Ajuda ao próximo: o que a Bíblia ensina sobre a prática
O que a Bíblia diz sobre a ajuda ao próximo
Na Bíblia, a ajuda ao próximo não é favor opcional nem mérito pessoal: é a prova concreta da fé genuína. A Escritura ensina que amar a Deus e amar o semelhante são inseparáveis, e que a compaixão precisa se traduzir em atitudes práticas quando nos deparamos com a necessidade de alguém.
हे मेरै बिश्वासी भाईयो, जै कोए कहवै के मै प्रभु यीशु मसीह पै बिश्वास करुँ सूं, पर वो उसकै मुताबिक आच्छे काम न्ही करदा हो, तो इसतै के फायदा? कै इसा बिश्वास उसका उद्धार कर सकै सै? जै कोए बिश्वासी भाई या भाण जिनकै धोरै पैहरण खात्तर भी लत्ते ना हो, अर उननै रोज खाण नै भी ना मिलता हो, मान ल्यो थारे म्ह तै कोए उनतै कहवै, "ठीक-ठाक जाओ, थम गरम लत्ते पैहरो अर छिके रहों," पर जो चीज देह खात्तर जरूरी सै, वा उनतै ना देवै, तो के फायदा? उस्से तरियां बिश्वास भी, जै आच्छे कर्म सुधा ना हो, तो अपणे सुभाव म्ह मरया होया सै।(याकूब 2:14-17)
पर जिस किसे कै धोरै दुनिया की दौलत हो अर वो अपणे बिश्वासी भाई नै कंगाल देखकै उसपै तरस ना खावै, तो उस म्ह परमेसवर का प्यार किस तरियां बण्या रहै सकै सै?(1 यूहन्ना 3:17)
Servir ao necessitado é servir ao próprio Cristo
Jesus colocou o cuidado com os vulneráveis no centro do julgamento final. Ao alimentar quem tem fome, vestir quem está nu ou acolher quem passa privação, a igreja não está apenas prestando socorro comunitário — está servindo diretamente a Cristo.
क्यूँके जिब मै भूक्खा था, तो थमनै मेरै ताहीं खाण नै दिया; मै तिसाया था, तो थमनै मेरै ताहीं पाणी पिलाया; मै परदेशी था, तो थमनै मेरै ताहीं अपणे घरां ठहराया; मै उघाड़ा था, तो थमनै मेरै ताहीं लत्ते पिहराए; मै बीमार था, तो थमनै मेरा बेरा लिया, मै जेळ म्ह था, तो थम मेरै तै मिलण आये।’"
"फेर धर्मी उस ताहीं जवाब देवैंगे, ‘हे प्रभु, हमनै कद तेरे ताहीं भूक्खा देख्या अर खुवाया? या कद तिसाया देख्या अर पाणी पिलाया? हमनै कद तेरे ताहीं परदेशी देख्या अर अपणे घरां ठहराया? या उघाड़ा देख्या अर लत्ते पिहराये? हमनै कद तेरे ताहीं बीमार या जेळ म्ह देख्या अर तेरा बेरा लेण आये?’"
"फेर मै राजा उननै जवाब देऊँगा, ‘मै थमनै साच्ची कहूँ सूं के थमनै जो मेरे इन छोट्या तै छोट्टे बिश्वासी भाईयाँ म्ह तै किसे एक कै गेल्या करया, वो मेरै ए गेल्या करया।’"(मत्ती 25:35-40)
No Antigo Testamento, a sabedoria bíblica já apontava para essa mesma dignidade ao afirmar que o Criador assume a causa de quem não tem como retribuir:
जो कंगाल पै दया करै सै, वो यहोवा नै उधार देवै सै,
अर वो अपणे इस काम का प्रतिफळ पावैगा।(नीतिवचन 19:17)
Repartir com desprendimento no cotidiano
A partilha bíblica não espera a abundância para acontecer. Quando as multidões perguntavam a João Batista o que deveriam fazer em resposta à mensagem de Deus, a instrução foi direta: dividir as roupas e a comida que tinham em mãos.
फेर माणसां नै उसतै बुझया, "तो हम परमेसवर के दण्ड तै बचण खात्तर के करा?"
उसनै जवाब दिया, "जिसकै धोरै दो कुड़ते हों, वो उसकै गेल्या जिसकै धोरै न्ही सै उसकै गैल बांड ल्यो अर जिसकै धोरै खाणा हो, वो भी न्यूए करै।"(लूका 3:10,11)
अपणा धन बेचकै दान कर द्यो, अर अपणे खात्तर इसे बटुए बणाओ, जो पुराणे कोनी होन्दे, यानिके परमेसवर नै खुश करण आळे भले काम करकै सुर्ग म्ह इसा धन कठ्ठा करो जो खतम कोनी होन्दा, अर जिसकै धोरै चोर कोनी जान्दा, अर कीड़ा कोनी बिगाड़दा। क्यूँके जड़ै थारा धन सै, उड़ै थारा मन भी लाग्या रहवैगा।"(लूका 12:33,34)
Jesus reforçou a disposição constante de atender ao pedido de quem recorre a nós:
जो कोए तेरे तै माँग्गै, उसनै दे, अर जो कोए तेरे तै उधार लेणा चाहवै, उसतै मुँह ना मोड़।"(मत्ती 5:42)
O dever de acudir os pobres também é contínuo porque a necessidade humana nunca cessa na história:
तेरै देश म्ह गरीब तो सदा पाए जावैंगे, ज्यांतै मै तेरै ताहीं यो हुकम दियुँ सूं के तू अपणे देश म्ह अपणे दीन-दरिद्र भाईयाँ ताहीं अपणा हाथ ढील्ला करकै जरुर दान दिये।"(व्यवस्थाविवरण 15:11)
O apóstolo Paulo orienta que até o próprio trabalho honesto tem, entre seus objetivos mais nobres, a capacidade de gerar sustento para acudir o outro:
चोरी करण आळा फेर चोरी ना करै, बल्के मेहनत करकै अपणी कमाई के जरिये दुसरे माणसां की भी मदद कर सकै, जो जरूरत मन्द हो।(इफिसियों 4:28)
Levar as cargas uns dos outros na comunidade
Ajudar o próximo não se resume a recursos financeiros e materiais. Envolve tempo, escuta e disposição para carregar pesos emocionais, espirituais e apoiar quem está enfraquecido na caminhada diária.
म्हारे म्ह तै जै कोए भी मुसीबत म्ह हो, तो हमनै एक-दुसरे की मदद करणी चाहिए, अर इस तरियां हम मसीह के नियम-कायदा नै मान्ना सां।(गलातियों 6:2)
हो सकै सै के हम जो बिश्वास म्ह मजबूत सां, हम जाणा सां के इन बात्तां तै कोए फर्क न्ही पड़ता, हम इस खात्तर यो काम न्ही करते के हम अपणे-आपनै खुश कर सका, हमनै उन माणसां का डर अर शंका का भी ध्यान करणा सै, के जो यो सोच्चै सै के हम गलत सां।(रोमियों 15:1)
हरेक अपणे ए हित की न्ही, बल्के दुसरयां कै हित की भी चिंता करै।(फिलिप्पियों 2:4)
पवित्र माणसां ताहीं जो किमे जरूरी हो, उस म्ह उनकी मदद करो, अर अजनबी माणसां की सदा सेवा-पाणी म्ह लाग्गे रहो।(रोमियों 12:13)
O amor sacrifical e o testemunho público da fé
O padrão supremo de ajuda e doação é o próprio sacrifício de Jesus na cruz. Quando os discípulos vivem esse padrão na prática, o socorro prestado ao necessitado se torna testemunho do próprio caráter de Deus diante do mundo.
"मै थमनै नया हुकम द्यु सूं, के एक-दुसरे तै प्यार करियो, जिसा मन्नै थारैतै प्यार करया सै, उसाए थम भी एक-दुसरे तै प्यार करियो।(यूहन्ना 15:12)
इसतै बड्ड़ा प्यार किसे का कोनी के कोए अपणे दोस्तां कै खात्तर अपणी जान दे।(यूहन्ना 15:13)
उस्से तरियां थारा चान्दणा माणसां के स्याम्ही चमकै के वे थारे भले काम्मां नै देखकै थारे पिता की, जो सुर्ग म्ह सै बड़ाई करै।"(मत्ती 5:16)
A postura de generosidade transforma o coração de quem a pratica, trazendo a convicção ensinada pelo próprio Senhor:
मन्नै थारे ताहीं सारया किमे करकै दिखाया के इस तरियां तै मेहनत करदे होए कमजोरां ताहीं सम्भालणा अर प्रभु यीशु के वचन याद राखणा जरूरी सै, जो उसनै खुदे कह्या सै: ‘लेण तै देणा धन्य सै।’"
न्यू कहकै उसनै गोड्डे टेक्के अर उन सारया कै गेल्या प्रार्थना करी। फेर वे सारे घणे रोये अर पौलुस कै गळे लिपटकै उस ताहीं चुम्ण लाग्गे।
वे खासकर इस बात तै दुखी थे जो उसनै कही थी के थम मेरा मुँह दुबारा कोनी देक्खोगे। इसके बाद वे पौलुस के साथ पाणी के जहाज तक गये।(प्रेरितों के काम 20:35-38)
दिया करो तो थारे ताहीं भी दिया जावैगा। माणस पूरा नाप दबा दबाकै अर हला-हलाकै अर उभरदा होया थारी गोद्दी म्ह घाल्लैगें, क्यूँके जिस नाप तै थम नाप्पो सों, उस्से नाप तै थारे खात्तर भी नाप्या जावैगा।"(लूका 6:38)
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