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Justiça: o que a Bíblia ensina sobre retidão e fé

O que é a justiça segundo a Bíblia

Na Bíblia, a justiça é o padrão moral estabelecido pelo próprio caráter de Deus, que se manifesta em retidão de conduta e equidade no trato com o próximo. Não se trata apenas de cumprir códigos legais humanos, mas de viver de modo reto diante do Criador e agir com integridade nos relacionamentos e nas decisões diárias.

Buscar a justiça de Deus significa priorizar a vontade do Senhor acima de ambições pessoais e aparências religiosas. Práticas religiosas e rituais perdem o sentido quando não há compromisso real com a honestidade e a defesa do que é correto.

इस करकै पैहल्या थम परमेसवर के राज्य की खोज करो अर पवित्र जीवन जिओ, तो ये सारी चीज भी थमनै अपणे-आप मिल ज्यागीं।)(मत्ती 6:33)

धर्म अर न्याय करणा,

यहोवा नै बलिदान तै घणा आच्छा लाग्गै सै।(नीतिवचन 21:3)

माणस का सारा चाल-चलण अपणी जाण म्ह तो ठीक होवै सै,

पर यहोवा मन नै परखै सै,(नीतिवचन 21:2)

जो धर्म अर दया का पिच्छा करै सै,

वो जीवन, धर्म अर बड़ाई भी पावै सै।(नीतिवचन 21:21)

दुष्ट झूठ्ठी कमाई कमावै सै,

पर जो धर्म का बीज बोवै सै, उसनै फळ जरुर मिलै सै।(नीतिवचन 11:18)

दुष्टां कै कमाए होए धन तै लाभ न्ही होन्दा,

पर धर्म कै कारण मौत तै बचाव होवै सै।(नीतिवचन 10:2)

A justiça recebida pela fé em Cristo

As Escrituras mostram que ninguém consegue alcançar a justiça perfeita exigida por Deus por esforço próprio. A justificação do ser humano acontece mediante a obra de Jesus na cruz: Cristo assumiu a culpa humana para que, pela fé nele, o pecador fosse declarado justo diante de Deus.

Essa graça não anula o compromisso moral; pelo contrário, ensina o crente a abandonar práticas ímpias e a cultivar uma vida sóbria, correta e dedicada ao Senhor.

मसीह जो पाप तै अनजाण था, उस्से ताहीं परमेसवर नै म्हारै खात्तर पापी ठहराया, ताके हम परमेसवर की नजर म्ह धर्मी बण जावां, क्यूँके यीशु मसीह नै म्हारे पापां का दण्ड अपणे उप्पर ले लिया।(2 कुरिन्थियों 5:21)

परमेसवर नै अपणा अनुग्रह इस बात म्ह जाहिर करया के उसनै मसीह यीशु ताहीं म्हारा उद्धारकर्ता बणाकै भेज दिया, ताके हरेक माणस बचाए जा सकै। अपणी दया के कारण परमेसवर म्हारे ताहीं सिखावै सै, के हम उन तरिक्‍कां तै बरताव करणा बन्द कर द्या, जो उस ताहीं खुश न्ही कर सकदे, अर इसी लालसा ना राक्खा जिसी अबिश्वासी लोग राक्खै सै, पर बुध्दिमानी अर धार्मिकता तै बरताव करां, अर इसा बरताव करा जो परमेसवर नै पसन्द हो, जिब तक हम दुनिया म्ह रहवां।(तीतुस 2:11,12)

पर हे तीमुथियुस, परमेसवर के जन, तू इन बात्तां तै भाज, अर धर्म, बिश्वास, प्यार, धीरज, अर नम्रता कै पाच्छै चाल।(1 तीमुथियुस 6:11)

इस करकै हे बिश्वासी भाईयो, जो बात सच सै, जो बात आदरणीय, जो धर्मी सै, पवित्र सुहावनी अर जो-जो बात बड़ाई लायक सै, यानी जो भी सद्गुण अर प्रशंसा की बात सै उनपै ए मन लगाया करो।(फिलिप्पियों 4:8)

अपणे-आप ताहीं धोक्खा ना द्यो, कोए माणस यो ना सोच्‍चै के वो परमेसवर नै धोक्खा दे सकै सै।(गलातियों 6:7)

हम भले काम करण का होसला ना छोड्डा, क्यूँके जै हम हिम्मत ना छोड्डा तो परमेसवर के बखत पै कटणी काटैगें।(गलातियों 6:9)

Como a justiça se manifesta na prática

A justiça bíblica produz frutos visíveis no cotidiano. Ela se revela na recusa em seguir conselhos que promovem o mal, na busca ativa pela paz e na fidelidade à verdade revelada nas Escrituras.

O texto bíblico assegura que Deus permanece atento aos que agem com retidão, sustentando seus passos mesmo em tempos de adversidade.

मेळ-मिलाप कराण आळा, किसान की तरियां सै, जो शान्ति का बीज बोवै सै, अर धार्मिकता की फसल काटै सै।(याकूब 3:18)

इस करकै थम एक-दुसरे कै बिरुध्द किये गये, अपणे-अपणे पापां नै मान ल्यो, अर एक-दुसरे खात्तर प्रार्थना करो, जिसतै ठीक हो जाओ: धर्मी जन की प्रार्थना कै असर तै सब कुछ हो सकै सै।(याकूब 5:16)

परमेसवर कै धोरै आओ तो वो भी थारे धोरै आवैगा। हे पापियों, अपणे जीवन तै पाप दूर करो, अर हे दोगले माणसों अपणे मन नै पवित्र करो।(याकूब 4:8)

धन्य सै वो माणस जो दुष्टां की युक्ति पै न्ही चाल्दा,

अर ना पापियाँ की राह म्ह खड्या होंदा;

अर ना मजाक करण आळयां की मण्डळी म्ह बैठदा।(भजन संहिता 1:1)

यहोवा की आँख धर्मियाँ पै लाग्गी रहवै सै,

अर उसके कान भी उसकी दुहाई की

ओड़ लाग्गे रहवै सै।(भजन संहिता 34:15)

क्यूँके यहोवा न्याय तै लगाव राक्खै सै;

अर अपणे भगतां नै कदे न्ही छोड्डैगा।

उनकी तो हिफाजत सदा होवै सै,

पर दुष्ट माणसां का वंश मिटा दिया जावैगा।(भजन संहिता 37:28)

वो तो सदा ताहीं बण्या रहवैगा;

धर्मी की याद सदा ताहीं बणी रहवैगी।(भजन संहिता 112:6)

मै पूरे मन तै तेरी टोह् म्ह लाग्या सूं;

मन्‍नै तेरे हुकमां के राह तै भटकण ना दे!(भजन संहिता 119:10)

O juízo e a retribuição do Senhor

Deus julga as ações humanas com absoluta imparcialidade. Por causa dessa certeza, a resposta cristã à injustiça ou à perseguição não deve ser a vingança ou a retaliação, mas a perseverança em fazer o bem a todos, inclusive àqueles de quem não se espera reciprocidade.

Agir com prudência nas palavras e compromissos reflete o temor diante do Senhor, que retribuirá a cada um segundo as suas obras.

परमेसवर हरेक नै उसकै काम कै मुताबिक फळ देवैगा।(रोमियों 2:6)

सावधान रहों! कोए किसे तै बुराई कै बदले बुराई ना करै; पर सारी हाण भलाई करण खात्तर त्यार रहवै, आप्पस म्ह एक-दुसरे खात्तर आच्छे काम करो, अर दुसरयां खात्तर भी।(1 थिस्सलुनीकियों 5:15)

जै थम धार्मिकता कै कारण दुख भी ठाओ, तो थम धन्य सो, पर माणसां के डराण तै ना डरो, अर ना घबराओ,(1 पतरस 3:14)

जै थम अपणे भलाई करण आळा ए गेल्या भलाई करो सों, तो थारी के बड़ाई? क्यूँके पापी भी इसाए करै सै।(लूका 6:33)

जो माणस बिना बिचारे किसे चीज नै पवित्र ठहरावै,

अर जो मन्‍नत मानकै पूच्छ-ताच्छ करण लाग्गै, वो फंदे म्ह फँसैगा।(नीतिवचन 20:25)

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