Mal
A existência do mal é realidade que a Bíblia confronta diretamente. Deus não é autor do mal, mas nos dá armas para vencê-lo e promete que o bem sempre prevalecerá.
Separar-se do mal
O temor do Senhor é aborrecer o mal. A Bíblia nos exorta a odiar o pecado, guardar os pés do mal e fugir de toda aparência maligna.
यहोवा का भय मानना बुराई से बैर रखना है।
घमण्ड और अहंकार, बुरी चाल से,
और उलट-फेर की बात से मैं बैर रखती हूँ।
हे यहोवा के प्रेमियों, बुराई से घृणा करो;
वह अपने भक्तों के प्राणों की रक्षा करतावह अपने भक्तों के प्राणों की रक्षा करता: उसके पवित्र जनों या उसके पृथक किए गए लोगों के प्राणों की। अर्थात् वह खतरों से उसकी रक्षा करता है और बड़ी सतर्कता से उनकी चौकसी करता है। ,
और उन्हें दुष्टों के हाथ से बचाता है।
बुराई को छोड़ और भलाई कर;
मेल को ढूँढ़ और उसी का पीछा कर। (इब्रा. 12:14)
मेरे पैरों को अपने वचन के मार्ग पर स्थिर कर,
और किसी अनर्थ बात को मुझ पर प्रभुता न करने दे।
अपने को धोकर पवित्र करो: मेरी आँखों के सामने से अपने बुरे कामों को दूर करो; भविष्य में बुराई करना छोड़ दो, (1 पत. 2:1, याकू. 4:8)
अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न होना;
यहोवा का भय मानना, और बुराई से अलग रहना। (रोम. 12:16)
ऐसा करने से तेरा शरीर भला चंगा,
और तेरी हड्डियाँ पुष्ट रहेंगी।
Vencer o mal com o bem
Não te deixes vencer do mal, mas vence o mal com o bem. A luz brilha nas trevas, e as trevas não prevalecem contra ela.
बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई को जीत लो।
मसीही व्यवहार
प्रेम निष्कपट हो; बुराई से घृणा करो; भलाई में लगे रहो। (आमो. 5:15)
विभाजनकारी व्यक्तियों का त्याग
अब हे भाइयों, मैं तुम से विनती करता हूँ, कि जो लोग उस शिक्षा के विपरीत जो तुम ने पाई है, फूट डालने, और ठोकर खिलाने का कारण होते हैं, उनसे सावधान रहो; और उनसे दूर रहो।
और ज्योति अंधकार में चमकती है; और अंधकार ने उसे ग्रहण न किया।
देखो की कोई किसी से बुराई के बदले बुराई न करे; पर सदा भलाई करने पर तत्पर रहो आपस में और सबसे भी भलाई ही की चेष्टा करो। (1 पत. 3:9)
सब बातों को परखो जो अच्छी है उसे पकड़े रहो। सब प्रकार की बुराई से बचे रहो। (फिलि. 4:8)
Proteção contra o mal
Deus nos livra do mal e guarda nossos passos. Devemos nos revestir da armadura de Deus para resistir às forças das trevas.
‘और हमें परीक्षा में न ला,
परन्तु बुराई से बचा; [क्योंकि राज्य और पराक्रम और महिमा सदा तेरे ही हैं।’ आमीन।]
मैं यह विनती नहीं करता, कि तू उन्हें जगत से उठा ले, परन्तु यह कि तू उन्हें उस दुष्ट से बचाए रख।
यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा;
वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा।
यहोवा तेरे आने-जाने में
तेरी रक्षा अब से लेकर सदा तक करता रहेगायहोवा .... तेरी रक्षा अब से लेकर सदा तक करता रहेगा: अर्थात् हर जगह हर समय।।
और प्रभु मुझे हर एक बुरे काम से छुड़ाएगा, और अपने स्वर्गीय राज्य में उद्धार करके पहुँचाएगा उसी की महिमा युगानुयुग होती रहे। आमीन।
परमेश्वर के सारे हथियार बाँध लो कि तुम शैतान की युक्तियों के सामने खड़े रह सको।
क्योंकि हमारा यह मल्लयुद्ध, लहू और माँस से नहीं, परन्तु प्रधानों से और अधिकारियों से, और इस संसार के अंधकार के शासकों से, और उस दुष्टता की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं।
क्रोध तो करो, पर पाप मत करो; सूर्य अस्त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। (भज. 4:4) और न शैतान को अवसर दो।
Deus transforma o mal em bem
O que o mal pretendeu contra nós, Deus transformou em bem. Ele tira pureza da aflição e confessa a restauração dos arrependidos.
यद्यपि तुम लोगों ने मेरे लिये बुराई का विचार किया था; परन्तु परमेश्वर ने उसी बात में भलाई का विचार किया, जिससे वह ऐसा करे, जैसा आज के दिन प्रगट है, कि बहुत से लोगों के प्राण बचे हैं।
इसलिए सारी मलिनता और बैर-भाव की बढ़ती को दूर करके, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।
यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। (भज. 32:5, नीति. 28:13)
फिर उसने कहा, "जो मनुष्य में से निकलता है, वही मनुष्य को अशुद्ध करता है। क्योंकि भीतर से, अर्थात् मनुष्य के मन से, बुरे-बुरे विचार, व्यभिचार, चोरी, हत्या, परस्त्रीगमन, लोभ, दुष्टता, छल, लुचपन, कुदृष्टि, निन्दा, अभिमान, और मूर्खता निकलती हैं। ये सब बुरी बातें भीतर ही से निकलती हैं और मनुष्य को अशुद्ध करती हैं।"
बैर से तो झगड़े उत्पन्न होते हैं,
परन्तु प्रेम से सब अपराध ढँप जाते हैंप्रेम से सब अपराध ढँप जाते हैं: पहले छिपा लेता है, प्रकट नहीं करता, फिर पापों को क्षमा करके उन्हें भूल जाता है।। (1 कुरि. 13:7, याकू. 5:20, 1 पत. 4:8)
खराई से न्याय चुकाना, और एक दूसरे के साथ कृपा और दया से काम करना, न तो विधवा पर अंधेर करना, न अनाथों पर, न परदेशी पर, और न दीन जन पर; और न अपने-अपने मन में एक दूसरे की हानि की कल्पना करना।"
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