Alimento
O alimento é provisão de Deus para o corpo e a alma. Jesus disse: Eu sou o pão da vida. A Bíblia ensina a receber com gratidão, partilhar com generosidade e confiar no Provedor.
O pão da vida
Jesus disse: Eu sou o pão da vida. Quem vem a mim nunca terá fome. O alimento espiritual sacia plenamente.
यीशु ने उनसे कहा,"जीवन की रोटी मैं हूँ। जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा नहीं होगा, और जो मुझ पर विश्वास करेगा वह फिर कभी प्यासा नहीं होगा।
नाश होनेवाले भोजन के लिए नहीं बल्कि अनंत जीवन तक रहनेवाले उस भोजन के लिए परिश्रम करो जो मनुष्य का पुत्र तुम्हें देगा, क्योंकि पिता परमेश्वर ने उसी पर मुहर लगाई है।"
इस पर यीशु ने कहा,"लिखा है :
मनुष्य केवल रोटी से नहीं,
परंतु परमेश्वर के
मुँह से निकलनेवाले हर एक वचन से
जीवित रहेगा।"
धन्य हैं वे जो धार्मिकता के भूखे और प्यासे हैं,
क्योंकि वे तृप्त किए जाएँगे।
इसलिए पहले परमेश्वर के राज्य और उसकी धार्मिकता की खोज करो, और ये सब वस्तुएँ तुम्हें मिल जाएँगी।
"इसलिए मैं तुमसे कहता हूँ, अपने प्राण के लिए चिंता मत करो कि क्या खाएँगे या क्या पीएँगे, और न ही अपनी देह के लिए कि क्या पहनेंगे; क्या प्राण भोजन से और देह वस्त्र से बढ़कर नहीं?
नवजात शिशुओं के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा तुम उद्धार में बढ़ते जाओ;
Provisão divina
Deus provê alimento em abundância. Ele multiplica pães e peixes, enche os famintos e supre toda necessidade.
तब उसने पाँच रोटियों और दो मछलियों को लिया और स्वर्ग की ओर देखकर आशिष माँगी, और उन्हें तोड़कर शिष्यों को देता गया कि लोगों को परोसें। अतः सब खाकर तृप्त हो गए, और उन्होंने बचे हुए टुकड़ों की बारह टोकरियाँ उठाईं।
वह तो प्यासे को संतुष्ट करता है,
और भूखे को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है।
अब जो बोनेवाले को बीज और भोजन के लिए रोटी देता है, वही तुम्हें बीज देगा और उसे बढ़ाएगा और तुम्हारी धार्मिकता की उपज में वृद्धि करेगा।
उदार व्यक्ति संपन्न हो जाता है;
और जो दूसरों की खेती सींचता है,
उसकी भी सींची जाएगी।
मनभावने वचन शहद के छत्ते के समान होते हैं;
वे प्राण के लिए मीठे और देह को स्वस्थ करनेवाले होते हैं।
Gratidão e moderação
Nada trouxemos para o mundo e nada levaremos. Tudo o que fizerdes, fazei para a glória de Deus — inclusive comer e beber.
क्योंकि न तो हम इस संसार में कुछ लेकर आए हैं, और न ही कुछ लेकर जा सकते हैं; यदि हमारे पास भोजन और वस्त्र हैं, तो हम इन्हीं से संतुष्ट रहेंगे।
इसलिए चाहे तुम खाओ या पीओ, या जो कुछ भी करो, सब परमेश्वर की महिमा के लिए करो।
वे प्रतिदिन एक मन होकर मंदिर-परिसर में निरंतर इकट्ठा होते, घर-घर रोटी तोड़ते, आनंद तथा मन की सीधाई से भोजन करते, और परमेश्वर की स्तुति किया करते थे और सब लोग उनसे प्रसन्न थे। प्रभु प्रतिदिन उद्धार पानेवालों को उनमें जोड़ दिया करता था।
देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ। यदि कोई मेरी आवाज़ सुनकर द्वार खोलता है, तो मैं उसके पास भीतर आकर उसके साथ भोजन करूँगा और वह मेरे साथ।
खानेवाला न-खानेवाले को तुच्छ न समझे; और न ही न-खानेवाला खानेवाले पर दोष लगाए, क्योंकि परमेश्वर ने उसे ग्रहण किया है।
इसलिए खाने और पीने में या पर्व या नए चाँद या सब्त के दिन के विषय में तुम पर कोई दोष न लगाए, जो आनेवाली बातों की छाया मात्र है परंतु वास्तविकता तो मसीह है।
फिर परमेश्वर ने कहा, "देखो, सारी पृथ्वी के प्रत्येक बीजवाले पौधे, और प्रत्येक वृक्ष जिनमें बीजवाले फल होते हैं, वे सब मैंने तुम्हें दिए हैं। वे तुम्हारे भोजन के लिए होंगे।
सब चलने-फिरनेवाले जीवित प्राणी तुम्हारा आहार होंगे; जैसे मैंने तुम्हें हरे-हरे छोटे पेड़-पौधे दिए थे, वैसे ही अब सब कुछ देता हूँ। परंतु तुम मांस को उसके प्राण अर्थात् उसके लहू सहित न खाना।