Frutos do Espírito
Os frutos do Espírito são evidências visíveis da presença de Deus na vida do crente. Amor, alegria, paz, paciência — são marcas que diferenciam os filhos de Deus no mundo.
O fruto do Espírito
O fruto do Espírito é amor, alegria, paz, paciência, amabilidade, bondade, fidelidade, mansidão e domínio próprio. Contra estas coisas não há lei.
पर आत्मा को फल प्रेम, खुसी, सान्ति, सबर, किरपा, भलाई, भरोसा, भोलो पन नमरता, अऊर संयम हैं असा-असा काम हुन को बदला विरोध म कोई भी नेम नी हाय।
काहेकि तुम तो पहिले अन्धेरा म हता पर अब प्रभु म उजेरो आय, एकोलाने उजेरो कि अवलाद को जसो चलो। काहेकि उजेरो को फल सब प्रकार की भलाई, अर धार्मिकता, अऊर हकीगत या सत्य हैं अर यू परखनु कि प्रभु ख का भावा हैं।
पर जे ग्यान ऊपर से आवा हैं उ पहले तो सुध्द होव हैं फिर सान्ति से मिलनसार कोमल अर मृदुभाव अर दया अर अच्छो फल से लदो वालो अर पक्छपात अर मन कपट रहित होव हैं। मिलाप करान वालो धरम को फल मेल-मिलाप को संग सान्ति से बोवह हैं।
वसो ही अरे मोरो भई हुन, तुम भी मसी को सरीर को दुवारा नेम हुन ख लाने मरे हुयो बन गयो, कि उ दूसरो को हो जा, जो मरे हुयो म से जिन्दो भयो: काहेकि हम परमेस्वर का लाने फल लाएँ हे। काहे कि जब हम सारीरिक हतो, ते पाप हुन कि लालचपन से जो नेम हुन ख व्दारा हतो, मरन का फल पैदा करन का लाने हमारो जिन्दगी म काम करत हता। पर जे ख बन्धन म हता ओखा लाने मर ख अब नेम हुन से असो छुट गयो, कि लेख कि पुरानी रीति पर सेवा नी, पर आत्मा कि नई रीति पर सेवा कर हैं।
अब जीन बात हुन से अब तुम लज्जित होव हैं, ओ से उ बखत तुम का फल पायो हतो? काहेकि उन ख आखरी ते मरनू हैं। पर अब पाप से आजाद हो ख अर परमेस्वर को दास बन ख तुम ख फल मिलो जेसे सुध्द हुन मिल होव हैं, अर ओको अन्त आखरी जिन्दगी हैं।
Permanecer em Cristo
Quem permanece em Cristo dá muito fruto. Toda árvore boa produz bons frutos — e é pelo fruto que se conhece a árvore.
तुम मोरो म बनिया रहनु, अर मी तुम म। जसी डगियान अदि झाड़ की डगियान म लगी नी रहन की ते अपनो तुम म नी फर सका, वसो ही तुम भी अदि मोरो म बनिया नी रहन का ते नी फल फर सका।"
मी सही फर फरन वाली डगियान आय: अर तुम ओकी ड़ाली हुन आय। जो मोरो संग म बनिया रहवा हैं अर मी ओमा, उ ढ़ेर सारो फर फरा हैं, काहेकि मोसे अलग होका तुम कुछ भी नी कर सका।
मोरो परमेस्वर बाप की बड़ाई ऐसे होवा हैं की तुम ढ़ेर सारो फल लाव, तब जा ख तुम मोरा चेला ठहरे।
"कोई अच्छो झाड़ नी जो निकम्मा फल लाए, अर नी ते निकम्मो झ़ाड़ हैं जो चोक्खो फल लाए। हर एक झाड़ अपन फल से पहचानता जावा हैं; काहेकि अदमी झाड़ी हुन से अंजीर नी तोड़त अर नी झड़बेरी से अंगूर। चोक्खो अदमी अपन मन के भले भण्डार से भली बात निकलत हैं, अर बुरो अदमी अपन मन के बुरो भण्डार से बुरो बात निकलत हैं; काहेकि जो मन म भरो हैं ऊईच ओको मुँह पर आवह हैं।
एकोलाने मन फिराव को लायक फल लाओ।
Semear e colher
Quem semeia na justiça colherá fruto de vida. Os frutos do Espírito são a colheita de uma vida plantada no Senhor.
अर अकेलो उ नी पर हम भी जेका नजदीक आत्मा को पहलो फल हैं, खुद ही अपनो म कराह हैं; अर लेपालक होन की, असो कि अपनो सरीर ख छुटकारा की रस्ता देख हैं।