Juízo de Deus: o que significa e como ele restaura a justiça
O que significa o juízo de Deus
O juízo de Deus é a avaliação justa e definitiva que Ele faz de todas as pessoas, obras e intenções humanas. Longe de ser apenas condenação ou castigo, o juízo bíblico é o acerto de contas que restabelece a verdade, corrige a injustiça e separa o mal do bem.
A Escritura ensina que nada fica encoberto diante dessa avaliação:
No Novo Testamento, essa autoridade foi confiada a Jesus Cristo. Ele revela os corações e exerce a justiça de Deus tanto para salvação dos que creem quanto para discernimento dos que o rejeitam:
काहैकि जोसे दऊवा मरे भैन कै उठाथै और जिंदो करथै, बैसिये लौड़ौ जोकै चाहथै उनकै जिंदो करथै। दऊवा कोई के परखत नाय है, पर न्याय करन को सब काम लौड़ा कै सौंप दई है। कि सब जनी जैसो दऊवा को आदर करथैं बैसिये लौड़ौ को आदर करैं, जो लौड़ा को आदर नाय करथै, बौ बाबा को जो कि बाकै भेजी है, आदर नाय करथै।"
मैं तुमसे सच-सच कहथौं, जो मेरो बचन सुनकै मेरे भेजन बारे के ऊपर बिस्वास करथै, अनंत जिंदगी बाकी है; और बाकै न्याय की आग्या नाय मिलथै, और बौ मरन से पार हुईकै अनंत जिंदगी मैं जाए चुको है। मैं तुमसे सच-सच कहथौं बौ समय आए गौ है, और अभै है, जहे बजह से मरे भै परमेस्वर के लौड़ा की अबाज सुनंगे, और जो सुनंगे बे जिंदे होमंगे। काहैकि जैसे दऊवा अपने आप मैं जिंदगी रखथै, बैसिये अपने लौड़ा कै जो अधिकार दई है कि अपने आप मैं जिंदगी रखै; जहे संग बाकै न्याय करनौ को अधिकार दई है, जहे ताहीं कि बौ आदमी को लौड़ा है। जासे अचम्मे मत होबौ; काहैकि बौ समय आए रहो है कि जितने मुर्दा कबर मैं हैं बे बाकी बोली सुनकै निकर आंगे। जो भले काम करीं हैं बे जिंदगी के ताहीं मरकै जी उठंगे, और जो बुरे काम करीं हैं बे न्याय पान ताहीं उनको पुनरुत्थान होगो।
"मैं अपने आप से कछु नाय कर सकथौं; जैसो सुनथौं, बैसो परखथौं, और मेरो न्याय धर्मी है, काहैकि मैं अपनी मरजी से नाय, बल्कि अपने भेजन बारे की मरजी चाहथौ।
और अगर मैं खुदै अपनी गभाई देथौं, तौ मेरी गभाई सच्ची ना है।(यूहन्ना 5:21-31)
बौ कही, "हे प्रभु, मैं बिस्वास करथौं।" और बौ ईसु कै घुपटियाय कै आराधना करी।
तौ फिर ईसु कही, "मैं जौ दुनिया मैं न्याय करन के ताहीं आओ हौं, ताकी जो नाय देखथैं बे देखैं, और जोकै दिखाथै बे अंधरा हुई जामैं।"(यूहन्ना 9:38,39)
A cruz é o ponto central desse julgamento: ali o pecado foi julgado e o poder que escravizava a humanidade foi quebrado:
जे बातन मैं ईसु कही, "जौ बोल मेरे ताहीं नाय, जौ तौ तुमरे ताहीं आओ है। अब जौ दुनिया को न्याय होगो, और अब जौ दुनिया को मुखिया निकार दौ जागो। और मैं अगर पृथ्वी मैं से ऊँचे मैं चढ़ाओ जांगो, तौ सब जनी कै अपने झोने खीचंगो।"(यूहन्ना 12:30-32)
तहुँओं मैं तुमसे सच्ची कहथौं कि मेरो जानो तुमरे ताहीं भलो है, काहैकि अगर मैं नाय जांगो तौ बौ मदत करन बारो तुमरे झोने नाय आगो; पर अगर मैं जांगो, तौ बाकै तुमरे झोने भेजंगो। और जब बौ आगो, तौ दुनिया के लोगन के सामने साबित करैगो कि बौ पाप और धार्मिकता के बारे मैं जो सई हैं और जो परमेस्वर के न्याय के जरिया गलत ठहरथैं। पाप के बारे मैं जौ ताहीं कि बे मेरे ऊपर बिस्वास नाय करथैं;(यूहन्ना 16:7-9)
A prestação de contas de cada pessoa
A Bíblia ensina que ninguém passa despercebido diante de Deus. Cada indivíduo responderá pessoalmente por suas escolhas, atitudes e pela forma como lidou com a verdade revelada:
जो बिस्वास मैं कमजोर हैं, उनकै अपने अच्छे विवेक के चाल-चलन मैं मिलाए लेबौ, लेकिन उनकी राय मैं बहस करन के ताहीं नाय। कोई कै बिस्वास है कि सब कछु खानो सई है, लेकिन जो बिस्वास मैं कमजोर हैं सागपात खाथैं। सब कछु खान बारो ना खान बारे के ऊपर दोस लगान को फैसला ना करे और ना खान बारो सब कछु खान बारे के ऊपर दोस ना लगाबै; काहैकि परमेस्वर बाकै अपनाय लई है। तू कौन है जो दुसरेन की सेवा करन बारेन के ऊपर दोस लगाथै? बाको बनो रहनो या गिर जानो बाके मालिक से रिस्ता रखथै; बल्किन बौ एकै जघा कर दौ जागो; काहैकि न्याई प्रभु बाकै टिकाय सकथै।(रोमियों 14:1-4)
तभईये हम सबन मैं से सबै परमेस्वर कै अपनो-अपनो हिसाब देमंगे।
अब हम एक दुसरे के ऊपर दोस ना लगामैं, लेकिन तुम जौ ठान लेबौ कि खुद से कहु ऐसो करन को फैसला नाय करनो चाहिए, जोसे दुसरे भईय्यन कै ठोकर लगै या बे पाप मैं गिरैं। मैं जानथौं और प्रभु ईसु को चेला होन के नाते मेरो बिस्वास है कि कोई चीज अपने आप से असुद्ध ना है, लेकिन जो बाकै असुद्ध समझथै बाके ताहीं असुद्ध है।(रोमियों 14:12-14)
इसलै तुमकै सई समय आन से पहले कोई के ऊपर फैसला लागू ना करनो चाहिए। आखरी फैसला प्रभु के आन तक असियानो चाहिए; बौ अंधियारे रहस्यन कै उजिते मैं लागो और लोगन के मन के छिपे उद्देस्यन कै उजागर करैगो। और तौ सब परमेस्वर से बे बड़ाँईं पांगे जिनके बे हकदार हैं।(1 कुरिन्थियों 4:5)
Esse exame criterioso começa pelo próprio povo de Deus. Por saber que todos estão debaixo do mesmo padrão reto, os cristãos são chamados a abandonar a censura hipócrita contra os outros:
अगर परमेस्वर हमरे संग अपनो फैसला सुरू करथै, तौ जौ निसचित रूप से बे लोगन के ताहीं कहीं जाधे कठिन होगो जो परमेस्वर से आनबारी सुसमाचार के ऊपर बिस्वास ना करथैं।(1 पतरस 4:17)
काहैकि तुमरो न्याय बहे फैसला के आधार होगो और जो नपना से तुम नापथौ, बहे से तुमरे ताहीं नापो जागो। तैं काहे अपने भईय्या की आँखी के कूरा कै देखथै, और अपनी आँखी को लट्ठा तोकै नाय दिखथै? तैं अपने भईय्या से कैसे कह सकथै, ‘ला मैं तेरी आँखी से कूरा निकार दियौं,’ जब तेरिये आँखी मैं लट्ठा है?(मत्ती 7:2-4)
O juízo como livramento e restauração
Para quem sofre a maldade e a opressão, o juízo divino não é ameaça, mas promessa de socorro. No Antigo Testamento, os juízos de Deus contra o Egito foram os atos concretos pelos quais Ele libertou o seu povo da escravidão:
Reconhecer que Deus é o juiz legítimo leva tanto ao arrependimento sincero diante da própria culpa quanto à confiança de que o santuário e a honra de Deus não serão derrotados pelo mal:
O desfecho da história humana culmina no triunfo final dessa justiça, quando todo engano e tirania são definitivamente julgados e removidos:
जाके बाद मैं स्वर्ग मैं लोगन की एक बड़ा बड़ी भीड़ को गरजन की अबाज के तराहनी सुनो, जो कहत रहै, "परमेस्वर की स्तुति करौ! उद्धार, महिमा, और सामर्थ्य हमरे परमेस्वर के हैं! सच्चाई और न्याय के काम बाके खुद के है! बौ बे वेस्या की बुराई करी जो व्यभिचार से धरती कै भ्रस्ट करत रहै, परमेस्वर बाकै सजा दई है काहैकि बौ बाके सेवकन को खून करी रहै।" बे फिर चिल्लाईं, "परमेस्वर की स्तुति करौ! आगी की लपट को धुआँ जो बौ बड़े से बड़े सहर कै सुहा कर देथै जो बौ हमेसा और हमेसा ऊपर उठत रहथै!"(प्रकासितवाक्य 19:1-3)
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