Homem
A Bíblia fala sobre o homem como criação de Deus — feito à sua imagem e semelhança, mas também frágil, mortal e necessitado de redenção.
Criado à imagem de Deus
Deus criou o homem à sua imagem. Mas pelo pecado, o homem caiu e passou a depender da graça para ser restaurado.
अल्लाह ने कहा, "आओ अब हम इनसान को अपनी सूरत पर बनाएँ, वह हमसे मुशाबहत रखे। वह तमाम जानवरों पर हुकूमत करे, समुंदर की मछलियों पर, हवा के परिंदों पर, मवेशियों पर, जंगली जानवरों पर और ज़मीन पर के तमाम रेंगनेवाले जानदारों पर।" यों अल्लाह ने इनसान को अपनी सूरत पर बनाया, अल्लाह की सूरत पर। उसने उन्हें मर्द और औरत बनाया।
शाम के वक़्त जब ठंडी हवा चलने लगी तो उन्होंने रब ख़ुदा को बाग़ में चलते-फिरते सुना। वह डर के मारे दरख़्तों के पीछे छुप गए।
आदम और मसीह
जब आदम ने गुनाह किया तो उस एक ही शख़्स से गुनाह दुनिया में आया। इस गुनाह के साथ साथ मौत भी आकर सब आदमियों में फैल गई, क्योंकि सबने गुनाह किया।
पाक नविश्तों में भी लिखा है कि पहले इनसान आदम में जान आ गई। लेकिन आख़िरी आदम ज़िंदा करनेवाली रूह बना। रूहानी जिस्म पहले नहीं था बल्कि फ़ितरती जिस्म, फिर रूहानी जिस्म हुआ। पहला इनसान ज़मीन की मिट्टी से बना था, लेकिन दूसरा आसमान से आया। जैसा पहला ख़ाकी इनसान था वैसे ही दीगर ख़ाकी इनसान भी हैं, और जैसा आसमान से आया हुआ इनसान है वैसे ही दीगर आसमानी इनसान भी हैं। यों हम इस वक़्त ख़ाकी इनसान की शक्लो-सूरत रखते हैं जबकि हम उस वक़्त आसमानी इनसान की शक्लो-सूरत रखेंगे।
Fragilidade humana
O homem nascido de mulher é de poucos dias e cheio de inquietação. Deus conhece nossa fragilidade e cuida de nós.
औरत से पैदा हुआ इनसान चंद एक दिन ज़िंदा रहता है, और उस की ज़िंदगी बेचैनी से भरी रहती है।
‘क्या इनसान अल्लाह के हुज़ूर रास्तबाज़ ठहर सकता है, क्या इनसान अपने ख़ालिक़ के सामने पाक-साफ़ ठहर सकता है?’
इनसान क्या है कि तू उस की इतनी क़दर करे, उस पर इतना ध्यान दे?
क्योंकि कलामे-मुक़द्दस में किसी ने कहीं यह गवाही दी है,
"इनसान कौन है कि तू उसे याद करे
या आदमज़ाद कि तू उसका ख़याल रखे?
रब हर एक के क़दम मुक़र्रर करता है। तो फिर इनसान किस तरह अपनी राह समझ सकता है?
Renovação e chamado
Despojados do velho homem e revestidos do novo, somos chamados a buscar a justiça, a piedade e o amor.
चुनाँचे अपने पुराने इनसान को उसके पुराने चाल-चलन समेत उतार देना, क्योंकि वह अपनी धोकेबाज़ शहवतों से बिगड़ता जा रहा है। अल्लाह को आपकी सोच की तजदीद करने दें और नए इनसान को पहन लें जो यों बनाया गया है कि वह हक़ीक़ी रास्तबाज़ी और क़ुद्दूसियत में अल्लाह के मुशाबेह है।
उसने शरीअत को उसके अहकाम और ज़वाबित समेत मनसूख़ कर दिया ताकि दोनों गुरोहों को मिलाकर एक नया इनसान ख़लक़ करे, ऐसा इनसान जो उसमें एक हो और सुलह-सलामती के साथ ज़िंदगी गुज़ारे।
शख़्सी हिदायात
लेकिन आप जो अल्लाह के बंदे हैं इन चीज़ों से भागते रहें। इनकी बजाए रास्तबाज़ी, ख़ुदातरसी, ईमान, मुहब्बत, साबितक़दमी और नरमदिली के पीछे लगे रहें।
जब मैं बच्चा था तो बच्चे की तरह बोलता, बच्चे की-सी सोच रखता और बच्चे की-सी समझ से काम लेता था। लेकिन अब मैं बालिग़ हूँ, इसलिए मैंने बच्चे का-सा अंदाज़ छोड़ दिया है।
ख़याल रख, इनसान की राहें रब को साफ़ दिखाई देती हैं, जहाँ भी वह चले उस पर वह तवज्जुह देता है।
इनसान दिल में मनसूबे बाँधता है, लेकिन ज़बान का जवाब रब की तरफ़ से आता है।
A confiança errada
Maldito o homem que confia no homem. O homem de duplo ânimo é instável em todos os seus caminhos.
मुख़्तलिफ़ फ़रमान
रब फ़रमाता है, "उस पर लानत जिसका दिल रब से दूर होकर सिर्फ़ इनसान और उसी की ताक़त पर भरोसा रखता है।
ऐसा शख़्स न समझे कि मुझे ख़ुदावंद से कुछ मिलेगा, क्योंकि वह दोदिला और अपने हर काम में ग़ैरमुस्तक़िलमिज़ाज है।
ईमानदारों से सुलूक
बुज़ुर्ग भाइयों को सख़्ती से न डाँटना बल्कि उन्हें यों समझाना जिस तरह कि वह आपके बाप हों। इसी तरह जवान आदमियों को यों समझाना जैसे वह आपके भाई हों,