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Lei de Deus: o que é e qual o seu propósito

O que é a lei de Deus e qual é o seu propósito

A lei na Bíblia é a revelação da vontade e do caráter de Deus, dada para orientar o relacionamento humano com o Criador e com o próximo. Seu papel não é salvar por esforço próprio, mas expor o pecado e apontar a necessidade da redenção em Cristo.

O apóstolo Paulo ensina que a lei atua como um padrão que torna o ser humano consciente de suas falhas. Em vez de anular a responsabilidade moral, a graça capacita o crente a viver os princípios justos da lei guiado pelo Espírito.

क्यूँके मूसा नबी के नियम-कायदे के पुगाण तै कोए माणस उसकै स्याम्ही धर्मी कोनी बणैगा, क्यूँके नियम-कायदा कै जरिये हमनै बेरा लाग्गै सै के हम पापी सां।(रोमियों 3:20)

तो इसका मतलब के सै? के हम नियम-कायदे का अधीन म्ह न्ही, बल्के परमेसवर के अनुग्रह कै अधीन सां, इस करकै के हम पाप कर सका सां? न्ही! बिलकुल न्ही!(रोमियों 6:15)

हम सब कुछ करण खात्तर आजाद सां, हम कहवां सां, हाँ, पर सब कुछ म्हारे खात्तर आच्छा कोनी, हम सब कुछ करण खात्तर आजाद सां, पर सब कुछ म्हारे बिश्वास नै कोनी बढ़ाते।(1 कुरिन्थियों 10:23)

क्यूँके सारे नियम-कायदे इस एक बात म्ह पूरे हो ज्या सै, "तू अपणे पड़ोसी तै अपणे जिसा प्यार कर।"(गलातियों 5:14)

पर आत्मा का फळ प्यार, आनन्द, शान्ति, धीरज, करुणा, भलाई, बिश्वास, नम्रता, अर सयंम सै, इसे-इसे काम्मां के बिरोध म्ह कोए भी नियम-कायदे कोनी।(गलातियों 5:22,23)

म्हारे म्ह तै जै कोए भी मुसीबत म्ह हो, तो हमनै एक-दुसरे की मदद करणी चाहिए, अर इस तरियां हम मसीह के नियम-कायदा नै मान्‍ना सां।(गलातियों 6:2)

O cumprimento da lei no amor

Jesus resumiu as exigências morais da Escritura em dois mandamentos fundamentais: amar a Deus sobre todas as coisas e amar o próximo como a si mesmo. O amor cumpre a lei porque quem age com misericórdia e justiça não comete dano contra ninguém.

अर दूसरा यो सै, ‘तू अपणे पड़ोसी तै अपणे जिसा प्यार राखणा।’ इसतै बड्ड़ा और कोए हुकम कोनी।"(मरकुस 12:31)

"मै थमनै नया हुकम द्यु सूं, के एक-दुसरे तै प्यार करियो, जिसा मन्‍नै थारैतै प्यार करया सै, उसाए थम भी एक-दुसरे तै प्यार करियो।(यूहन्‍ना 15:12)

इस कारण जो किमे थम चाहो सों के माणस थारे गेल्या करै, थम भी उनकै गेल्या उसाए करो, क्यूँके नियम-कायदे अर नबियाँ की शिक्षा याए सै।"(मत्ती 7:12)

एक ए चीज सै जिसके थमनै कर्जदार होणा चाहिए, वो सै थारा आप्पस म्ह प्यार, क्यूँके जो एक-दुसरे तै प्यार करै सै, उस्से नै परमेसवर के नियम-कायदा ताहीं पूरा करया सै।(रोमियों 13:8)

परमेसवर तै हमनै यो हुकम मिल्या सै, कै जो कोए परमेसवर तै प्यार राक्खै सै वो अपणे भाई तै भी प्यार राक्खै।(1 यूहन्‍ना 4:21)

हे प्यारे बिश्वासी भाईयो, जै म्हारा मन हमनै दोष ना दे, तो हमनै परमेसवर कै आग्गै जाण म्ह होसला मिलै सै। अर जो कुछ हम परमेसवर तै माँग्गा सां, वो हमनै उसतै मिलै सै, क्यूँके हम उसकै हुकम नै मान्‍ना सां अर जो उसनै आच्छा लाग्गै सै, वोए हम करा सां।(1 यूहन्‍ना 3:21,22)

A instrução de Deus no Antigo Testamento

No hebraico bíblico, a palavra comumente traduzida por lei (Torah) significa instrução, ensino ou direção. Para o povo de Israel, os mandamentos não eram vistos apenas como restrições jurídicas, mas como um caminho de sabedoria, preservação da vida e aliança com o Senhor.

अर ये हुकम जो मै आज तन्‍नै सुणाऊँ सूं वे तेरै मन म्ह बणे रहवै अर तू इननै अपणे बाळकां ताहीं समझाकै सिखाया करिये, अर घर म्ह बैठदे, राह पै चाल्दे, लेटदे, उठदे, इनका जिक्र करया करिये।(व्यवस्थाविवरण 6:6,7)

"इब, हे इस्राएल, तेरा परमेसवर यहोवा तेरै तै इसकै सिवा और के चाहवै सै, के तू अपणे परमेसवर यहोवा का भय मान्‍नै, अर उसके सारे रास्तयां पै चाल्‍लै, उसतै प्यार राक्खै, अर अपणे पूरे मन अर अपणे सारे जी तै उसकी सेवा करै अर यहोवा के जो-जो हुकम अर विधि मै आज तन्‍नै सुणाऊँ सूं उन ताहीं अपणावै, जिसतै तेरा भला हो?(व्यवस्थाविवरण 10:12,13)

जै तू अपणे परमेसवर यहोवा के सारे हुकम, जो मै आज तेरै ताहीं सुणाऊँ सूं, चौकसी तै पूरी करण नै ध्यान लाकै उसकी सुणै, तो वो तन्‍नै धरती की सारी जात्तां म्ह सबतै बढ़कै बणावैगा।(व्यवस्थाविवरण 28:1)

क्यूँके मै आज तन्‍नै हुकम दियुँ सूं, के अपणे परमेसवर यहोवा तै प्यार करिये, अर उसकै रास्तयां पै चालिये, अर उसके हुकमां, विधियाँ, अर नियमां ताहीं मानिये, जिसतै तू जिन्दा रहवै, अर बढ़दा जावै, अर तेरा परमेसवर यहोवा उस देश म्ह जिसका हकदार होण ताहीं तू जाण लागरया सै, तन्‍नै आशीष देवै।(व्यवस्थाविवरण 30:16)

नियम-कायदे की या किताब तेरे ध्यान तै कदे भी ना उतरण पावै, इस्से म्ह दिन-रात ध्यान दिए रहणा, ज्यांतै के जो कुछ उस किताब म्ह लिख्या सै उसके मुताबिक करण की तू चौकसी करै; क्यूँके इसाए करण तै तेरे सारे काम सफल होवैंगे, अर तू प्रभावशाली होवैगा।(यहोशू 1:8)

सिर्फ इस बात की पूरी चौकसी करियो के जो-जो हुकम अर नियम-कायदे यहोवा के दास मूसा नै थारे ताहीं दिए सै उसनै मानकै अपणे परमेसवर यहोवा तै प्रेम राक्खो, उसके सारे राह पै चाल्‍लों, उसकै हुकम मान्‍नो, उसकी भगति म्ह मगन रहो, अर अपणे सारे मन अर सारे प्राण तै उसकी सेवा करो।"(यहोशू 22:5)

पर यहोवा की करुणा उसके डरण आळयां पै युग-युग,

अर उसका धर्म उसके नात्ती-पोत्यां पै भी प्रगट होन्दा रहवै सै,

यानिके उनपै जो उसके करार का पालन करै

अर उसके हुकम नै याद करकै उनपै चाल्‍लै सै।(भजन संहिता 103:17,18)

मै पूरे मन तै तेरी टोह् म्ह लाग्या सूं;

मन्‍नै तेरे हुकमां के राह तै भटकण ना दे!(भजन संहिता 119:10)

मन्‍नै सच्‍चाई की राह चुण ली सै,

तेरे नियमां की ओड़ मै मन लगाये रहूँ सूं।(भजन संहिता 119:30)

A exigência de justiça e integridade

A obediência aos mandamentos não se resume a práticas formais. Os profetas bíblicos advertiram que qualquer observância religiosa desprovida de integridade moral, socorro ao vulnerável e prática da justiça é rejeitada por Deus.

हे माणस, वो तेरे ताहीं बता चुक्या सै के आच्छा के सै; अर यहोवा तेरै तै इस्से नै छोड़ और के चाहवै सै, के तू न्याय तै काम करै, अर कृपा तै प्यार राक्खै, अर अपणे परमेसवर कै गैल नम्रता तै चाल्‍लै?(मीका 6:8)

लेकिन न्याय नै नदी की तरियां, अर धार्मिकता ताहीं महानद की तरियां बहण द्यो।"(आमोस 5:24)

अबिश्वासियाँ कै गैल साझीदार ना बणो, क्यूँके धार्मिकता अर अधर्म का मेलजोल कोनी। या चाँदणे अर अन्धकार की संगति कोनी होन्दी।(2 कुरिन्थियों 6:14)

हे बाळकां आळो, अपणे बाळकां नै गुस्सा ना दुवाओ, पर शिक्षा अर चेतावनी देंदे होए उनका पालन-पोषण करो।(इफिसियों 6:4)

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