Amor próprio
O amor próprio saudável reconhece o valor que Deus nos deu. Fomos criados à imagem de Deus, maravilhosamente formados. Aceitar-se é honrar o Criador.
मैं तेरा धन्यवाद करूँगा, इसलिए कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गयामैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया: भयानक अर्थात् भयभीत करनेवाली बातें जिनसे भय या श्रद्धा उत्पन्न होती है। अद्भुत रीति से रचा गया: का वास्तविक अर्थ है, विशिष्ट: या पृथक:। हूँ।
तेरे काम तो आश्चर्य के हैं,
और मैं इसे भली भाँति जानता हूँ। (प्रका. 15:3)
मेरे लिये तो हे परमेश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं!
उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है!
यदि मैं उनको गिनता तो वे रेतकणों से भी अधिक ठहरते।
जब मैं जाग उठता हूँ, तब भी तेरे संग रहता हूँ।
जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है,
और चन्द्रमा और तरागण को जो तूने नियुक्त किए हैं, देखता हूँ;
तो फिर मनुष्य क्या हैतो फिर मनुष्य क्या है: मनुष्य कैसा महत्वहीन है, उसका जीवन भाप के समान है वह अति शीघ्र विलोप हो जाता है वह अति पापी और अशुद्ध है कि ऐसा प्रश्न किया जाए। कि तू उसका स्मरण रखे,
और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?
क्योंकि तूने उसको परमेश्वर से थोड़ा ही कम बनाया है,
और महिमा और प्रताप का मुकुट उसके सिर पर रखा है।
वह कंगाल को मिट्टी पर से,
और दरिद्र को घूरे पर से उठाकर ऊँचा करता हैवह कंगाल को मिट्टी पर से, .... उठाकर ऊँचा करता है: जीवन की तुच्छ अवस्था से वह उन्हें धन-सम्पदा और पद-प्रतिष्ठा में ले आता है।,
कि उसको प्रधानों के संग,
अर्थात् अपनी प्रजा के प्रधानों के संग बैठाए। (अय्यू. 36:7)
परन्तु यहोवा ने शमूएल से कहा, "न तो उसके रूप पर दृष्टि कर, और न उसके कद की ऊँचाई पर, क्योंकि मैंने उसे अयोग्य जाना है; क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है।" (मत्ती 22:18, मर. 2:8, यूह. 2:25)
पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और परमेश्वर की निज प्रजा हो, इसलिए कि जिसने तुम्हें अंधकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। (निर्ग. 19:5,6, व्यव. 7:6, व्यव. 14:2, यशा. 9:2)
क्या दो पैसे की पाँच गौरैयाँ नहीं बिकती? फिर भी परमेश्वर उनमें से एक को भी नहीं भूलता। वरन् तुम्हारे सिर के सब बाल भी गिने हुए हैं, अतः डरो नहीं, तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो।
आत्मिक वरदानों से परमेश्वर की सेवा
क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूँ, कि जैसा समझना चाहिए, उससे बढ़कर कोई भी अपने आपको न समझे; पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बाँट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।