Adultério na Bíblia: o que diz o Antigo Testamento e Jesus
A lei do adultério no Antigo Testamento
A Bíblia define o adultério como a quebra da aliança conjugal por meio de relações íntimas fora do casamento, tratando-o como pecado grave contra o cônjuge e contra Deus. A proibição é expressa no sétimo mandamento entregue a Moisés, tornando a fidelidade no matrimônio um pilar central da lei bíblica.
Nos livros de sabedoria, o adultério é descrito como perda completa de juízo moral. A infidelidade destrói a integridade, traz vergonha pública e desfaz a paz familiar de forma irreversível.
O que Jesus ensinou sobre o adultério
No Sermão do Monte, Jesus aprofunda o entendimento do mandamento: o adultério não se limita ao ato físico consumado, mas nasce no olhar intencional e no desejo alimentado no coração.
"तुम सुने हौ कि जौ कहो गौ रहै, ‘व्यभिचार मत करीये।’ लेकिन मैं तुमसे कहथौं: अगर जो कोई की बईय्यर कै वासना की नजर से देखथै तौ बौ अपने मन मैं पहले से ही व्यभिचार कर चुको है।(मत्ती 5:27,28)
काहैकि बुरे बिचार, मार डारनो, दुसरेन की बईय्यर कै अपनो बनानो, व्यभिचार, चोरी करनो, झूठी गभाई और बुराई सबै बुराई मनै से आथै।(मत्ती 15:19)
Jesus também tratou da fidelidade conjugal ao ensinar sobre o divórcio, apontando que o casamento foi desenhado para ser uma aliança permanente e protegida.
लेकिन मैं तुमसे कहथौं: हर बौ आदमी अपनी बईय्यर कै तलाक देथै, अगर बौ जौ तलाक बाके व्यभिचारी आचरड़ के बजह से नाय दियो गौ है तौ जब बौ दुसरो बिहा करथै तौ बौ आदमी बासे व्यभिचार करवाथै। और जो कोई बौ छोड़ी भइ बईय्यर से बिहा करथै तौ बौ भी व्यभिचार करथै।"(मत्ती 5:32)
बौ उनसे कही, "एक आदमी अपनी बईय्यर कै तलाक दैकै दुसरी से बिहा करथै तौ बौ पहली बारी के खिलाप व्यभिचार करथै; जहे हानी अगर बईय्यर अपने लोगा कै तलाक दैकै दुसरे लोग से बिहा करथै तौ बौ भी व्यभिचार करथै।"(मरकुस 10:11,12)
"जो आदमी अपनी बईय्यर कै तलाक दैकै दुसरी बईय्यर से बिहा करै, बौ व्यभिचार करथै; और जो कोई तलाकसुदा बईय्यर से बिहा करथै बौ भी छिनरइ करथै।"(लूका 16:18)
Diante da mulher surpreendida em adultério, Jesus demonstrou tanto a gravidade da lei quanto a extensão do perdão: Ele não minimizou o pecado, mas ofereceu acolhimento e ordenou o abandono daquela prática.
"गुरुजी, जौ बईय्यर व्यभिचार करत भइ पकड़ी गई है। नियम मैं मूसा हमकै आग्या दई है कि ऐसी बईंय्यरन कै पथरा मारियो; और तैं जौ बईय्यर के बारे मैं का कहनो चाहथै?" बे ईसु कै परखन के मारे ऐसे कहीं ताकी बाके ऊपर दोस लगान के ताहीं कोई बात पाए जामैं, पर ईसु लोहोक कै उँगरिया से जमीन मैं लिखन लागो। जब बे ईसु से पूँछतै रहैं, तौ बौ सीध हुईकै कही, "तुम मैं से जो पाप नाय करो है, बहे पहले बाकै पथरा मारै।" और फिर से लोहोक कै जमीन मैं लिखन लागो। पर बे ऐसे सुनकै बड़े-बूढ़े से लैकै छोटे तक एक-एक करकै हुँआँ से निकर गै, और ईसु अकेलो रहगौ, और बौ हुँए बीच मैं ठाड़ी रह गई। ईसु ठाड़कै बासे कही, "हे नारी, बे सब कहाँ गै? का कोई तोकै सजा की आग्या नाय दौ?"
बौ बईय्यर कही, "हे प्रभु, कोई नाय दौ।" ईसु कही, "महुँ तोकै सजा की आग्या नाय देंगो; और अब तैं जा और कहु पाप मत करिये।"(यूहन्ना 8:4-11)
Advertências e consequências nas Escrituras
O livro de Provérbios dedica diversos capítulos a advertir sobre o engano do adultério, que promete prazer imediato, mas termina em amargura, perda de honra e destruição espiritual.
Nas cartas apostólicas, a orientação à igreja é clara: honrar o casamento, controlar os próprios desejos e fugir das ocasiões de pecado, buscando uma vida guiada pelo Espírito.
परमेस्वर चाहथै कि तुम पवित्र बनौ और व्यभिचार से बचे रहाबौ। तुम मैं से हर एक जनी कै जाननो चाहिए कि पवित्र और आदर से अपनी बईय्यर के संग कैसे रहने है, मूर्ति पूजा करन बारेन के हानी वासना मैं नाय जो परमेस्वर और बाके तरीकन कै गैर यहूदि ना जानथैं।(1 थिस्सलुनीकियों 4:3-5)
व्यभिचार से बचे रहबौ और जित्ते पाप इंसान करथैं, बे सरीर के बहार हैं, लेकिन व्यभिचार करन बारो अपनेई सरीर के खिलाप पाप करथै।(1 कुरिन्थियों 6:18)
मैं कहथौ आत्मा के जरिया चलौ, तौ तुम अपनी सरीर की इच्छा कै पूरी नाय करैगे। हमरो सारीरिक स्वभाव जो चाहथै, बाके उल्टा आत्मा जो चाहथै, और जो आत्मा चाहथै, बाको बौ बिरोध करथै जो हमरो मानव स्वभाव चाहथै। जे दोनों दुस्मन हैं, और जाको मतलब है कि तुम बौ नाय कर सकथौ जौ तुम करनो चाहथौ।(गलातियों 5:16,17)
सरीर के काम तौ स्पस्ट है, यानी, व्यभिचार, लुचपन, असुद्ध काम; मानव स्वभाव जो करथै बौ बिल्कुल साफ है। जौ खुदकै अनैतिक, गंदी और असोभनीय हरकतन मैं दिखाथै;
मूर्ति पूजा, टोना, बैर, लड़ाई, जलन, गुस्सा, खिलापत, फूट, विधर्म, बे जलन रखथैं, नसा मैं धुत हुई जाथैं, काम वासना मैं पड़े रहथैं और इन्हईं तराहनी के औरै-औरै काम करथैं, मैं तुमकै पहलिये चौकन्नो करथौं: जो आदमी जे कामन कै करथैं, बे परमेस्वर के राज्य को वारिस नाय होंगे।(गलातियों 5:19-21)
बिहा सबमै आदर की बात समझी जाबै, और बिहा बिछौना पवित्र होनो चाहिए; काहैकि परमेस्वर व्यभिचारियन, और छिनरेयन को न्याय करैगो।(इब्रानियों 13:4)
A Bíblia também emprega o adultério em sentido figurado para alertar contra a infidelidade espiritual, quando o coração de quem professa fé se volta para os valores contrários a Deus.
हे व्यभिचारियौ का तुम नाय जानथौ, कि दुनिया से दोस्ती करनो परमेस्वर से बैर करनो है? काहैकि जो कोई दुनिया से दोस्ती करनो चाहथै, बौ अपने आपकै परमेस्वर को बैरी बनाथै।(Tiago 4:4)
मैं बाकै मन फिरान के ताहीं मौका दौ, पर बौ अपनी छिनरइपना से मन फिरानो नाय चाहथै। और तभई मैं बाकै बिमारी की खटिया ऊपर लिटाए दुंगो, और उन्हैं जो बाके संग व्यभिचार करन मैं लीन हैं भौत दुख मैं डार दुंगो। अगर बे बाके संग के दुस्ट कामन से मन फिरात न हैं।(प्रकासितवाक्य 2:21,22)
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