Autocontrole
O autocontrole é fruto do Espírito e virtude indispensável. A graça de Deus nos ensina a renunciar à impiedade e a viver com sobriedade, domínio próprio e piedade no mundo presente.
Fruto e virtude
O domínio próprio é fruto do Espírito. Acrescentai ao conhecimento o autocontrole. A disciplina interior produz maturidade.
पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, शान्ति, धीरज, और दया, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे-ऐसे कामों के विरोध में कोई व्यवस्था नहीं।
और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्न करके, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ, और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति, और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ।
क्योंकि परमेश्वर का अनुग्रह प्रगट है, जो सब मनुष्यों में उद्धार लाने में सक्षम है। और हमें चिताता है, कि हम अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं से मन फेरकर इस युग में संयम और धार्मिकता से और भक्ति से जीवन बिताएँ;
क्योंकि परमेश्वर ने हमें भय की नहीं पर सामर्थ्य, और प्रेम, और संयम की आत्मा दी है।
परन्तु मैं अपनी देह को मारता कूटता, और वश में लाता हूँ; ऐसा न हो कि औरों को प्रचार करके, मैं आप ही किसी रीति से निकम्मा ठहरूँ।
और हर एक पहलवान सब प्रकार का संयम करता है, वे तो एक मुर्झानेवाले मुकुट को पाने के लिये यह सब करते हैं, परन्तु हम तो उस मुकुट के लिये करते हैं, जो मुर्झाने का नहीं।
तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने के बाहर है: और परमेश्वर विश्वासयोग्य है: वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन् परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। (2 पत. 2:9)
Dominar a si mesmo
Melhor é quem domina o seu espírito do que quem toma uma cidade. A cidade sem muros é quem não tem autocontrole.
विलम्ब से क्रोध करना वीरता से,
और अपने मन को वश में रखना, नगर को जीत लेने से उत्तम है।
जिसकी आत्मा वश में नहीं वह ऐसे नगर के समान है जिसकी शहरपनाह घेराव करके तोड़ दी गई हो।
मूर्ख अपने सारे मन की बात खोल देता है,
परन्तु बुद्धिमान अपने मन को रोकता, और शान्त कर देता है।
न तो दाहिनी ओर मुड़ना, और न बाईं ओर;
अपने पाँव को बुराई के मार्ग पर चलने से हटा ले।
मूर्ख की रिस तुरन्त प्रगट हो जाती हैमूर्ख की रिस तुरन्त प्रगट हो जाती है: "मूर्ख" अपना क्रोध रोक नहीं पाता है, वह उसी "पल" उसी दिन उसे प्रगट कर देता है। समझदार मनुष्य जानता है कि निन्दा और लज्जा पर क्रोध तुरन्त प्रगट करने से और अधिक कटाक्ष किए जाएँगे। ,
परन्तु विवेकी मनुष्य अपमान को अनदेखा करता है।
जीभ के वश में मृत्यु और जीवन दोनों होते हैं,
और जो उसे काम में लाना जानता है वह उसका फल भोगेगा।
और इस संसार के सदृश्य न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिससे तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो।
सुनना और उस पर चलना
हे मेरे प्रिय भाइयों, यह बात तुम जान लो, हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्पर और बोलने में धीर और क्रोध में धीमा हो।
क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लहू और माँस से नहीं, परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अंधकार के शासकों से, और उस दुष्टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं।
इसलिए हम औरों की समान सोते न रहें, पर जागते और सावधान रहें।
"मैंने अपनी आँखों के विषय वाचा बाँधी है,
फिर मैं किसी कुँवारी पर क्यों आँखें लगाऊँ?
अपने विषय में चौकस रहो; कि जो परिश्रम हम सब ने किया है, उसको तुम न खोना, वरन् उसका पूरा प्रतिफल पाओ।