Homem
A Bíblia fala sobre o homem como criação de Deus — feito à sua imagem e semelhança, mas também frágil, mortal e necessitado de redenção.
Criado à imagem de Deus
Deus criou o homem à sua imagem. Mas pelo pecado, o homem caiu e passou a depender da graça para ser restaurado.
फिर परमेश्वर ने कहा, "हम मनुष्यमनुष्य: मनुष्य नई प्रजाति है, वह विशेष रूप से इस पृथ्वी के अन्य प्रकार के जीवों से भिन्न है। को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएँ; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगनेवाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें।" (याकू. 3:9) तब परमेश्वर ने अपने स्वरूप में मनुष्य को रचा, अपने ही स्वरूप में परमेश्वर ने मनुष्य की रचना की; नर और नारी के रूप में उसने मनुष्यों की सृष्टि की। (मत्ती 19:4, मर. 10:6, प्रेरि. 17:29, 1 कुरि. 11:7, कुलु. 3:10, 1 तीमु. 2:13)
तब यहोवा परमेश्वर, जो दिन के ठंडे समय वाटिका में फिरता था, उसका शब्द उनको सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्नी वाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए।
इसलिए जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, क्योंकि सब ने पाप किया। (1 कुरि. 15:21,22)
ऐसा ही लिखा भी है, "प्रथम मनुष्य, अर्थात् आदम, जीवित प्राणी बना" और अन्तिम आदम, जीवनदायक आत्मा बना। परन्तु पहले आत्मिक न था, पर स्वाभाविक था, इसके बाद आत्मिक हुआ। प्रथम मनुष्य धरती से अर्थात् मिट्टी का था; दूसरा मनुष्य स्वर्गीय है। (यूह. 3:31) जैसा वह मिट्टी का था वैसे ही वे भी हैं जो मिट्टी के हैं; और जैसा वह स्वर्गीय है, वैसे ही वे भी स्वर्गीय हैं। और जैसे हमने उसका रूप जो मिट्टी का था धारण किया वैसे ही उस स्वर्गीय का रूप भी धारण करेंगे। (1 यूह. 3:2)
Fragilidade humana
O homem nascido de mulher é de poucos dias e cheio de inquietação. Deus conhece nossa fragilidade e cuida de nós.
"मनुष्य जो स्त्री से उत्पन्न होता हैमनुष्य जो स्त्री से उत्पन्न होता है: इन पदों में अय्यूब का उद्देश्य है कि वह मनुष्य की दुर्बलता और क्षणभंगुरता को दर्शाए। ,
उसके दिन थोड़े और दुःख भरे है।
‘क्या नाशवान मनुष्य परमेश्वर से अधिक धर्मी होगा?
क्या मनुष्य अपने सृजनहार से अधिक पवित्र हो सकता है?
मनुष्य क्या है कि तू उसे महत्त्व देमनुष्य क्या है कि तू उसे महत्त्व दे: परमेश्वर की तुलना में मनुष्य इतना महत्वहीन है कि यह पूछा जा सकता है कि उसे अपनी आवश्यकताओं के लिए इतनी सावधानी से क्यों प्रदान करना चाहिए। उसके कल्याण के लिए इतना पर्याप्त प्रावधान क्यों करें?,
और अपना मन उस पर लगाए,
वरन् किसी ने कहीं, यह गवाही दी है,
"मनुष्य क्या है, कि तू उसकी सुधि लेता है?
या मनुष्य का पुत्र क्या है, कि तू उस पर दृष्टि करता है?
मनुष्य का मार्ग यहोवा की ओर से ठहराया जाता है;
मनुष्य अपना मार्ग कैसे समझ सकेगामनुष्य अपना मार्ग कैसे समझ सकेगा: मनुष्य के जीवन का क्रम उसके लिये एक रहस्य है। वह नहीं जानता कि कहाँ जा रहा है या परमेश्वर उसे किस काम के लिये शिक्षा दे रहा है। ?
Renovação e chamado
Despojados do velho homem e revestidos do novo, somos chamados a buscar a justiça, a piedade e o amor.
कि तुम अपने चाल-चलन के पुराने मनुष्यत्व को जो भरमानेवाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्ट होता जाता है, उतार डालो। और अपने मन के आत्मिक स्वभाव में नये बनते जाओ, और नये मनुष्यत्व को पहन लो, जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धार्मिकता, और पवित्रता में सृजा गया है। (कुलु. 3:10, 2 कुरि. 5:17)
और अपने शरीर में बैर अर्थात् वह व्यवस्था जिसकी आज्ञाएँ विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया कि दोनों से अपने में एक नई जाति उत्पन्न करके मेल करा दे,
पर हे परमेश्वर के जन, तू इन बातों से भाग; और धार्मिकता, भक्ति, विश्वास, प्रेम, धीरज, और नम्रता का पीछा कर।
जब मैं बालक था, तो मैं बालकों के समान बोलता था, बालकों के समान मन था बालकों सी समझ थी; परन्तु सयाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दीं।
क्योंकि मनुष्य के मार्ग यहोवा की दृष्टि से छिपे नहीं हैंक्योंकि मनुष्य के मार्ग यहोवा की दृष्टि से छिपे नहीं हैं: पाप केवल मनुष्य के विरुद्ध करना या मनुष्य द्वारा उसका पता लगाना ही नहीं, परन्तु गुप्त में किया गया पाप यहोवा की आँखों से छिपाया नहीं जा सकता।,
और वह उसके सब मार्गों पर ध्यान करता है।
मन की युक्ति मनुष्य के वश में रहती है,
परन्तु मुँह से कहना यहोवा की ओर से होता है।
A confiança errada
Maldito o homem que confia no homem. O homem de duplo ânimo é instável em todos os seus caminhos.
यहोवा यह कहता है, "श्रापित है वह पुरुष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है, और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है।
ऐसा मनुष्य यह न समझे, कि मुझे प्रभु से कुछ मिलेगा, वह व्यक्ति दुचित्ता है, और अपनी सारी बातों में चंचल है।
किसी बूढ़े को न डाँट; पर उसे पिता जानकर समझा दे, और जवानों को भाई जानकर; (लैव्य. 19:32)