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Compaixão: o que a Bíblia ensina sobre este sentimento

Na Bíblia, compaixão não é mera simpatia ou pena passageira: é a dor sentida no íntimo diante do sofrimento alheio que move imediatamente à ação prática. As Escrituras revelam a compaixão primeiro como traço central do caráter de Deus e, a partir dessa experiência, como um chamado prático para os relacionamentos humanos.

A compaixão no caráter de Deus

Quando Deus se revela na Bíblia, a compaixão aparece associada à sua paciência e à sua disposição constante de perdoar. Ele não reage ao pecado humano apenas com juízo rígido, mas busca reconciliação.

पर प्रभु दयालु अर अनुग्रहकारी परमेसवर सै,

तू देर तै छो करण आळा अर अति करुणामय सै।(भजन संहिता 86:15)

तेरे बराबर इसा परमेसवर कित्त सै जो अधर्म नै माफ करै अर अपणे खास हिस्से के बचे होया के अपराध नै ढाँप दे? वो अपणे छो नै सदा बणाए न्ही रहन्दा, क्यूँके वो करुणा तै प्यार राक्खै सै।(मीका 7:18)

Mesmo em contextos de crise, exílio e destruição, a Escritura aponta que a compaixão divina é o motivo pelo qual a história humana continua e encontra restauração.

हम मिट न्ही गए; या यहोवा की बड़ी दया का फळ सै, क्यूँके उसकी सारी दया अमर सै।

वो रोज सबेरै नई होन्दी रहवै सै; तेरी सच्‍चाई महान सै।(विलापगीत 3:22,23)

तोभी यहोवा इस करकै देर करै सै के थारे पै अनुग्रह करै, अर इस करकै उप्पर उठैगा के थारे पै दया करै। क्यूँके यहोवा न्यायी परमेसवर सै; कितणे धन्य सैं वे जो उसपै उम्मीद लगाऐ रहवै सैं।(यशायाह 30:18)

O acolhimento divino na fragilidade humana

Para explicar como essa compaixão opera, os escritores bíblicos recorrem a figuras de cuidado familiar: a atenção atenta de um pai aos limites dos filhos e o zelo irredutível de uma mãe pelo bebê que amamenta.

जिस तरियां बाप अपणे बाळकां पै दया करै सै,

उसे तरियां यहोवा अपणे डरण आळयां पै दया करै सै।(भजन संहिता 103:13)

"के यो हो सकै सै के कोए माँ अपणे दूध पीन्दे बाळक नै भूल जावै अर अपणे जाम्मे होए लड़के पै दया ना करै? हाँ, वो तो भूल सकै सै, पर मै तन्‍नै न्ही भूल सकदा। देख, मन्‍नै तेरी तस्वीर ताहीं अपणी हथेळियां पै खोदकै बणाई सै; तेरी शहरपनाह सदा मेरी नजर कै स्याम्ही बणी रहवै सै।(यशायाह 49:15,16)

O texto mostra que Deus não rejeita a pessoa por causa de sua fraqueza ou de seus limites; pelo contrário, é exatamente ali que o amparo divino se manifesta com maior firmeza.

क्यूँके तेरी करुणा जीवन तै भी आच्छी सै,

मै तेरी बड़ाई करुँगा।(भजन संहिता 63:3)

"मै यहूदा के घरान्‍ने नै पराक्रमी करुँगा, अर यूसुफ के घरान्‍ने का उद्धार करुँगा। मेरे ताहीं उनपै दया आई सै, इस कारण मै उननै वापस ल्याकै उन्हे के देश म्ह बसाऊँगा, अर वे इसे होवैंगे, मान्‍नो मन्‍नै उन ताहीं मन तै न्ही उतारया; मै उनका परमेसवर यहोवा सूं, इस करकै उनकी सुण ल्यूँगा(जकर्याह 10:6)

A empatia manifesta em Cristo

No Novo Testamento, a compaixão deixa de ser apenas uma palavra e se torna encarnação. Jesus participou da existência humana, conhecendo a dor, a perda e o sofrimento por experiência direta.

क्यूँके म्हारा यो महायाजक जो यीशु मसीह सै, म्हारी हरेक कमजोरियाँ नै जाणे सै, बल्के वो सारी बात्तां म्ह म्हारै तरियां परख्या तो गया, फेर भी निष्पाप लिकड़या।(इब्रानियों 4:15)

Essa experiência de ser alcançado pela misericórdia de Deus cria uma corrente de cuidado mútuo: quem recebeu consolo na própria aflição é capacitado a se achegar à dor do outro.

म्हारै प्रभु यीशु मसीह के पिता अर परमेसवर का धन्यवाद होवै, जो दया का पिता, अर जो हमेशा तसल्‍ली देवै सै। परमेसवर म्हारै सारे दुखां म्ह तसल्‍ली देवै सै, ताके हम उस तसल्‍ली कै कारण जो परमेसवर म्हारै ताहीं देवै सै, उन ताहीं भी तसल्‍ली दे सका, जो इस तरियां के दुखां म्ह हो।(2 कुरिन्थियों 1:3,4)

A compaixão como prática diária

A Escritura rejeita a compaixão que fica só no discurso. Tanto a lei profética do Antigo Testamento quanto o ensino apostólico exigem que o sentimento se converta em justiça concreta para com os necessitados e em paciência na vida comunitária.

खराई तै न्याय करणा, अर एक दुसरे कै गैल कृपा अर दया तै काम करणा, ना तो बिधवा पै अंधेर करणा, ना अनाथां पै, ना परदेशी पै, अर ना दीन जन पै; अर ना अपणे-अपणे मन म्ह एक दुसरे की हानि की कल्पना करणा।"(जकर्याह 7:9,10)

पर जिस किसे कै धोरै दुनिया की दौलत हो अर वो अपणे बिश्वासी भाई नै कंगाल देखकै उसपै तरस ना खावै, तो उस म्ह परमेसवर का प्यार किस तरियां बण्या रहै सकै सै?(1 यूहन्‍ना 3:17)

Nas relações do dia a dia, isso se traduz em empatia real, na disposição para perdoar e no cultivo consciente da paz.

क्यूँके परमेसवर नै थारे ताहीं पवित्र माणस बणण खात्तर चुण्या सै, अर वो थारे ताहीं प्यार करै सै, इस करकै बड़ी करुणा, भलाई, दीनता, नम्रता, अर सहनशीलता नै धारण करो।(कुलुस्सियों 3:12)

एक-दुसरे पै दयालु अर करुणामय हो, अर जिसा परमेसवर नै मसीह म्ह थारे कसूर माफ करे, उस्से तरियां थम भी एक-दुसरे के कसूर माफ करो।(इफिसियों 4:32)

आनन्द करण आळा कै गेल्या आनन्द करो, अर रोण आळा कै गेल्या रोओ।(रोमियों 12:15)

आखरी म्ह मै कहणा चाहूँ सूं, के थम एक मन हो जाओ, एक-दुसरे तै भाई-भाण की तरियां प्यार करो, एक-दुसरे के बाबत दयालु रहो, अर नरम बणो।(1 पतरस 3:8)

हे बिश्वासी भाईयो, आखर म्ह मै थारे तै कहणा चाहूँ सूं, के आनन्दित रहों, सिध्द बणदे जाओ, अर एक-दुसरे नै उत्साहित करो, एक ए मन रहों, मिल-जुल के रहों। अर प्यार अर शान्ति का देण आळा परमेसवर थारे गेल्या होवैगा।(2 कुरिन्थियों 13:11)

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