Materialismo
O materialismo é uma armadilha espiritual. A Bíblia alerta que o amor ao dinheiro é raiz de todos os males e nos chama a buscar tesouros no céu, não na terra.
O perigo das riquezas
Que aproveita ao homem ganhar o mundo inteiro e perder a sua alma? O materialismo engana e afasta do que realmente importa.
भला इसका क्या लाभ कि कोई व्यक्ति पूरा संसार तो प्राप्त करे किंतु अपना प्राण खो दे? या किस वस्तु से मनुष्य अपने प्राण का अदला-बदली कर सकता है?
भला इसका क्या लाभ कि कोई व्यक्ति पूरा संसार तो प्राप्त करे किंतु अपना प्राण खो दे?
जो धनी बनने के अभिलाषी हैं, वे परीक्षा, फंदें और अनेक मूर्खता भरे व हानिकारक लालसाओं में पड़ जाते हैं, जो उन्हें पतन और विनाश के गर्त में ले डुबाती हैं.
क्योंकि हम इस संसार में कुछ भी लेकर नहीं आए हैं, इसलिये हम यहां से कुछ ले जा भी न सकेंगे. हम इसी में संतुष्ट रहेंगे कि हमारे पास भोजन तथा वस्त्र हैं.
क्योंकि हम इस संसार में कुछ भी लेकर नहीं आए हैं, इसलिये हम यहां से कुछ ले जा भी न सकेंगे. हम इसी में संतुष्ट रहेंगे कि हमारे पास भोजन तथा वस्त्र हैं.
Tesouros no céu
Ajuntai tesouros no céu, onde traça e ferrugem não consomem. O bom nome vale mais que muitas riquezas, e a sabedoria supera o ouro.
वास्तविक धन
"पृथ्वी पर अपने लिए धन इकट्ठा न करो, जहां कीट-पतंगे तथा जंग उसे नाश करते तथा चोर सेंध लगाकर चुराते हैं परंतु धन स्वर्ग में जमा करो, जहां न तो कीट-पतंगे या जंग नाश करते और न ही चोर सेंध लगाकर चुराते हैं
क्योंकि जहां तुम्हारा धन है, वहीं तुम्हारा मन भी होगा.
येशु ने उसे उत्तर दिया, "यदि तुम सिद्ध बनना चाहते हो तो अपनी संपत्ति को बेचकर उस राशि को निर्धनों में बांट दो और आओ, मेरे पीछे हो लो—धन तुम्हें स्वर्ग में प्राप्त होगा."
विशाल निधि से कहीं अधिक योग्य है अच्छा नाम;
तथा स्वर्ण और चांदी से श्रेष्ठ है आदर सम्मान!
स्वर्ण की अपेक्षा ज्ञान को प्राप्त करना कितना अधिक उत्तम है,
और बुद्धिमत्ता की उपलब्धि चांदी पाने से.
याहवेह के प्रति श्रद्धा में सीमित धन ही उत्तम होता है,
इसकी अपेक्षा कि अपार संपदा के साथ विपत्तियां भी संलग्न हों.
Contentamento e generosidade
Grande ganho é a piedade com contentamento. A cobiça é idolatria, mas a generosidade traz alegria e bênção.
परंतु संतोष भरी परमेश्वर की भक्ति स्वयं में एक अद्भुत धन है
संसार के धनवानों को आदेश दो कि वे घमंड न करें और अपनी आशा नाशमान धन पर नहीं, परंतु परमेश्वर पर रखें, जो हमारे उपभोग की हर एक वस्तु बहुतायत में देते हैं.
यह ध्यान रहे कि तुम्हारा चरित्र धन के लोभ से मुक्त हो. जो कुछ तुम्हारे पास है, उसी में संतुष्ट रहो क्योंकि स्वयं उन्होंने कहा है,
"मैं न तो तुम्हारा त्याग करूंगा
और न ही कभी तुम्हें छोड़ूंगा."
इसलिये अपनी पृथ्वी की देह के अंगों को—वेश्यागामी, अशुद्धता, दुष्कामना, लालसा तथा लोभ को, जो वास्तव में मूर्ति पूजा ही है—मार दो
तब प्रभु येशु ने भीड़ को देखते हुए उन्हें चेतावनी दी, "स्वयं को हर एक प्रकार के लालच से बचाए रखो. मनुष्य का जीवन उसकी संपत्ति की बहुतायत होने पर भला नहीं है."
जो धन से प्रेम रखता है, वह कभी धन से संतुष्ट न होगा;
और न ही वह जो बहुत धन से प्रेम करता है.
यह भी बेकार ही है.
जैसे वह अपनी मां के गर्भ से नंगा आया था,
उसे लौट जाना होगा, जैसे वह आया था.
ठीक वैसे ही वह अपने हाथ में
अपनी मेहनत के फल का कुछ भी नहीं ले जाएगा.
O invisível acima do visível
As coisas que se veem são temporais; as que não se veem são eternas. Devemos fixar os olhos no que é permanente e verdadeiro.
क्योंकि हमने अपना ध्यान उस पर केंद्रित नहीं किया, जो दिखाई देता है परंतु उस पर, जो दिखाई नहीं देता है. जो कुछ दिखाई देता है, वह क्षण-भर का है किंतु जो दिखाई नहीं देता वह अनंत काल का.
धनी व्यक्ति के लिए उसका धन एक गढ़ के समान होता है;
उनको लगता हैं कि उस पर चढ़ना मुश्किल है!
प्रकोप के दिन में धन-संपत्ति निरर्थक सिद्ध होती है,
मात्र धार्मिकता मृत्यु से सुरक्षा प्रदान करती है.
जैसे ही तुम्हारी दृष्टि इस पर जा ठहरती है, यह अदृश्य हो जाती है,
मानो इसके पंख निकल आए हों,
और यह गरुड़ के समान आकाश में उड़ जाता है.
सारे दिन वह लालसा ही लालसा करता रहता है,
किंतु धर्मी उदारतापूर्वक दान करता जाता है.
मुझसे वह सब अत्यंत दूर कर दीजिए, जो झूठ है, असत्य है;
न तो मुझे निर्धनता में डालिए और न मुझे धन दीजिए,
मात्र मुझे उतना ही भोजन प्रदान कीजिए, जितना आवश्यक है.
इसी प्रकार स्त्रियों का संवारना समय के अनुसार हो—शालीनता भरा तथा विवेकशील—सिर्फ बाल-सजाने तथा स्वर्ण, मोतियों या कीमती वस्त्रों से नहीं, परंतु अच्छे कामों से, जो परमेश्वर भक्त स्त्रियों के लिए उचित है.
शिष्यों का धन
शिष्यों के इस समुदाय में सभी एक मन और एक प्राण थे. कोई भी अपने धन पर अपना अधिकार नहीं जताता था. उन सभी का धन एक में मिला हुआ था.