Ajuda para casais
Deus fortalece casamentos. A Bíblia oferece sabedoria prática para casais: comunicar com verdade, perdoar com graça, servir com amor e buscar a Deus juntos.
Amor e respeito
Maridos, amai vossas mulheres. Mulheres, respeitem seus maridos. O amor mútuo edifica o casamento.
शौहरो, अपनी बीवियों से मुहब्बत रखें, बिलकुल उसी तरह जिस तरह मसीह ने अपनी जमात से मुहब्बत रखकर अपने आपको उसके लिए क़ुरबान किया
लेकिन इसका इतलाक़ आप पर भी है। हर शौहर अपनी बीवी से इस तरह मुहब्बत रखे जिस तरह वह अपने आपसे रखता है। और हर बीवी अपने शौहर की इज़्ज़त करे।
शौहरों का फ़र्ज़ है कि वह अपनी बीवियों से ऐसी ही मुहब्बत रखें। हाँ, वह उनसे वैसी मुहब्बत रखें जैसी अपने जिस्म से रखते हैं। क्योंकि जो अपनी बीवी से मुहब्बत रखता है वह अपने आपसे ही मुहब्बत रखता है। आख़िर कोई भी अपने जिस्म से नफ़रत नहीं करता बल्कि उसे ख़ुराक मुहैया करता और पालता है। मसीह भी अपनी जमात के लिए यही कुछ करता है।
इसलिए हर शख़्स झूट से बाज़ रहकर दूसरों से सच बात करे, क्योंकि हम सब एक ही बदन के आज़ा हैं।
ग़ुस्से में आते वक़्त गुनाह मत करना। आपका ग़ुस्सा सूरज के ग़ुरूब होने तक ठंडा हो जाए, वरना आप इबलीस को अपनी ज़िंदगी में काम करने का मौक़ा देंगे।
कोई भी बुरी बात आपके मुँह से न निकले बल्कि सिर्फ़ ऐसी बातें जो दूसरों की ज़रूरियात के मुताबिक़ उनकी तामीर करें। यों सुननेवालों को बरकत मिलेगी।
तमाम तरह की तलख़ी, तैश, ग़ुस्से, शोर-शराबा, गाली-गलोच बल्कि हर क़िस्म के बुरे रवय्ये से बाज़ आएँ। एक दूसरे पर मेहरबान और रहमदिल हों और एक दूसरे को यों मुआफ़ करें जिस तरह अल्लाह ने आपको भी मसीह में मुआफ़ कर दिया है।
União e fidelidade
O que Deus ajuntou não separe o homem. Eu e minha casa serviremos ao Senhor. A fidelidade é alicerce do casamento.
यों वह कलामे-मुक़द्दस के मुताबिक़ दो नहीं रहते बल्कि एक हो जाते हैं। जिसे अल्लाह ने जोड़ा है उसे इनसान जुदा न करे।"
लेकिन अगर रब की ख़िदमत करना आपको बुरा लगे तो आज ही फ़ैसला करें कि किसकी ख़िदमत करेंगे, उन देवताओं की जिनकी पूजा आपके बापदादा ने दरियाए-फ़ुरात के पार की या अमोरियों के देवताओं की जिनके मुल्क में आप रह रहे हैं। लेकिन जहाँ तक मेरा और मेरे ख़ानदान का ताल्लुक़ है हम रब ही की ख़िदमत करेंगे।"
लाज़िम है कि सबके सब इज़दिवाजी ज़िंदगी का एहतराम करें। शौहर और बीवी एक दूसरे के वफ़ादार रहें, क्योंकि अल्लाह ज़िनाकारों और शादी का बंधन तोड़नेवालों की अदालत करेगा।
नई ज़िंदगी में ताल्लुक़ात कैसे हूँ
बीवियो, अपने शौहर के ताबे रहें, क्योंकि जो ख़ुदावंद में है उसके लिए यही मुनासिब है।
शौहरो, अपनी बीवियों से मुहब्बत रखें। उनसे तलख़मिज़ाजी से पेश न आएँ।
इनके अलावा मुहब्बत भी पहन लें जो सब कुछ बाँधकर कामिलियत की तरफ़ ले जाती है। मसीह की सलामती आपके दिलों में हुकूमत करे। क्योंकि अल्लाह ने आपको इसी सलामती की ज़िंदगी गुज़ारने के लिए बुलाकर एक बदन में शामिल कर दिया है। शुक्रगुज़ार भी रहें।
अल्लाह ने आपको चुनकर अपने लिए मख़सूसो-मुक़द्दस कर लिया है। वह आपसे मुहब्बत रखता है। इसलिए अब तरस, नेकी, फ़रोतनी, नरमदिली और सब्र को पहन लें। एक दूसरे को बरदाश्त करें, और अगर आपकी किसी से शिकायत हो तो उसे मुआफ़ कर दें। हाँ, यों मुआफ़ करें जिस तरह ख़ुदावंद ने आपको मुआफ़ कर दिया है।
Perdão e paciência
Sede bondosos e compassivos uns com os outros. O amor é paciente, benigno. Permanece e persevera.
मुहब्बत सब्र से काम लेती है, मुहब्बत मेहरबान है। न यह हसद करती है न डींगें मारती है। यह फूलती भी नहीं। मुहब्बत बदतमीज़ी नहीं करती न अपने ही फ़ायदे की तलाश में रहती है। यह जल्दी से ग़ुस्से में नहीं आ जाती और दूसरों की ग़लतियों का रिकार्ड नहीं रखती। यह नाइनसाफ़ी देखकर ख़ुश नहीं होती बल्कि सच्चाई के ग़ालिब आने पर ही ख़ुशी मनाती है। यह हमेशा दूसरों की कमज़ोरियाँ बरदाश्त करती है, हमेशा एतमाद करती है, हमेशा उम्मीद रखती है, हमेशा साबितक़दम रहती है।
शादीशुदा जोड़ों को मैं नहीं बल्कि ख़ुदावंद हुक्म देता है कि बीवी अपने शौहर से ताल्लुक़ मुंक़ते न करे। अगर वह ऐसा कर चुकी हो तो दूसरी शादी न करे या अपने शौहर से सुलह कर ले। इसी तरह शौहर भी अपनी बीवी को तलाक़ न दे।
शौहर अपनी बीवी का हक़ अदा करे और इसी तरह बीवी अपने शौहर का। बीवी अपने जिस्म पर इख़्तियार नहीं रखती बल्कि उसका शौहर। इसी तरह शौहर भी अपने जिस्म पर इख़्तियार नहीं रखता बल्कि उस की बीवी। चुनाँचे एक दूसरे से जुदा न हों सिवाए इसके कि आप दोनों बाहमी रज़ामंदी से एक वक़्त मुक़र्रर कर लें ताकि दुआ के लिए ज़्यादा फ़ुरसत मिल सके। लेकिन इसके बाद आप दुबारा इकट्ठे हो जाएँ ताकि इबलीस आपके बेज़ब्त नफ़स से फ़ायदा उठाकर आपको आज़माइश में न डाले।
ख़ुदग़रज़ न हों, न बातिल इज़्ज़त के पीछे पड़ें बल्कि फ़रोतनी से दूसरों को अपने से बेहतर समझें। हर एक न सिर्फ़ अपना फ़ायदा सोचे बल्कि दूसरों का भी।
इस पर ध्यान दें कि कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे बल्कि आप हर वक़्त एक दूसरे और तमाम लोगों के साथ नेक काम करने में लगे रहें।
सबसे ज़रूरी बात यह है कि आप एक दूसरे से लगातार मुहब्बत रखें, क्योंकि मुहब्बत गुनाहों की बड़ी तादाद पर परदा डाल देती है।
जिसे बीवी मिली उसे अच्छी नेमत मिली, और उसे रब की मंज़ूरी हासिल हुई।