Ler a Bíblia
Ler a Bíblia é essencial para a vida cristã. A Escritura é lâmpada para os pés, alimento para a alma e espada do Espírito. O cristão que lê a Bíblia é transformado pela Palavra.
A importância de ler
Meditar na Palavra dia e noite traz prosperidade e bom sucesso. Ler a Bíblia ilumina o entendimento e fortalece a fé.
तेरा वचन मेरे पैरों के लिए दीपक,
और मेरे पथ के लिए उजियाला है।
तेरे वचनों के खुलने से प्रकाश मिलता है,
जिससे भोले लोग समझ प्राप्त करते हैं।
आहा, मैं तेरी व्यवस्था से कैसी प्रीति रखता हूँ!
मेरा ध्यान दिन भर उसी पर लगा रहता है।
तेरी आज्ञाएँ मुझे अपने शत्रुओं से अधिक बुद्धिमान बनाती हैं,
क्योंकि वे सदा मेरे साथ रहती हैं।
मैं अपने सब शिक्षकों से भी अधिक समझ रखता हूँ,
क्योंकि मेरा ध्यान तेरी नीतियों पर लगा रहता है।
जवान अपनी चाल को कैसे शुद्ध रखे?
तेरे वचन का पालन करके।
मैंने तुझे संपूर्ण मन से खोजा है;
अपनी आज्ञाओं से तू मुझे भटकने न दे।
मैंने तेरे वचन को अपने हृदय में संजोए रखा है
कि तेरे विरुद्ध पाप न करूँ।
A Escritura é inspirada
Toda a Escritura é útil para ensinar, corrigir e instruir em justiça. Examine as Escrituras — nelas encontramos a vida eterna.
संपूर्ण पवित्रशास्त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और शिक्षा देने, ताड़ना देने, सुधारने और धार्मिकता की शिक्षा के लिए लाभदायक है, जिससे परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर भले कार्य के लिए सक्षम हो जाए।
तुम पवित्रशास्त्र के लेखों में ढूँढ़ते हो, क्योंकि तुम सोचते हो कि उनमें अनंत जीवन है, परंतु ये वे हैं जो मेरे विषय में साक्षी देते हैं।
जो कुछ पहले से लिखा गया था, वह हमारी शिक्षा के लिए लिखा गया, ताकि हम धीरज से और पवित्रशास्त्र के प्रोत्साहन द्वारा आशा रखें।
धन्य है वह जो इस भविष्यवाणी के वचनों को पढ़ता है, और वे भी जो इसे सुनते और इसमें लिखी हुई बातों का पालन करते हैं, क्योंकि समय निकट है।
जब तक मैं न आऊँ, पवित्रशास्त्र पढ़ने, प्रोत्साहित करने और शिक्षा देने में लगा रह।
Estudar com diligência
Os bereanos eram mais nobres porque examinavam as Escrituras diariamente. O estudo dedicado da Bíblia produz maturidade espiritual.
ये लोग थिस्सलुनीके के लोगों से अधिक सज्जन थे, और उन्होंने बड़ी उत्सुकता से वचन को ग्रहण किया तथा प्रतिदिन पवित्रशास्त्र में खोजते रहे कि ये बातें ऐसी ही हैं या नहीं।
यीशु ने उनसे कहा,"कहीं तुम इसलिए तो भ्रम में नहीं हो कि न तो तुम पवित्रशास्त्र को समझते हो और न ही परमेश्वर के सामर्थ्य को?
हे मेरे पुत्र, यदि तू मेरे वचनों को ग्रहण करे,
और मेरी आज्ञाओं को अपने हृदय में रखे,
और अपना कान बुद्धि की बातों पर,
तथा अपना मन समझ की बातों पर लगाए,
और यदि तू समझ के लिए पुकारे,
और बुद्धि के लिए चिल्लाए,
और उसे चाँदी के समान ढूँढ़े,
और छिपे हुए धन के समान उसकी खोज में लगा रहे,
तो तू यहोवा के भय को समझेगा,
और तुझे परमेश्वर का ज्ञान प्राप्त होगा।
क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है;
उसी के मुँह से ज्ञान और समझ की बातें निकलती हैं।