Liberdade
Cristo nos libertou para a liberdade. A Bíblia proclama a libertação do pecado, da condenação e de toda forma de escravidão espiritual. Na verdade de Cristo, somos verdadeiramente livres.
Liberdade em Cristo
Para a liberdade Cristo nos libertou. Se o Filho vos libertar, verdadeiramente sereis livres. Não volteis ao jugo da escravidão.
मसीह में आज़ादी
मसीह ने हमे आज़ाद रहने के लिए आज़ाद किया है; पस क़ाईम रहो, और दोबारा ग़ुलामी के जुवे में न जुतो।
मसीह में आज़ादी
मसीह ने हमे आज़ाद रहने के लिए आज़ाद किया है; पस क़ाईम रहो, और दोबारा ग़ुलामी के जुवे में न जुतो।
पस अगर बेटा तुम्हें आज़ाद करेगा, तो तुम वाक़’ई आज़ाद होगे।
पस अगर बेटा तुम्हें आज़ाद करेगा, तो तुम वाक़’ई आज़ाद होगे।
पस ईसा ने उन यहूदियों से कहा, जिन्होंने उसका यक़ीन किया था, "अगर तुम कलाम पर क़ाईम रहोगे, तो हक़ीक़त में मेरे शागिर्द ठहरोगे। और सच्चाई को जानोगे और सच्चाई तुम्हें आज़ाद करेगी।"
पस ईसा ने उन यहूदियों से कहा, जिन्होंने उसका यक़ीन किया था, "अगर तुम कलाम पर क़ाईम रहोगे, तो हक़ीक़त में मेरे शागिर्द ठहरोगे। और सच्चाई को जानोगे और सच्चाई तुम्हें आज़ाद करेगी।"
Livres da condenação
Não há condenação para os que estão em Cristo Jesus. A lei do Espírito nos libertou da lei do pecado e da morte.
रूह में ज़िन्दगी बिताना
पस अब जो मसीह ईसा में है उन पर सज़ा का हुक्म नहीं क्यूँकि जो जिस्म के मुताबिक़ नहीं बल्कि रूह के मुताबिक़ चलते हैं? क्यूँकि ज़िन्दगी की पाक रूह को शरी’अत ने मसीह ईसा में मुझे गुनाह और मौत की शरी’अत से आज़ाद कर दिया।
रूह में ज़िन्दगी बिताना
पस अब जो मसीह ईसा में है उन पर सज़ा का हुक्म नहीं क्यूँकि जो जिस्म के मुताबिक़ नहीं बल्कि रूह के मुताबिक़ चलते हैं? क्यूँकि ज़िन्दगी की पाक रूह को शरी’अत ने मसीह ईसा में मुझे गुनाह और मौत की शरी’अत से आज़ाद कर दिया।
इसलिए कि जो काम शरी’अत जिस्म की वजह से कमज़ोर हो कर न कर सकी वो ख़ुदा ने किया; या’नी उसने अपने बेटे को गुनाह आलूदा जिस्म की सूरत में और गुनाह की क़ुर्बानी के लिए भेज कर जिस्म में गुनाह की सज़ा का हुक्म दिया। ताकि शरी’अत का तक़ाज़ा हम में पूरा हो जो जिस्म के मुताबिक़ नहीं बल्कि रूह के मुताबिक़ चलता है।
इसलिए कि मख़्लूक़ात बतालत के इख़्तियार में कर दी गई थी न अपनी ख़ुशी से बल्कि उसके ज़रिए से जिसने उसको। इस उम्मीद पर बतालत के इख़्तियार कर दिया कि मख़्लूक़ात भी फ़ना के क़ब्ज़े से छूट कर ख़ुदा के फ़र्ज़न्दों के जलाल की आज़ादी में दाख़िल हो जाएगी।
मगर अब गुनाह से आज़ाद और ख़ुदा के ग़ुलाम हो कर तुम को अपना फल मिला जिससे पाकीज़गी हासिल होती है और इस का अंजाम हमेशा की ज़िन्दगी है।
मगर अब गुनाह से आज़ाद और ख़ुदा के ग़ुलाम हो कर तुम को अपना फल मिला जिससे पाकीज़गी हासिल होती है और इस का अंजाम हमेशा की ज़िन्दगी है।
पस क्या हुआ? क्या हम इसलिए गुनाह करें कि शरी’अत के मातहत नहीं बल्कि फ़ज़ल के मातहत हैं? हरगिज़ नहीं;
मगर अब शरी’अत के बग़ैर ख़ुदा की एक रास्तबाज़ी ज़ाहिर हुई है जिसकी गवाही शरी’अत और नबियों से होती है। यानी ख़ुदा की वो रास्तबाज़ी जो ईसा मसीह पर ईमान लाने से सब ईमान लानेवालों को हासिल होती है; क्यूँकि कुछ फ़र्क़ नहीं।
इसलिए कि सब ने गुनाह किया और ख़ुदा के जलाल से महरूम हैं। मगर उसके फ़ज़ल की वजह से उस मख़लसी के वसीले से जो मसीह ईसा में है मुफ़्त रास्तबाज़ ठहराए जाते हैं।
O Espírito liberta
Onde está o Espírito do Senhor, aí há liberdade. Olhe onde temos liberdade de acessar o trono da graça com confiança.
और ख़ुदावन्द रूह है, और जहाँ कहीं ख़ुदावन्द की रूह है वहाँ आज़ादी है।
और ख़ुदावन्द रूह है, और जहाँ कहीं ख़ुदावन्द की रूह है वहाँ आज़ादी है।
जिसमें हम को उस पर ईमान रखने की वजह से दिलेरी है और भरोसे के साथ रसाई।
"ख़ुदावन्द का रूह मुझ पर है,
इसलिए कि उसने मुझे ग़रीबों को
ख़ुशख़बरी देने के लिए मसह किया;
उसने मुझे भेजा है क़ैदियों को रिहाई
और अन्धों को बीनाई
पाने की ख़बर सूनाऊँ,
कुचले हुओं को आज़ाद करूँ।
"ख़ुदावन्द का रूह मुझ पर है,
इसलिए कि उसने मुझे ग़रीबों को
ख़ुशख़बरी देने के लिए मसह किया;
उसने मुझे भेजा है क़ैदियों को रिहाई
और अन्धों को बीनाई
पाने की ख़बर सूनाऊँ,
कुचले हुओं को आज़ाद करूँ।
दबे कुचले लोगों के लिये खुशखबरी
ख़ुदावन्द ख़ुदा की रूह मुझ पर है क्यूँकि उसने मुझे मसह किया ताकि हलीमों को ख़ुशख़बरी सुनाऊँ; उसने मुझे भेजा है कि शिकस्ता दिलों को तसल्ली दूँ, कैदियों के लिए रिहाई और ग़ुलामों के लिए आज़ादी का 'ऐलान करूँ,
Liberdade responsável
Fomos chamados à liberdade, mas não usemos a liberdade como pretexto para a carne. Tudo é lícito, mas nem tudo convém.
ऐ भाइयों! तुम आज़ादी के लिए बुलाए तो गए हो, मगर ऐसा न हो कि ये आज़ादी जिस्मानी बातों का मौक़ा, बने; बल्कि मुहब्बत की राह पर एक दूसरे की ख़िदमत करो।
ऐ भाइयों! तुम आज़ादी के लिए बुलाए तो गए हो, मगर ऐसा न हो कि ये आज़ादी जिस्मानी बातों का मौक़ा, बने; बल्कि मुहब्बत की राह पर एक दूसरे की ख़िदमत करो।
और अपने आप को आज़ाद जानो, मगर इस आज़ादी को बदी का पर्दा न बनाओ; बल्कि अपने आप को ख़ुदा के बन्दे जानो।
और अपने आप को आज़ाद जानो, मगर इस आज़ादी को बदी का पर्दा न बनाओ; बल्कि अपने आप को ख़ुदा के बन्दे जानो।
सब चीज़ें मेरे लिए जायज़ तो हैं मगर सब चीज़ें मुफ़ीद नहीं; सब चीज़ें मेरे लिए जायज़ तो हैं; लेकिन मैं किसी चीज़ का पाबन्द न हूँगा।
लेकिन जो शख़्स आज़ादी की कामिल शरी’अत पर ग़ौर से नज़र करता रहता है वो अपने काम में इसलिए बर्क़त पाएगा कि सुनकर भूलता नहीं बल्कि अमल करता है।
लेकिन जो शख़्स आज़ादी की कामिल शरी’अत पर ग़ौर से नज़र करता रहता है वो अपने काम में इसलिए बर्क़त पाएगा कि सुनकर भूलता नहीं बल्कि अमल करता है।
A liberdade que permanece
Conhecer a verdade é o caminho da liberdade duradoura. Cristo nos resgatou e nos fez livres para viver em plenitude.
और मैं आज़ादी से चलूँगा,
क्यूँकि मैं तेरे क़वानीन का तालिब रहा हूँ।
और मैं आज़ादी से चलूँगा,
क्यूँकि मैं तेरे क़वानीन का तालिब रहा हूँ।
सादिक की मुसीबतें बहुत हैं,
लेकिन ख़ुदावन्द उसको उन सबसे रिहाई बख्शता है।
ऐ ख़ुदावन्द से मुहब्बत रखने वालों, बदी से नफ़रत करो,
वह अपने पाक लोगों की जानों को महफ़ूज़ रखता है,
वह उनको शरीरों के हाथ से छुड़ाता है।
ऐ हमारे नजात देने वाले ख़ुदा, अपने नाम के जलाल की ख़ातिर हमारी मदद कर;
अपने नाम की ख़ातिर हम को छुड़ाऔर हमारे गुनाहों का कफ़्फ़ारा दे।
खु़दा तन्हा को ख़ान्दान बख़्शता है;
वह कैदियों को आज़ाद करके इक़बालमंद करता है;
लेकिन सरकश ख़ुश्क ज़मीन में रहते हैं।
पस, ऐ भाइयों! तुम्हें मा' लूम हो कि उसी के वसीले से तुम को गुनाहों की मु’आफ़ी की ख़बर दी जाती है। और मूसा की शरी' अत के ज़रिए जिन बातों से तुम बरी नहीं हो सकते थे, उन सब से हर एक ईमान लाने वाला उसके ज़रिए बरी होता है।
पस, ऐ भाइयों! तुम्हें मा' लूम हो कि उसी के वसीले से तुम को गुनाहों की मु’आफ़ी की ख़बर दी जाती है। और मूसा की शरी' अत के ज़रिए जिन बातों से तुम बरी नहीं हो सकते थे, उन सब से हर एक ईमान लाने वाला उसके ज़रिए बरी होता है।
तुम भी पहले ख़ुदा के सामने अजनबी थे और दुश्मन की तरह सोच रख कर बुरे काम करते थे।
येसु, अंगूर का हक़ीक़ी दरख़्त
"अंगूर का हक़ीक़ी दरख़्त मैं हूँ और मेरा बाप बाग़बान है। वह मेरी हर डाल को जो फल नहीं लाती काट कर फैंक देता है। लेकिन जो डाली फल लाती है उस की वह काँट — छाँट करता है ताकि ज़्यादा फल लाए। उस कलाम के वजह से जो मैं ने तुम को सुनाया है तुम तो पाक — साफ़ हो चुके हो। मुझ में क़ाईम रहो तो मैं भी तुम में क़ाईम रहूँगा। जो डाल दरख़्त से कट गई है वह फल नहीं ला सकती। बिल्कुल इसी तरह तुम भी अगर तुम मुझ में क़ाईम नहीं रहो तो फल नहीं ला सकते। मैं ही अंगूर का दरख़्त हूँ, और तुम उस की डालियाँ हो। जो मुझ में क़ाईम रहता है और मैं उस में वह बहुत सा फल लाता है, क्यूँकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ नहीं कर सकते। जो मुझ में क़ाईम नहीं रहता और न मैं उस में उसे सूखी डाल की तरह बाहर फैंक दिया जाता है। और लोग उन का ढेर लगा कर उन्हें आग में झोंक देते हैं जहाँ वह जल जाती हैं। अगर तुम मुझ में क़ाईम रहो और मैं तुम में तो जो जी चाहे माँगो, वह तुम को दिया जाएगा। जब तुम बहुत सा फल लाते और यूँ मेरे शागिर्द साबित होते हो तो इस से मेरे बाप को जलाल मिलता है।
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