Compreensão
A verdadeira compreensão vem de Deus. Os caminhos do Senhor são mais altos que os nossos. Mas Ele nos convida a buscar entendimento — e promete iluminar quem o busca de coração.
A sabedoria de Deus
Os meus pensamentos não são os vossos pensamentos. A incompreensibilidade de Deus nos leva à humildade e adoração.
"जइस अकस ह धरत ल ऊच हवय,
वइस मर चल ह तमहर चल ल
अऊ मर सच-बचर ह तमहर सच-बचर ल बहत ऊच हवय।
"ओमन ऊपर हय, जमन अपन रचइय ल झगर करथ,
ओमन कछ न हय, पर भइय म
मट क बरतन क कटमन क बच बरतन क कट अय।
क मट ह कमहर ल कहथ,
‘त क बनत हस?’
क करगर क बनय चज ह कहथ,
‘कमहर क त हथमन नइ ए’?
क तमन नइ जनव?
क तमन नइ सन हव?
यहव ह अनतकल क परमसर,
अऊ धरत क सरजनहर अय।
ओह न त थकय न ह ओल उबस आवय,
ओकर समझ क बत ल कन नइ जन सकय।
यहव ह महन ए अऊ सबल जद परसस क यगय ए;
ओकर महनत ल कन समझ नइ सकय।
यकर पहल क पहडमन बनन
य तह जमम ससर क रचन करय,
अनद ल अनतकल तक तहच ह परमसर अस।
तर नजर म हजर सल ह अइसन ए
जइसन क एक दन, जऊन ह अभ-अभ बत हवय,
य रथय क एक पहर।
अह! परमसर क बदध अऊ गयन क धन क गहरई ह कतक अथह अय!
ओकर सह नयय कन नइ कर सकय,
अऊ ओकर कम कर क तरक ल कन नइ जन सकय!
Buscar entendimento
Clama a mim e responder-te-ei. A sabedoria é a coisa principal — busque o entendimento com todo o coração.
‘मर ल परथन कर अऊ मह तल जबब दह अऊ तल बड-बड अऊ कठन बत बतह, जमन ल तह नइ जनस।’
बदध ह सबल उततम ए, एकरसत यल पय क कसस कर,
अऊ समझ ल पय बर जमम कछ कर।
जऊन ह धरज धरथ, ओह समझदर अय,
पर जऊन ह तरत गसस हथ, ओह मरखत करथ।
मनख ह अपन मन म बहत यजन बनथ,
पर यह सरप यहव क ह उदसय अय, जऊन ह पर हथ।
मनख ह सचथ क ओकर खद क चलचलन ह सह अय,
पर यहव ह मनख क मन ल जचथ।
मह हमस बनत करथव क हमर परभ यस मसह क परमसर, महममय दद ह तमन ल बदध अऊ आतमक परकसन क आतम दवय, तक तमन ओल अऊ बन करक जनव।
पर हमर परभ अऊ उदधर करइय यस मसह क अनगरह अऊ गयन म बढत जवव।
ओकर महम अभ अऊ सदकल तक हवत रहय! आमन।
Iluminação divina
A entrada da tua Palavra dá luz e entendimento. Deus revela verdades ocultas e transforma nossa visão da realidade.
तर बचन क समझ ल अजर मलथ;
यह सधरन मनख ल समझ क आतम दथ।
मह तल नरदस दह अऊ ओ रसत क बत सखह, जम तल जन चह;
मह तर ऊपर अपन मय क नजर रखक तल सलह दह।
जइस क तमन हव क रसत ल नइ जनव,
य य नइ जनव क दई क गरभ म लइक क दह ह कइस बनथ,
ओह कसम ल तमन परमसर क कम ल नइ समझ सकव,
जऊन ह क जमम चज क बननवल ए।
यस ह ओल य जबब दस, "मह तल सच-सच बतवत हव, जब तक कन मनख क नव जनम नइ हवय, तब तक ओह परमसर क रज ल नइ दख सकय।"
यस ह ओमन कत दखस अऊ कहस, "य बत ह मनख क दवर सभव न हय, पर परमसर क दवर जमम बत ह सभव अय।"
बईठ क पछ, यस ह बरह चलमन ल बलक कहस, "कह कन सबल बड हय चहथ, त ओह सबल छट अऊ सब क सवक बनय।"
अब न कन यहद ए अऊ न ह यनन, न कन गलम न सततर, न कन नर न नर, कबरक तमन जमम झन मसह यस म एक अव। यद तमन मसह क अव, त तमन अबरहम क बस अव अऊ परमसर क परतगय क मतबक वरस अव।
हर बत ल परखव; जऊन ह बन बत ए, ओहच म बन रहव। हर कसम क बरई ल अलग रहव।
हलक हमन ससर म रहथन, पर हमन ससरक उदसय बर नइ लडन।
एकरसत, हमन ओ चज ऊपर धयन नइ दवन, जऊन ह दखत हवय, पर हमन ओ चज ऊपर धयन लगथन, जऊन ह नइ दखत हवय। कबरक जऊन चज ह दखत हवय, ओह सरप कछ समय बर अय, पर जऊन चज ह नइ दखय, ओह सदकल तक बन रहथ।
जब ककर परछ हथ, त ओह य झन कहय क मर परछ परमसर ह करत हवय, कबरक न त खरप बत ल परमसर क परछ ह सकथ अऊ न ह ओह ककर परछ खद करथ।