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Dar: o que a Bíblia ensina sobre generosidade e ofertas

Na Bíblia, dar não é uma obrigação imposta para barganhar o favor de Deus. É o reconhecimento prático de que tudo pertence ao Criador e que os recursos que passam pelas mãos humanas servem para sustentar a vida e socorrer quem precisa.

Quando a Escritura trata da generosidade, ela avalia primeiro a intenção do coração, e não apenas a quantia entregue.

A atitude do coração: dar com liberdade e alegria

O apóstolo Paulo orienta a igreja em Corinto sobre a coleta destinada aos cristãos necessitados da Judeia. Ele deixa claro que a contribuição cristã perde o valor espiritual se for feita por pressão social, constrangimento ou tristeza. Deus se agrada da prontidão voluntária, na medida daquilo que a pessoa realmente tem.

हर एक मनखे वइसने ही दान करय, जइसने ओह अपन मन म ठाने हवय; न अनिछा ले अऊ न ही दबाव ले, काबरकि परमेसर ह ओकर ले मया करथे, जऊन ह खुसी मन ले देथे।(2 कुरिन्थुस 9:7)

काबरकि यदि तुम्हर देय के ईछा हवय, त जऊन कुछू तुम्हर करा हवय, ओकर आधार म तुम्हर दान ह गरहन होही, जऊन ह तुम्हर करा नइं ए, ओकर आधार म नइं।(2 कुरिन्थुस 8:12)

परमेसर ह तुमन ला जम्मो किसम के आसीस बहुंतायत ले देय म सामर्थी अय, ताकि तुम्हर करा जरूरत के हर चीज हमेसा बहुंतायत म रहय अऊ तुमन हर एक बने काम म बहुंतायत से दे सकव।(2 कुरिन्थुस 9:8)

जऊन परमेसर ह बोवइया ला बीजा अऊ खाय बर रोटी देथे, ओह तुमन ला घलो बीजा अऊ खाय बर रोटी दीही अऊ तुम्हर बीजा के भंडार ला बढ़ाही अऊ तुम्हर धरमीपन के काम ला बगराही।(2 कुरिन्थुस 9:10)

तुमन ला हर किसम ले धनवान बनाय जाही, ताकि तुमन हर समय उदार बनव अऊ हमर जरिये तुमन जऊन उदारता ले देथव, ओकरे कारन बहुंते झन परमेसर ला धनबाद दीहीं।(2 कुरिन्थुस 9:11)

आने मन ला देवव, त तुमन ला घलो दिये जाही। बने ढंग ले नापके, दबा-दबाके, हला-हलाके, अऊ छलकत तुम्हर कोरा म डारे जाही। काबरकि जऊन नाप ले तुमन नापथव, ओही नाप ले तुम्हर बर घलो नापे जाही।"(लूका 6:38)

Generosidade prática no dia a dia

Nos livros poéticos e proféticos do Antigo Testamento, a prática de dar está ligada à justiça social e ao temor a Deus. Honrar a Deus com os bens inclui não reter o pagamento ou o socorro de quem tem direito a ele, além de defender a causa do vulnerável. A Bíblia ensina que uma vida avarenta empobrece a alma, enquanto a generosidade abre caminhos e gera comunhão.

अपन संपत्ति के दुवारा अऊ अपन भुइयां के

जम्मो पहिली-फसल देय के दुवारा यहोवा के आदरमान कर;(नीतिबचन 3:9)

जेमन के भलई करना हे, अऊ यदि तोला ओकर मऊका मिलथे,

त ओमन के भलई करे ले अपन ला झन रोक।(नीतिबचन 3:27)

उदार मनखे के उन्नति होही,

अऊ जऊन ह दूसर के खियाल रखथे, ओकर खियाल रखे जाही।(नीतिबचन 11:25)

उपहार ह मनखे बर रसता खोलथे

अऊ देवइया ला बड़े मनखेमन करा पहुंचाथे।(नीतिबचन 18:16)

दिन भर ओह ईछा करते रहिथे,

पर धरमी मनखे ह अपन बर बिगर रखे दे देथे।(नीतिबचन 21:26)

गोठिया अऊ सही नियाय कर;

गरीब अऊ जरूरतमंद मनखेमन के अधिकार के बचाव कर।(नीतिबचन 31:9)

नहेमियाह ह ओमन ले कहिस, "जावव अऊ अपन पसंद के खाना खावव अऊ मीठा रस पीके आनंद मनावव, अऊ जेमन रांधे नइं हवंय, ओमन बर कुछू जेवन पठोवव। आज के दिन ह हमर परभू बर पबितर दिन अय। दुखी झन होवव, काबरकि यहोवा के आनंद ह तुम्हर बल अय।"(नहेमियाह 8:10)

जम्मो दसमांस ला भंडारघर म ले आवव कि मोर घर म जेवन रहय। अइसने करके मोला परखव अऊ देखव कि मेंह स्वरग के झरोखामन ला खोलके तुम्हर ऊपर अइसन अपरमपार आसीस के बरसा करहूं कि तुम्हर करा येला रखे बर परयाप्त जगह नइं होही।(मलाकी 3:10)

O ensino de Jesus sobre dar sem exibição

No Sermão do Monte, Jesus adverte contra a prática de ajudar os outros apenas para ser visto e elogiado pelos homens. Dar esmola com discrição protege a dignidade de quem recebe e guarda o coração de quem doa da vaidade espiritual. Para Jesus, a graça recebida de graça deve ser repartida da mesma forma.

"एकरसेति, जब तुमन जरूरतमंद मनखे ला देथव, त डुगडुगी झन पीटवाव, जइसने कि ढोंगी मनखेमन यहूदीमन के सभा-घर अऊ गलीमन म करथें, ताकि मनखेमन ओमन के बड़ई करंय। मेंह तुमन ला सच कहत हंव कि ओमन अपन जम्मो ईनाम पा गीन।(मत्ती 6:2)

पर जब तुमन जरूरतमंद मनखे ला देथव, त तुम्हर डेरी हांथ ये बात ला झन जानय कि तुम्हर जेवनी हांथ का करत हवय। तुम्हर दान ह गुपत म रहय। तब तुम्हर स्वरगीय ददा, जऊन ह गुपत म करे गय काम ला घलो देखथे, तुमन ला ईनाम दीही।(मत्ती 6:3,4)

बिमरहामन ला चंगा करव, मरे मनखेमन ला जियावव, कोढ़ी मनखेमन ला सुध करव, परेत आतमामन ला निकालव। मुफत म तुमन ला मिले हवय, एकरसेति मुफत म देवव।(मत्ती 10:8)

यीसू ह ओला कहिस, "यदि तेंह सिद्ध बने चाहत हस, त जा, अपन जायदाद ला बेचके गरीबमन ला देय दे, अऊ तोला स्वरग म धन मिलही। तब आ अऊ मोर पाछू हो ले।"(मत्ती 19:21)

जऊन कोनो तुम्हर ले मांगथे, ओला देवव; अऊ कहूं कोनो तुम्हर चीज ला ले जावय, त ओला वापिस झन मांगव।(लूका 6:30)

A origem de tudo o que temos

Ao reunir materiais para a construção do templo, o rei Davi resumiu a essência de qualquer oferta: ninguém dá nada a Deus que já não seja d'Ele por direito. Sem amor genuíno ao próximo e sem gratidão ao Criador, mesmo a doação de todos os bens torna-se vazia.

"पर मेंह कोन अंव, अऊ मोर मनखेमन कोन अंय, कि हमन अइसने उदार मन ले दे सकन? हर एक चीज तोर करा ले आथे, अऊ हमन तोला सिरिप ओही चीज दे हन, जऊन ह तोर ले हमर करा आथे।(1 इतिहास 29:14)

यहोवा के सेवा करे म खुस रहव,

अऊ ओह तुम्हर मन के ईछा ला पूरा करही।(भजन-संहिता 37:4)

दुस्टमन उधार लेथें अऊ नइं पटांय,

पर धरमीमन हांथ खोलके देथें;(भजन-संहिता 37:21)

कहूं मेंह अपन जम्मो संपत्ति गरीबमन ला बांट देवंव अऊ अपन देहें ला जलाय बर दे दंव; पर मया नइं रखंव, त मोला कुछू फायदा नइं।(1 कुरिन्थुस 13:3)

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