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O Espírito Santo

Por Bíblia Online

O Espírito Santo é a terceira pessoa da Trindade — Consolador, Mestre e Poder. Ele convence do pecado, guia em toda verdade, distribui dons e produz frutos na vida do cristão.

O Consolador prometido

Jesus prometeu enviar o Consolador — o Espírito da Verdade — que estaria para sempre com os discípulos e os guiaria em toda verdade.

ेंददपरथनकरहूं, अऊ ओह मन एक आनमददगी, ओह हमहर रहिी।

ेंददपरथनकरहूं, अऊ ओह मन एक आनमददगी, ओह हमहर रहिी। जऊन सत आतमकहे। मददगगरहन नइकर सकय, बरकि ओलहवय अऊ ओलनयपर मन ओलनथव, बरकि ओह हर रहिअऊ मन रहिी। ेंमन अननइ़ं; ेंहर करआहूं। रकन अऊ हवय, तब नइखही, पर मन खहू। बरकि ेंयत ; मन घलयत रहिू। िमन नहि ेंअपन ददहव, अऊ मन हवव, अऊ ेंमन हवकर करहवय, अऊ ओह ओमन नथे, ओहमयकरथे। अऊ जऊन मयकरथे, ओकर ददमयकरही, अऊ ेंघलओकर मयकरहूं अऊ ओलअपन दरसन ूं।"

तब यह(जऊन यहइसकरिनइिि) कहि, "परभू, ि ेंहमन अपन दरसन े, पर मनखमन नइं।"

ओलजब, "यदि मनखमयकरथे, ओह बचन नही। अऊ ददओकर मयकरही, अऊ हमन ओकर करआबअऊ ओकर रहिो। जऊन मयनइकरय, ओह बचन नइनयबचन जऊन मन नत हव, मन ; मन दद, जऊन पठहवय

"हर रहत ेंमन कहहवपर मददगपबितर आतमजऊन ददांपठी, ओह मन जमिअऊ हर एक मन रतकरी, जऊन ेंमन कहहव

पर मददगपबितर आतमजऊन ददांपठी, ओह मन जमिअऊ हर एक मन रतकरी, जऊन ेंमन कहहव

पर मददगपबितर आतमजऊन ददांपठी, ओह मन जमिअऊ हर एक मन रतकरी, जऊन ेंमन कहहव

पबितर आतम

"पर जब मददगआही, जऊन ेंददइहां मन करपठूं। ओह सत आतम, जऊन ददिकलथे। ओह गवी।

पर ेंमन सच कहथ: हर बर बनि ेंवत ; बरकि यदि ेंनइ, मददगहर करनइआवय, पर यदि ेंूं, ेंओलहर करपठूं। अऊ जब ओह आही, मनखमन अऊ धरमपन अऊ िठहिी।

कहि, "ेंसच-सच बतवत ि जब तक मनखअऊ पबितर आतमनइजनमे, तब तक ओह परमसर नइसकय

कहि, "ेंसच-सच बतवत ि जब तक मनखअऊ पबितर आतमनइजनमे, तब तक ओह परमसर नइसकयमनखमनखजनम े, पर पबितर आतमनवां आतमजनम े। अचरज नइि नवां जनम जरअय

ेंओलनइरहिें, पर परमसर, जऊन बतिसमबर पठहवय, कहि, ेंपबितर आतमउतरत अऊ एक झन मनखऊपर ठहिरत खबे, ओहपबितर आतमबतिसमी।’

O derramamento do Espírito

No Pentecostes, o Espírito desceu como fogo sobre os discípulos. Desde então, todos os que creem recebem o Espírito.

पबितर आतमिनतिआथ

जब िनति िआईस, जममन एक ठऊर ििअचनक अकएक बड़े गरसहीं सनसनहट अवईस, अऊ अवजमघर , िां ओमन बईठिि, ूंओमन आगभमन सहीं ििअऊ ओह अलग ओमन हर एक झन ऊपर आकठहर अऊ ओमन जमझन पबितर आतमभर अऊ जइसनपबितर आतमओमन मर, ओमन आने-आनिलगि

घरधरतहर एक आय परमसर भकयहमन यरसलसहर ठहििि

अचनक अकएक बड़े गरसहीं सनसनहट अवईस, अऊ अवजमघर , िां ओमन बईठिि, ूंओमन आगभमन सहीं ििअऊ ओह अलग ओमन हर एक झन ऊपर आकठहर अऊ ओमन जमझन पबितर आतमभर अऊ जइसनपबितर आतमओमन मर, ओमन आने-आनिलगि

ओमन आगभमन सहीं ििअऊ ओह अलग ओमन हर एक झन ऊपर आकठहर अऊ ओमन जमझन पबितर आतमभर अऊ जइसनपबितर आतमओमन मर, ओमन आने-आनिलगि

पतरस ओमन कहि, "अपन पछतकरव, अऊ मन े, हर एक झन अपन-अपन िमसांबतिसमवव, अऊ मन पबितर आतमू।

पतरस ओमन कहि, "अपन पछतकरव, अऊ मन े, हर एक झन अपन-अपन िमसांबतिसमवव, अऊ मन पबितर आतमू।

पर जब पबितर आतमहर ऊपर आही, मन सकि ू; अऊ यरसल, अऊ जमयहिअऊ मरि, अऊ धरततक मन गवू।"

पर जब पबितर आतमहर ऊपर आही, मन सकि ू; अऊ यरसल, अऊ जमयहिअऊ मरि, अऊ धरततक मन गवू।"

जब ओमन परथनकर ि, जगह िां ओमन िि, , अऊ ओमन जमझन पबितर आतमभर अऊ परमसर बचन िमत ईन

जब ओमन परथनकर ि, जगह िां ओमन िि, , अऊ ओमन जमझन पबितर आतमभर अऊ परमसर बचन िमत ईन

हमन तमन गवहवन अऊ पबितर आतमघलगवहवय, जऊन परमसर मनखमन हवय, जऊन मन ओकर नथें।"

जब ओमन उपअऊ परभअरधनकरत रह, पबितर आतमकहि, "बर बरनबअऊ ऊल बर अलग करव, कर बर ेंओमन हव"

नकओमन परभांबतिसमजब ओमन ऊपर अपन ांरखि, ओमन ऊपर पबितर आतमउतरि, अऊ ओमन आने-आनअऊ अगमबकरलगि

Dons do Espírito

A cada um é concedida a manifestação do Espírito para o bem de todos. Os dons são diversos, mas o Espírito é o mesmo.

हर एक मनखजमभलई करबर पबितर आतमबरदिे। एक झन पबितर आतमि े, ओहआतमसर िे। ओहआतमिसव, ओहआतमकरबरदिलथे। चमतककरे, अगमबकरे, आतममन परखे, अनजिअऊ अनजमन अनकरबरदिलथे। जमएकअऊ ओहपबितर आतमकरथअऊ ओह जइसनहथे, वइसनहर एक मनखबरदांे।

एकरसि, मन वव ि जऊन परमसर आतमिे, ओह नइकहय, "सरि" अऊ पबितर आतमअगवई िगर नइकह सकय, "परभ"

मन नइनव ि हर ें पबितर आतमि, जऊन मन रहिअऊ जऊन परमसर मन हवय? मन अपन हवपरमसर मन िहवयएकरसि, अपन ें परमसर आदर करव

मन नइनव ि मन परमसर िअव अऊ परमसर आतममन बसथे।

मनखमन जऊन आनमनखमन नथे? ििमनखआतमओकरमन नथे। ओहिसम परमसर तमन नइनयििपरमसर आतमनथे।

Fruto do Espírito

O fruto do Espírito é amor, alegria, paz, paciência, bondade, fidelidade, mansidão e domínio próprio.

पर पबितर आतमफर मया, आन, ांि, रज, दया, भलई, िसव, नमरतअऊ यम अयअइसने-अइसनिनइ

पर पबितर आतमफर मया, आन, ांि, रज, दया, भलई, िसव,

अऊ आसहमन िनइकरय, बरकि परमसर हमन पबितर आतमहवय, अऊ पबितर आतमजरिओह अपन मयहमर िरदय हवय

बरकि परमसर अऊ हय, पर धरमपन, ांि अऊ आनअय, जऊन पबितर आतमिलथे।

परमसर जऊन आसे, हर िसवरन मन आनअऊ ांि भर वय, ि पबितर आतममरमसहर आसअऊ बढरहय

Não entristeçais o Espírito

Não entristeçais o Espírito Santo de Deus. Não apaguem o Espírito — antes, enchei-vos dele continuamente.

अऊ परमसर पबितर आतमउदझन करव, कर हर ऊपर िबर हर लगहवय, जब ि ी।

अऊ परमसर पबितर आतमउदझन करव, कर हर ऊपर िबर हर लगहवय, जब ि ी।

मतवझन बनव, बरकि एकर बहुंखरममन ें। एकर बदलअपनआप पबितर आतमभर वव

अपन आघझन ि

अपन पबितर आतमअलग झन कर

ओह हमर ऊपर िहक अपन हर लगहवय अऊ अमनत अपन आतमहमर िरदय हवय, जऊन ि ओकर अय

परभआतम, अऊ िां परभआतमहवय, उहां तरतहवय

परभआतम, अऊ िां परभआतमहवय, उहां तरतहवय

O Espírito nos capacita

O Espírito intercede por nós, batiza e capacita para o serviço. Ele é poder para a missão e conforto na aflição.

तब मस, जऊन िरदिि, सदआतमजरिअपनआप परमसर ेंचघओकर लहहमर िममन बहुंकरथे, ि हमन यत परमसर कर सकन!

पर मयगवमन, मन अपनआप अपन परम पबितर िसवबढ़ावव, अऊ पबितर आतममरपरथनकरवअपनआप परमसर मयबनरखव, अऊ हमर परभमसदयहत रहव, जऊन मन परमसर सदिनगी।

बरकि अगमबआत मनखईछकभनइईस, पर मनखमन पबितर आतमअगवई , परमसर ि ि

पर ओकर िकरू, परभएक वरगदओलसपनििअऊ वरगदओलकहि, ", ऊद , ेंमरियम अपन घरवघर बर झन डर, बरकि जऊन ओकर गरभ हवय, ओह पबितर आतमतरफ अय

जब ओमन मन पकडें, एकर िंझन करव ि मन कहनकइसनकहने, बरकि ओहबखत मन बति कहने। बरकि लइयमन नइं, पर हर ददपरमसर आतममन लही।

"ेंहर सच-सच कहत , यदि मन झन मनखएक मन धरतऊपर बर परथनकरहू, ददजऊन वरग हवय, हर बर कर ी। बरकि िां मनखांरथें, उहां ेंओमन रहि"

एकरसि वव अऊ जमि मनखमन बनवव अऊ ओमन ददा, अऊ पबितर आतमांबतिसमवव, अऊ ओमन जमननिवव, कर ेंमन हवअऊ खव, ेंअनवत तक हमहर हव"

जब ओमन मन पकडअदलत , तब आघिकर झन करहि मन कहने। पर जऊन मन घड़ी बते, ओहकहव बरकि लइयमन नइं, पर पबितर आतमअय

बतिसमअऊ वल

जममनखमन बतिसमवत िि, घलबतिसमअऊ जब ओह परथनकरत रहय, अकअऊ पबितर आतमें एक सहीं ओकर ऊपर उतरि, अऊ वरग अवआईस: "ेंमयअसेंबहुंहव"

"परभआतमऊपर हवय,

बरकि ओह गरबमन

घर परचकरबर अभिकरहवय

ओह पठहवय,

ि ेंमन टके,

अऊ धरमन सनकर,

अऊ ित-प़ितमन ों़ा,

"परभआतमऊपर हवय,

बरकि ओह गरबमन

घर परचकरबर अभिकरहवय

ओह पठहवय,

ि ेंमन टके,

अऊ धरमन सनकर,

अऊ ित-प़ितमन ों़ा,

अऊ परभिरपा-ििबछर सनकर"

जब हर सहीं खरमनखमन अपन लइकमन बनेंबर नथव, वरग रहइयहर ददकतओमन पबितर आतमी, जऊन मन ओकर ांगथें!"

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