गए अन्य पाप उसके शरीर को प्रभावित नहीं करते किंतु वेश्यावृत्ति करनेवाला अपने ही शरीर के विरुद्ध पाप करता है.
मेरी सलाह यह है, तुम्हारा स्वभाव आत्मा से प्रेरित हो, तब तुम किसी भी प्रकार से शारीरिक लालसाओं की पूर्ति नहीं करोगे. शरीर आत्मा के विरुद्ध और आत्मा शरीर के विरुद्ध लालसा करता है. ये आपस में विरोधी हैं कि तुम वह न कर सको, जो तुम करना चाहते हो.
शरीर द्वारा उत्पन्न काम स्पष्ट हैं: वेश्यागामी, अशुद्धता, भ्रष्टाचार, मूर्ति पूजा, जादू-टोना, शत्रुता, झगड़ा, जलन, क्रोध, स्वार्थ, मतभेद, विधर्म; डाह, मतवालापन, लीला-क्रीड़ा तथा इनके समान अन्य, जिनके विषय में मैं तुम्हें चेतावनी दे रहा हूं कि जिनका स्वभाव इस प्रकार का है, वे मेरी पूर्व चेतावनी के अनुरूप परमेश्वर के राज्य के वारिस नहीं होंगे.
विवाह की बात सम्मानित रहे तथा विवाह का बिछौना कभी अशुद्ध न होने पाए क्योंकि परमेश्वर व्यभिचारियों तथा परस्त्रीगामियों को दंडित करेंगे.
परमेश्वर की इच्छा है कि तुम पवित्रता की स्थिति में रहो—तुम वेश्यागामी से अलग रहो; कि तुममें से हर एक को अपने-अपने शरीर को पवित्रता तथा सम्मानपूर्वक संयमित रखने का ज्ञान हो, कामुकता की अभिलाषा में अन्यजातियों के समान नहीं, जो परमेश्वर से अनजान हैं;
अरे विश्वासघातियो! क्या तुम्हें यह मालूम नहीं कि संसार से मित्रता परमेश्वर से शत्रुता है? इसलिये उसने, जो संसार की मित्रता से बंधा हुआ है, अपने आपको परमेश्वर का शत्रु बना लिया है.
मैंने उसे पश्चाताप करने का समय दिया किंतु वह अपने व्यभिचारी कामों का पश्चाताप करना नहीं चाहती. इसलिये देखना, मैं उसे बीमारी के बिस्तर पर डाल दूंगा और उन्हें, जो उसके साथ व्यभिचार में लीन हैं, घोर कष्ट में डाल दूंगा—यदि वे उसके साथ के दुष्कर्मों से मन नहीं फिराते.