Mãe
A mãe é honrada na Bíblia como pilar da família. Seu amor incondicional, sua sabedoria e sua dedicação são celebrados como reflexo do próprio amor de Deus por seus filhos.
O amor de mãe
Pode uma mãe esquecer-se do filho do seu ventre? Ainda que ela se esquecesse, Deus nunca nos abandona. O amor materno reflete o divino.
जिस तरह माँ अपने बेटे को दिलासा देती है, उसी तरह मैं तुम को दिलासा दूँगा; येरूशलेम ही में तुम तसल्ली पाओगे।
देखो, औलाद ख़ुदावन्द की तरफ़ से मीरास है,
और पेट का फल उसी की तरफ़ से अज्र है,
मुबारक है हर एक जो ख़ुदावन्द से डरता,
और उसकी राहों पर चलता है।
तू अपने हाथों की कमाई खाएगा;
तू मुबारक और फ़र्माबरदार होगा।
मुहब्बत साबिर है और मेहरबान, मुहब्बत हसद नहीं करती, मुहब्बत शेख़ी नहीं मारती और फ़ूलती नहीं; नाज़ेबा काम नहीं करती, अपनी बेहतरी नहीं चाहती, झुँझलाती नहीं, बदगुमानी नहीं करती; बदकारी में ख़ुश नहीं होती, बल्कि रास्ती से ख़ुश होती है; सब कुछ सह लेती है, सब कुछ यक़ीन करती है, सब बातों की उम्मीद रखती है, सब बातों में बर्दाश्त करती है।
Sabedoria e instrução
A mãe sábia instrui os filhos nos caminhos de Deus. Seu ensino é lei que guia e sua disciplina é expressão de amor verdadeiro.
ऐ मेरे बेटे, अपने बाप की तरबियत पर कान लगा,
और अपनी माँ की ता’लीम को न छोड़;
क्यूँकि वह तेरे सिर के लिए ज़ीनत का सेहरा,
और तेरे गले के लिए तौक़ होंगी।
लड़के की उस राह में तरबियत कर जिस पर उसे जाना है;
वह बूढ़ा होकर भी उससे नहीं मुड़ेगा।
वह जो अपनी छड़ी को बाज़ रखता है, अपने बेटे से नफ़रत रखता है,
लेकिन वह जो उससे मुहब्बत रखता है, बरवक़्त उसको तम्बीह करता है।
'अक़्लमंद बेटा बाप को ख़ुश रखता है,
लेकिन बेवक़ूफ़ अपनी माँ की तहक़ीर करता है।
"इसलिए तुम ज़रूर ही अपनी एहतियात रखना और बड़ी हिफ़ाज़त करना, ऐसा न हो कि तुम वह बातें जो तुमने अपनी आँख से देखी हैं भूल जाओ और वह ज़िन्दगी भर के लिए तुम्हारे दिल से जाती रहें; बल्कि तुम उनको अपने बेटों और पोतों को सिखाना।
Honrar a mãe
Honra teu pai e tua mãe. A mulher virtuosa é digna de louvor — seus filhos se levantam e a chamam bem-aventurada.
"तू अपने बाप और अपनी माँ की इज़्ज़त करना ताकि तेरी उम्र उस मुल्क में जो ख़ुदावन्द तेरा ख़ुदा तुझे देता है दराज़ हो।
फ़र्ज़न्द और माँ–बाप
ऐ फ़र्ज़न्दों! ख़ुदावन्द में अपने माँ — बाप के फ़रमाबरदार रहो, क्यूँकि यह ज़रूरी है। "अपने बाप और माँ की इज़्ज़त कर (ये पहला हुक्म है जिसके साथ वा’दा भी है) ताकि तेरा भला हो, और तेरी ज़मीन पर उम्र लम्बी हो।"
नेकोकार बीवी किसको मिलती है?
क्यूँकि उसकी क़द्र मरजान से भी बहुत ज़्यादा है।
'इज़्ज़त और हुर्मत उसकी पोशाक हैं,
और वह आइंदा दिनों पर हँसती है।
उसके मुँह से हिकमत की बातें निकलती हैं,
उसकी ज़बान पर शफ़क़त की ता’लीम है।
वह अपने घराने पर बख़ूबी निगाह रखती है,
और काहिली की रोटी नहीं खाती।
उसके बेटे उठते हैं और उसे मुबारक कहते हैं;
उसका शौहर भी उसकी ता’रीफ़ करता है:
"कि बहुतेरी बेटियों ने फ़ज़ीलत दिखाई है,
लेकिन तू सब से आगे बढ़ गई।"
हुस्न, धोका और जमाल बेसबात है,
लेकिन वह 'औरत जो ख़ुदावन्द से डरती है, सतुदा होगी।
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