Colheita
A colheita é princípio bíblico universal: colhemos o que semeamos. Quem semeia na fé e obediência colherá bênçãos abundantes do Senhor.
Semear e colher
Quem semeia no Espírito, do Espírito colherá vida eterna. Não nos cansemos de fazer o bem — ao tempo certo colheremos.
काहेकि जो अपनो सरीर को लाने बोवा हैं वई सरीर को व्दारा नास होन वाली कटनी काटेगो; अर जे आत्मा को लाने बोवा हैं, उ आत्मा को व्दारा अनन्त जीवन कि कटनी काटेगो।
धोका मत खानु; परमेस्वर मजाक म नी उडायो जावा, काहेकि जो कुछ इंसान बोवा हैं उईच काटेगो।
हम भलाई करनो म हिम्मत नी छोडन का काहेकि हम ढीला नी होन का ते अच्छी बखत म कटनी काटेगो।
पर जो बोवन वालो ख बीज अऊर जोवन का लाने रोटी दे हैं, उ तुम ख बीज दे हे, अऊर ओ ख बढ़ाए करे; अऊर तुमारा धार्मिक ख फल हुन ख बढ़ाए हे।
मिलाप करान वालो धरम को फल मेल-मिलाप को संग सान्ति से बोवह हैं।
तुरत म हर तरह कि ताड़ना खुसी की नी, पर दु: ख ही कि बात दिखई पड़ हैं; तेभी जे ओ ख सहते-सहते मजबूत हो गयो हैं, बाद म उन ख चैन को संग धर्म को फल मीलह हैं
Fidelidade na semeadura
Honra ao Senhor com as tuas primícias. O Senhor abrirá as janelas do céu e derramará bênção sem medida.
बददल को पक्छी हुन ख देख वी नी बोवह हैं नी काटा हैं अर नी बखारी हुन म बटोर हैं, ते भी तुम्हरो स्वर्गीय बाप उन ख खिलावा हैं, का तुम उन से कई जादा किमती नी रहता?