Arca da aliança
A Arca da Aliança era o símbolo mais sagrado de Israel — representava a presença de Deus no meio do seu povo. Sobre ela brilhava a glória do Senhor entre os querubins.
"बबूल की लकड़ी का एक संदूक बनवाना; उसकी लंबाई ढाई हाथ, चौड़ाई डेढ़ हाथ और ऊँचाई भी डेढ़ हाथ की हो। उसे भीतर और बाहर शुद्ध सोने से मढ़वाना, तथा उसके चारों ओर सोने की किनारी लगवाना। सोने के चार कड़े ढलवाकर उसके चारों पायों पर लगवाना, उसके एक ओर दो कड़े और दूसरी ओर भी दो कड़े लगवाना। फिर बबूल की लकड़ी के डंडे बनवाना, और उन्हें भी सोने से मढ़वाना। संदूक के दोनों ओर के कड़ों में उन डंडों को डालना, जिनसे संदूक को उठाकर ले जाया जा सके। वे डंडे संदूक के कड़ों में लगे रहें, और उससे अलग न किए जाएँ। जो साक्षीपत्र मैं तुझे दूँगा उसे उसी संदूक में रखना।
"फिर शुद्ध सोने का एक प्रायश्चित्त का ढक्कना बनवाना; उसकी लंबाई ढाई हाथ, और चौड़ाई डेढ़ हाथ की हो। तू सोने के दो करूब गढ़कर बनवाना, और उन्हें प्रायश्चित्त के ढक्कने के दोनों सिरों पर लगवाना। एक करूब को एक सिरे पर और दूसरे करूब को दूसरे सिरे पर लगवाना; तथा प्रायश्चित्त के ढक्कने को और करूबों को एक ही टुकड़े से बनवाना कि वे उसके दोनों सिरों पर हों। उन करूबों के पंख ऊपर से ऐसे फैले हुए हों कि प्रायश्चित्त का ढक्कना उनसे ढका रहे, और उनके मुँह आमने-सामने और प्रायश्चित्त के ढकने की ओर हों। प्रायश्चित्त के ढक्कने को संदूक के ऊपर लगवाना; और जो साक्षीपत्र मैं तुझे दूँगा उसे संदूक में रखना।
वहाँ मैं तुझसे मिला करूँगा, और प्रायश्चित्त के ढक्कने के ऊपर से तथा साक्षीपत्र के संदूक के ऊपर बने दोनों करूबों के बीच में से तुझे वह सब बता दूँगा जिसकी आज्ञा मैं तुझे इस्राएलियों के विषय में देने पर हूँ।
फिर बसलेल ने बबूल की लकड़ी का संदूक बनाया, जिसकी लंबाई ढाई हाथ, चौड़ाई डेढ़ हाथ, और ऊँचाई भी डेढ़ हाथ की थी।
फिर यहोवा ने मूसा से कहा, "पहले महीने के पहले दिन तू मिलापवाले तंबू के निवासस्थान को खड़ा कर देना। उसमें साक्षीपत्र के संदूक को रखकर भीतर के परदे की आड़ में कर देना।
उसने साक्षीपत्र को लेकर संदूक में रख दिया, तथा संदूक में डंडों को लगाकर प्रायश्चित्त के ढक्कने को संदूक के ऊपर रख दिया। फिर वह संदूक को निवासस्थान में लेकर आया, और भीतर के परदे को लगाकर साक्षीपत्र के संदूक को उसकी आड़ में कर दिया; जिस प्रकार यहोवा ने मूसा को आज्ञा दी थी।
अब पहली वाचा में भी सेवा के नियम थे, और पृथ्वी का पवित्र स्थान था। एक तंबू बनाया गया, जिसके बाहरी भाग में जो पवित्र स्थान कहलाता था, दीवट, मेज़ और भेंट की रोटियाँ होती थीं। दूसरे परदे के पीछे तंबू का वह भाग था जो परम पवित्र स्थान कहलाता था। उसमें धूप जलाने के लिए सोने की एक वेदी और चारों ओर से सोने से मढ़ा हुआ वाचा का संदूक था, जिसमें मन्ना से भरा हुआ सोने का मर्तबान, हारून की अंकुरित हुई लाठी और वाचा की पटियाँ थीं। संदूक के ऊपर तेजोमय करूब थे जो प्रायश्चित्त के ढक्कन पर छाया किए हुए थे। इनका विस्तार से वर्णन करना अभी संभव नहीं है।
तब परमेश्वर का मंदिर जो स्वर्ग में है, खोला गया। उसके मंदिर में उसकी वाचा का संदूक दिखाई दिया, और वहाँ बिजलियाँ चमकीं, गड़गड़ाहट और गर्जन हुए तथा भूकंप हुआ, और भारी ओलावृष्टि हुई।