O que é bom
O que é bom vem de Deus. A Bíblia celebra a bondade divina e nos convida a discernir, praticar e desfrutar tudo o que é bom — porque toda boa dádiva vem do Pai das luzes.
तब परमेश्वर ने जो कुछ बनाया था, सब को देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है। तथा साँझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार छठवाँ दिन हो गया। (1 तीमु. 4:4)
यहोवा भला और सीधा है;
इसलिए वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा।
परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है;
मैंने प्रभु यहोवा को अपना शरणस्थान माना है,
जिससे मैं तेरे सब कामों को वर्णन करूँ।
यहोवा का धन्यवाद करना भला है,
हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना;
प्रातःकाल को तेरी करुणा,
और प्रति रात तेरी सच्चाईतेरी सच्चाई: प्रकृति के नियम में उसकी सच्चाई तेरी प्रतिज्ञाओं में, तेरे स्वभाव में, मनुष्यों के साथ तेरे दिव्य स्वभाव में। का प्रचार करना,
दस तारवाले बाजे और सारंगी पर,
और वीणा पर गम्भीर स्वर से गाना भला है।
क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करुणा सदा के लिये,
और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।
देखो, यह क्या ही भली और मनोहर बात है
कि भाई लोग आपस में मिले रहें!
क्योंकि मैंने तुम को उत्तम शिक्षा दी है;
मेरी शिक्षा को न छोड़ो।
सज्जन उत्तर देने से आनन्दित होता है,
और अवसर पर कहा हुआ वचन क्या ही भला होता है!
हे मेरे पुत्र तू मधु खा, क्योंकि वह अच्छा है,
और मधु का छत्ता भी, क्योंकि वह तेरे मुँह में मीठा लगेगा।
इसी रीति बुद्धि भी तुझे वैसी ही मीठी लगेगी;
यदि तू उसे पा जाए तो अन्त में उसका फल भी मिलेगा, और तेरी आशा न टूटेगी।
बुद्धि विरासत के साथ अच्छी होती है,
वरन् जीवित रहनेवालों के लिये लाभकारी है।
जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है।
यहोवा से उद्धार पाने की आशा रखकर चुपचाप रहना भला है।
हे मनुष्य, वह तुझे बता चुका है कि अच्छा क्या है; और यहोवा तुझ से इसे छोड़ और क्या चाहता है, कि तू न्याय से काम करे, और कृपा से प्रीति रखे, और अपने परमेश्वर के साथ नम्रता से चले? (मत्ती 23:23, यशा. 1:17)
इसलिए व्यवस्था पवित्र है, और आज्ञा पवित्र, धर्मी, और अच्छी है।
और इस संसार के सदृश्य न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिससे तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो।
अब तुम्हारी भलाई की निन्दा न होने पाए।
अब मैं सबसे पहले यह आग्रह करता हूँ, कि विनती, प्रार्थना, निवेदन, धन्यवाद, सब मनुष्यों के लिये किए जाएँ। राजाओं और सब ऊँचे पदवालों के निमित्त इसलिए कि हम विश्राम और चैन के साथ सारी भक्ति और गरिमा में जीवन बिताएँ। यह हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर को अच्छा लगता और भाता भी है,
क्योंकि परमेश्वर की सृजी हुई हर एक वस्तु अच्छी है, और कोई वस्तु अस्वीकार करने के योग्य नहीं; पर यह कि धन्यवाद के साथ खाई जाए; (उत्प. 1:31) क्योंकि परमेश्वर के वचन और प्रार्थना के द्वारा शुद्ध हो जाती है।
क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिसमें न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, और न ही वह परछाई के समान बदलता है।
नमक अच्छा है, पर यदि नमक का स्वाद बिगड़ जाए, तो उसे किस से नमकीन करोगे? अपने में नमक रखो, और आपस में मेल मिलाप से रहो।"