Meditação
A meditação na Palavra de Deus é prática espiritual essencial. Diferente da meditação oriental, a meditação bíblica é reflexão profunda sobre as Escrituras — ruminar a Palavra dia e noite.
Meditar na Palavra dia e noite
Bem-aventurado o homem que medita na lei do Senhor de dia e de noite. Ele é como árvore plantada junto a ribeiros de águas.
दो राहें
मुबारक है वह जो न बेदीनों के मशवरे पर चलता, न गुनाहगारों की राह पर क़दम रखता, और न तानाज़नों के साथ बैठता है
बल्कि रब की शरीअत से लुत्फ़अंदोज़ होता और दिन-रात उसी पर ग़ौरो-ख़ौज़ करता रहता है।
जो बातें इस शरीअत की किताब में लिखी हैं वह तेरे मुँह से न हटें। दिन-रात उन पर ग़ौर करता रह ताकि तू एहतियात से इसकी हर बात पर अमल कर सके। फिर तू हर काम में कामयाब और ख़ुशहाल होगा।
13
तेरी शरीअत मुझे कितनी प्यारी है! दिन-भर मैं उसमें महवे-ख़याल रहता हूँ।
तेरा फ़रमान मुझे मेरे दुश्मनों से ज़्यादा दानिशमंद बना देता है, क्योंकि वह हमेशा तक मेरा ख़ज़ाना है।
मुझे अपने तमाम उस्तादों से ज़्यादा समझ हासिल है, क्योंकि मैं तेरे आईन में महवे-ख़याल रहता हूँ।
मुझे बुज़ुर्गों से ज़्यादा समझ हासिल है, क्योंकि मैं वफ़ादारी से तेरे अहकाम की पैरवी करता हूँ।
मैं तेरी हिदायात में महवे-ख़याल रहूँगा और तेरी राहों को तकता रहूँगा।
मैं तेरे फ़रमानों से लुत्फ़अंदोज़ होता हूँ और तेरा कलाम नहीं भूलता।
मैं तेरे फ़रमानों से लुत्फ़अंदोज़ होता हूँ, वह मुझे प्यारे हैं।
मैं अपने हाथ तेरे फ़रमानों की तरफ़ उठाऊँगा, क्योंकि वह मुझे प्यारे हैं। मैं तेरी हिदायात में महवे-ख़याल रहूँगा।
पौ फटने से पहले पहले मैं उठकर मदद के लिए पुकारता हूँ। मैं तेरे कलाम के इंतज़ार में हूँ।
रात के वक़्त ही मेरी आँखें खुल जाती हैं ताकि तेरे कलाम पर ग़ौरो-ख़ौज़ करूँ।
Frutos da meditação
A meditação produz entendimento, alegria e adoração. Quem medita na Palavra encontra direção, paz e renovação espiritual.
ऐ रब, बख़्श दे कि मेरे मुँह की बातें और मेरे दिल की सोच-बिचार तुझे पसंद आए। तू ही मेरी चट्टान और मेरा छुड़ानेवाला है।
मेरा मुँह हिकमत बयान करेगा और मेरे दिल का ग़ौरो-ख़ौज़ समझ अता करेगा।
मैं रब के काम याद करूँगा, हाँ क़दीम ज़माने के तेरे मोजिज़े याद करूँगा।
जो कुछ तूने किया उसके हर पहलू पर ग़ौरो-ख़ौज़ करूँगा, तेरे अज़ीम कामों में महवे-ख़याल रहूँगा।
मैं क़दीम ज़माने के दिन याद करता और तेरे कामों पर ग़ौरो-ख़ौज़ करता हूँ। जो कुछ तेरे हाथों ने किया उसमें मैं महवे-ख़याल रहता हूँ।
ऐ अल्लाह, हमने तेरी सुकूनतगाह में तेरी शफ़क़त पर ग़ौरो-ख़ौज़ किया है।
मैं उम्र-भर रब की तमजीद में गीत गाऊँगा, जब तक ज़िंदा हूँ अपने ख़ुदा की मद्हसराई करूँगा।
मेरी बात उसे पसंद आए! मैं रब से कितना ख़ुश हूँ!