Materialismo: o perigo da riqueza e o contentamento
O que a Bíblia diz sobre o materialismo
Na Bíblia, o materialismo não se define pela posse de bens em si, mas pela ilusão de que o valor, a segurança e a identidade de uma pessoa dependem do que ela acumula. Jesus resumiu esse engano em Lucas 12:15 ao afirmar que a vida humana não consiste na abundância dos bens que possui, tratando a cobiça desenfreada como uma forma direta de idolatria.
तब ओह ओमन ला कहिस, "सचेत रहव! अपनआप ला जम्मो किसम के लालच ले दूर रखव; काबरकि मनखे के जिनगी ह ये बात ले नइं बनय कि ओकर करा कतेक जादा संपत्ति हवय।"(लूका 12:15)
एकरसेति, अपन ओ सुभावमन ला मार डारव, जऊन मन संसारिक अंय—जइसने कि बेभिचार, असुधता, काम-वासना, खराप लालसा अऊ लोभ जऊन ह मूरती-पूजा सहीं अय।(कुलुस्सी 3:5)
यदि मनखे ह जम्मो संसार ला पा जावय, पर अपन परान ला गंवा दे, त ओला का फायदा? या कोनो मनखे अपन परान के बदले का दे सकथे?(मत्ती 16:26)
यदि मनखे ह जम्मो संसार ला पा जावय, पर अपन परान ला गंवा दे, त ओला का फायदा?(मरकुस 8:36)
Por que a confiança na riqueza falha
A Escritura expõe repetidamente a fragilidade dos bens terrenos. A riqueza não é eterna, não acompanha o indivíduo após a morte e é incapaz de comprar livramento espiritual. Além disso, a busca compulsiva por acumulação produz insatisfação crônica: quem faz do dinheiro sua fonte de esperança descobre que ele nunca é suficiente para preencher o coração.
जऊन ह रूपिया-पईसा ले मया करथे, ओकर करा कभू परयाप्त नइं रहय;
जऊन ह धन ले मया करथे, ओला कभू अपन कमई ले संतोस नइं होवय।
येह घलो बेकार ए।(सभोपदेसक 5:10)
हर एक ह अपन दाई के गरभ ले नंगरा आथे,
अऊ जइसे हर एक जन आथे, वइसे ओह चले जाथे।
ओह अपन हांथ म
अपन मेहनत के कुछू नइं ले जावय।(सभोपदेसक 5:15)
काबरकि हमन ये संसार म कुछू नइं लाने हवन अऊ हमन इहां ले कुछू नइं ले जा सकन। एकरसेति कहूं हमर करा भोजन अऊ कपड़ा हवय, त हमन ला ओहीच म संतोस रहना चाही।(1 तीमुथियुस 6:7,8)
जऊन मन धनी होय चाहथें, ओमन लालच म, अऊ फांदा म अऊ कतको किसम के मुरूख अऊ हानिकारक ईछा म फंसथें, जऊन ह मनखेमन ला बरबादी अऊ बिनास म बुड़ो देथे।(1 तीमुथियुस 6:9)
कोप के बेरा म धन ले कोनो लाभ नइं होवय,
पर धरमीपन ह मिरतू ले बचाथे।(नीतिबचन 11:4)
धनवानमन के धन ह ओमन के गढ़वाला सहर होथे;
ओमन के कल्पना म येह नाप के बाहिर बहुंत ऊंच दीवार ए।(नीतिबचन 18:11)
एक नजर उठाके धन ला देख, ओह तुरते गायब हो जाथे,
काबरकि ओमा पंख निकल आथे
अऊ ओह गिधवा के सहीं अकास म उड़ जाथे।(नीतिबचन 23:5)
O contentamento como alternativa
Em oposição ao materialismo, o ensino bíblico propõe o contentamento: a capacidade de viver em paz com o que se tem, confiando na providência diária de Deus. Ter recursos materiais não é pecado, mas a sabedoria bíblica prioriza a integridade, o temor a Deus e a paz interior acima do ouro e da prata.
पर संतोस सहित परमेसर के भक्ति म जिनगी बितई ह बहुंत बड़े कमई ए।(1 तीमुथियुस 6:6)
तुमन अपन जिनगी ला रूपिया-पईसा के मोह-मया ले दूर रखव अऊ जऊन कुछू तुम्हर करा हवय, ओमा संतोस रहव, काबरकि परमेसर ह कहे हवय,
"मेंह तोला कभू नइं छोड़ंव;
मेंह तोला कभू नइं तियागंव।"(इबरीमन 13:5)
यहोवा के भय के संग थोरकन धन होवई ह
समस्या के संग बहुंत धन होवई ले बने अय।(नीतिबचन 15:16)
बुद्धि ला पाना सोन के पाय ले जादा बने अय,
अऊ समझ के बात ला जानना, चांदी के पाय ले जादा बने अय।(नीतिबचन 16:16)
बहुंत संपत्ति होवई ले बने नांव होवई ह उत्तम ए;
अऊ सोन-चांदी ले आदरमान पाना जादा बने ए।(नीतिबचन 22:1)
लबरापन अऊ लबरा गोठ ला मोर ले दूरिहा रख;
मोला न तो गरीब बना अऊ न ही धनी,
पर मोला सिरिप हर दिन के जेवन दे।(नीतिबचन 30:8)
मेंह ये घलो चाहत हंव कि माईलोगनमन संकोच अऊ बने आचरन के संग ठीक से कपड़ा पहिरंय, न कि बाल गुंथके या सोन या मोती या मंहगा कपड़ा ले अपनआप ला संवारंय, पर भलई के काम करंय, जइसने कि ओ माईलोगनमन ला सोभा देथे, जऊन मन परमेसर के अराधना करे के घोसना करथें।(1 तीमुथियुस 2:9,10)
Generosidade e tesouros duradouros
O remédio mais prático contra o apego aos bens é a generosidade. Ao ordenar que seus seguidores ajuntem tesouros no céu em vez da terra, Jesus ensina a redirecionar o coração: onde estão os recursos, ali se fixa a devoção. Quando bens materiais são compartilhados para suprir o próximo e servir a Deus, eles deixam de ser ídolos e se tornam instrumentos de serviço.
"अपन खातिर ये धरती म धन जमा झन करव, जिहां कीरा अऊ मुर्चा येला नास करथें, अऊ चोरमन सेंध मारके चोरा लेथें। पर अपन खातिर स्वरग म धन जमा करव, जिहां कीरा अऊ मुर्चा येला नास नइं कर सकंय, अऊ न ही चोरमन सेंध मारके चोरी कर सकंय।(मत्ती 6:19,20)
काबरकि जिहां तुम्हर धन हवय, उहां तुम्हर मन घलो लगे रहिही।(मत्ती 6:21)
यीसू ह ओला कहिस, "यदि तेंह सिद्ध बने चाहत हस, त जा, अपन जायदाद ला बेचके गरीबमन ला देय दे, अऊ तोला स्वरग म धन मिलही। तब आ अऊ मोर पाछू हो ले।"(मत्ती 19:21)
ये संसार के धनवानमन ला हुकूम दे कि ओमन घमंडी झन होवंय अऊ नासमान धन ऊपर आसा झन रखंय, पर परमेसर ऊपर आसा रखंय, जऊन ह हमन ला आनंद मनाय बर हर चीज उदार मन ले देथे।(1 तीमुथियुस 6:17)
दिन भर ओह ईछा करते रहिथे,
पर धरमी मनखे ह अपन बर बिगर रखे दे देथे।(नीतिबचन 21:26)
जम्मो बिसवास करइयामन एक हिरदय अऊ एक चित के रहंय। इहां तक कि कोनो अपन संपत्ति ला अपन नइं कहय, पर जम्मो झन के संपत्ति म जम्मो झन के हक रहय।(प्रेरितमन के काम 4:32)
एकरसेति, हमन ओ चीज ऊपर धियान नइं देवन, जऊन ह दिखत हवय, पर हमन ओ चीज ऊपर धियान लगाथन, जऊन ह नइं दिखत हवय। काबरकि जऊन चीज ह दिखत हवय, ओह सिरिप कुछू समय बर अय, पर जऊन चीज ह नइं दिखय, ओह सदाकाल तक बने रहिथे।(2 कुरिन्थुस 4:18)
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