Amor próprio
O amor próprio saudável reconhece o valor que Deus nos deu. Fomos criados à imagem de Deus, maravilhosamente formados. Aceitar-se é honrar o Criador.
बाखीन तमु एक टाळली कुळी से, अने राजवाड़्या पुंजारा से, अने चोखला माणहु नो टोळो से, आने भगवान ना असामी से, भगवान ते तमने पाप नी अंदारली जीवाय मे गेथा नीकाळीन, वीजाळा नी जीवाय जुगु बोलावलो से। तीना गुण उजन्ता करो।
"बे पय्हा मे पांच घंचड़ा नी वेचाय ह़ु? ते बी भगवान तीमनी मेथी एक ने बी नी वीहरे। होव, तमारा मुंडान आखा नीम्बाळा गणायला से। एतरे तमु ना बीहो काहाके तमारो भाव घंचड़ा गेथो वदु से।
काहाके मे तीहयी दया ना कारण जे मने जड़ली से, तमारी मे ना आखा ने केम, के जीसम ह़मजवा जोवे तीनी सी बड़ीन खुद ने नी ह़मजवा जोवे; पण जीसम भगवान आखा ने भरहा ना काम ना अनसारे वाट देदलो से; तीसमेत खुद ने वारला मन सी ह़मजे।