Anjos
Os anjos são seres celestiais criados por Deus para servir, adorar e executar seus propósitos. A Bíblia revela anjos mensageiros, guerreiros e protetores ao longo de toda a história redentora.
पर ओकर य बचर कर क पछ, परभ क एक सवरगदत ह ओल सपन म दखस अऊ ओ सवरगदत ह ओल कहस, "ह यसफ, दऊद क सतन, तह मरयम ल अपन घरवल क रप म घर लय बर झन डर, कबरक जऊन ह ओकर गरभ म हवय, ओह पबतर आतम क तरफ ल अय।
सवरगदत ह मईलगनमन ल कहस, "झन डरव, कबरक मह जनत हव क तमन यस ल खजत हव, जऊन ल करस ऊपर चघय ग रहस। ओह इह नइ ए; ओह ज उठ हवय, जइसन ओह कह रहस। आवव अऊ ओ ठऊर ल दखव, जह ओल रख ग रहस।
क तह नइ जनस क मह अपन दद ल बनत कर सकथव अऊ ओह मर बर तरत सवरगदतमन क बरह ठन बड-बड सनक दल ल घल जद पठ दह।
पर सवरगदत ह ओल कहस, "ह मरयम, झन डर! कबरक परमसर क दय तर ऊपर हय हवय। दख, तह दह म हब अऊ एक बट ल जनम दब, अऊ तह ओकर नव यस रखब।
पर सवरगदत ह ओमन ल कहस, "झन डरव! मह तमहर बर बड आनद क सघर सदस लन हवव, जऊन ह जमम मनखमन बर हह।
"सबल ऊच सवरग म परमसर क महम
अऊ धरत म ओ मनखमन ऊपर सत हवय, जऊन मन ल ओह खस हवय।"
मह तमन ल कहत हव क ओह कसम ल, जब एक पप मनख पछतप करथ, त उह सवरग म परमसर क सवरगदतमन क आघ म आनद मनय जथ।"
जब ओमन यस क जवत बर ऊपर अकस कत आख गडयय दखत रहन, त अचनक द झन मनख सफद कपड पहर ओमन क बज म ठढ ह गन, अऊ ओमन कहन, "ह गलल क मनखमन, तमन कबर अकस कत दखत इह ठढ हवव? एह यस, जऊन ह तमन कर ल सवरग म उठ लय गस, ओहच ढग ल ओह फर आह, जऊन ढग ल ओल तमन सवरग कत जवत दख हवव।"
भईमन सह एक-दसर ल मय करत रहव। अनजन मनखमन क आव-भगत कर बर झन भलव, कबरक अइसन कर क दवर कछ मनखमन अनजन म सवरगदतमन क आव-भगत कर हवय।
कह मह मनखमन अऊ सवरगदतमन क भस म गठयवव, पर मय नइ रखव, त मह सरप टनटनवत घट य फर झनझनवत झझ सह अव।
य बत म कन सक नइ ए क परमसर क भकत क भद ह महन ए:
ओह मनख क रप म परगट हईस,
पबतर आतम क दवर सबत कर गस,
सवरगदतमन ल दखई दस,
जत-जत म ओकर परचर हईस,
जमम ससर म मनखमन ओकर ऊपर बसवस करन,
अऊ ओह महम म सवरग ऊपर उठ लय गस।
कबरक परभ ह खद सवरग ल उतरह। ओकर आय क बर म ऊचह अवज म हकम दय जह, परधन सवरगदत क अवज हह अऊ परमसर क तरह बजह अऊ जऊन मन मसह म बसवस करक मर ग हवय, ओमन पहल ज उठह। ओकर बद, हमन बसवसमन जऊन मन जयत हवन अऊ बच हवन, ओमन क सग बदर म उठ लय जब तक परभ क सग हव म भट करन। अऊ य कसम ल हमन हमस परभ क सग रहब।
जऊन ह बजय हह, ओल यमन क सह सफद कपड पहरय जह। मह ओकर नव ल जनग क कतब ल कभ नइ मटवव, पर अपन दद अऊ ओकर सवरगदतमन क आघ म ओल गरहन करह।
कबरक मल पर भरस हवय क न त मरत, न जनग, न सवरगदतमन, न परत आतममन, न त बरतमन न भवसय, न कन सकत, न त ऊचई न गहरई अऊ न जमम सरसट म कन आन चज हमन ल परमसर क मय ल अलग कर सकथ, जऊन ह हमर परभ मसह यस म हवय।