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Ouvir: o que a Bíblia ensina sobre a escuta

O que significa ouvir na Bíblia

Na Bíblia, ouvir significa muito mais do que registrar sons: ouvir a Deus é prestar atenção, crer e colocar a mensagem em prática. Tanto no hebraico (shama) quanto no grego (akouo), o ato de ouvir está inseparavelmente ligado à obediência.

A fé cristã nasce dessa escuta atenta. Paulo explica que a confiança em Deus não surge do nada, mas de ouvir a mensagem de Cristo proclamada:

पर मसीह के बारें म्ह वचन सुणण तै बिश्वास होवै सै।(रोमियों 10:17)

पर जिन माणसां नै मसीह पै बिश्वास न्ही करया, तो वे उसनै मदद खात्तर किस तरियां पुकारैंगे? अर जिसकै बारें म्ह सुण्या न्ही उसपै किस तरियां बिश्वास करैंगें? अर वे किस तरियां सुणैगें जिब तक कोए प्रचारक ना जावै।(रोमियों 10:14)

जिसके कान हों, वो ध्यान तै सुण ले।"(मत्ती 13:9)

Ouvir e colocar em prática

Ouvir a instrução divina sem agir é considerado autoengano nas Escrituras. Jesus e Tiago insistem que a maturidade espiritual não se mede pela quantidade de ensino acumulado, mas pela disposição prática de edificar a vida sobre o que foi ouvido:

पर परमेसवर के वचन पै चाल्‍लण आळे बणो, अर सिर्फ सुणण आळे ए न्ही, जो अपणे-आपनै धोक्खा देवै सै।(याकूब 1:22)

"इस करकै जो कोए मेरी इन बात्तां नै सुणकै उननै मान्‍नै सै, वो उस अकलमंद माणस की ढाळ होगा जिसनै अपणे घर की नीम चट्टान पै धरी। अर मिह बरसया, बाढ़ आयी, आँधी आई, अर उस घर तै टकराई, फेर भी वो कोनी गिरया, क्यूँके उसकी नीम चट्टान पै धरी ग्यी थी। पर जो कोए मेरी ये बात सुणै सै अर उनपै न्ही चाल्दा, वो उस बेकूफ माणस की ढाळ सै, जिसनै अपणे घर की नीम बाळूरेत पै धरी। अर मिह बरसया, बाढ़ आयी, आँधी चाल्‍ली, अर उस घर तै टकराई अर पड़कै उसका सत्यानाश होग्या।"(मत्ती 7:24-27)

उसनै कह्या, "हाँ, पर धन्य वे सै, जो परमेसवर का वचन सुणै अर मान्‍नै सै।"(लूका 11:28)

जो बात थमनै मेरै तै सुणी, मेरे म्ह देक्खी, सीखी, अर पाई सै, उननै मान्या करो, फेर शान्ति का परमेसवर थारे गैल रह्वैगा।(फिलिप्पियों 4:9)

यीशु नै जवाब दिया: "पवित्र ग्रन्थ म्ह लिख्या सै,

‘माणस सिर्फ रोट्टी तै ए न्ही, पर परमेसवर के हरेक वचन तै जो उसनै मान्‍नै सै, जिन्दा रह्वैगा।’"(मत्ती 4:4)

Como reconhecer a voz de Deus

Jesus usa a relação entre o pastor e o rebanho para ilustrar como os discípulos aprendem a discernir a sua voz. Esse reconhecimento depende de convivência constante, apego à palavra revelada e atenção à ação de Deus:

मेरी भेड़ मेरा बोल पिच्छाणै सै, मै उननै जाणु सूं, अर वे मेरै पाच्छै-पाच्छै चाल्‍लै सै(यूहन्‍ना 10:27)

मै थारैतै साच्‍ची-साच कहूँ सूं, जो मेरा वचन सुणकै उसपै बिश्वास करै सै, जिसनै मेरै ताहीं भेज्या सै, वो अनन्त जीवन पावै सै, अर उसपै दण्ड का हुकम कोनी होन्दा, पर वो मौत नै पार करकै जीवन म्ह दाखल हो लिया सै। "मै थारैतै साच्‍ची-साच कहूँ सूं, वो बखत आवै सै, अर इब सै, जिस म्ह मरे होड़ परमेसवर के बेट्टे का वचन सुणैगें, अर जो सुणैगें वे जिवैंगे।(यूहन्‍ना 5:24,25)

देख, मै दरबाजे पै खड्या होया खटखटाऊँ सूं, जै कोए मेरा बोल सुणकै दरबाजा खोल्‍लैगा, तो मै उसकै धोरै भित्तर आकै उसकै गेल्या खाणा खाऊँगा, अर वो मेरै गेल्या।(प्रकाशितवाक्य 3:20)

थम अपणे परमेसवर यहोवा कै पाच्छै चालियो, अर उसका भय मानियो, अर उसके हुकमां पै चालियो, अर उसका वचन मानियो, अर उसकी सेवा करियो, अर उस्से तै लिपटे रहियो।(व्यवस्थाविवरण 13:4)

परमेसवर थमनै पवित्र आत्मा भरपूरी तै देवै सै, अर जो थारे म्ह सामर्थ के काम करै सै, के वो मूसा नबी के नियम-कायदा के मानण तै या मसीह के सुसमाचार पै बिश्वास करण तै इसा करै सै?(गलातियों 3:5)

A certeza de que Deus ouve a oração

A escuta bíblica é uma via de mão dupla. Deus não é indiferente às aflições humanas: Ele inclina os ouvidos para atender o clamor sincero dos que o buscam com humildade e confiança:

मै प्यार करुँ सूं, इस करकै के यहोवा नै मेरे गिड़गिड़ाणे ताहीं सुण्या सै।

उसनै जो मेरी ओड़ कान लगाया सै,

इस करकै मै जिन्दगी भर उसनै पुकारया करुँगा।(भजन संहिता 116:1,2)

यहोवा की आँख धर्मियाँ पै लाग्गी रहवै सै,

अर उसके कान भी उसकी दुहाई की

ओड़ लाग्गे रहवै सै।(भजन संहिता 34:15)

अपणे संकट म्ह मन्‍नै यहोवा ताहीं पुकारया;

मन्‍नै अपणे परमेसवर की दुहाई दी।

अर उसनै अपणे मन्दर म्ह तै मेरी वाणी सुणी।

अर मेरी दुहाई उसकै धोरै पोहचकै उसके कान्‍नां म्ह पड़ी।(भजन संहिता 18:6)

हमनै परमेसवर कै स्याम्ही यो होसला मिलै सै, वो होसला यो सै, के जो हम उसकी इच्छा के मुताबिक माँग्गा सां, तो वो म्हारी सुणै सै।(1 यूहन्‍ना 5:14)

जिब हम जाणा सां, के जो कुछ परमेसवर तै मांग्या सै, वो म्हारी सुणै सै, तो यो भी जाणा सां, के जो कुछ हमनै परमेसवर तै मांग्या, वो पाया सै।(1 यूहन्‍ना 5:15)

फेर उस बखत थम मेरे ताहीं पुकारोगे अर आकै मेरे तै प्रार्थना करोगे अर मै थारी सुणूँगा।(यिर्मयाह 29:12)

मेरे तै प्रार्थना कर अर मै तेरी सुणकै तेरे ताहीं बड़ी-बड़ी अर मुश्किल बात बताऊँगा जिननै तू इब्बे न्ही समझदा।(यिर्मयाह 33:3)

सुणो, पक्‍की बात सै के यहोवा का हाथ इसा छोट्टा न्ही होया के उद्धार ना कर सकै, ना वो इसा बैहरा होया सै के सुण ना सकै;(यशायाह 59:1)

हे यहोवा, तड़कैए तन्‍नै मेरी वाणी सुणाई देगी,

मै तड़कैए तेरी प्रार्थना करकै तेरी बाट देक्खुँगा।(भजन संहिता 5:3)

सबेरै कै बखत अपणी करुणा की बात मन्‍नै सुणा,

क्यूँके मन्‍नै तेरे पै भरोस्सा राख्या सै।

जिस रास्ते पै मन्‍नै चालणा सै, वो मन्‍नै बता दे,

क्यूँके मै अपणा मन तेरी ओड़ लगाऊँ सूं।(भजन संहिता 143:8)

Sabedoria para ouvir os outros

A Bíblia também orienta a escuta nas relações humanas diárias. Precipitar-se para falar antes de ouvir é sinal de insensatez, enquanto a paciência para acolher conselhos, correções e dialogar em momentos de conflito preserva a paz e edifica o próximo:

हे मेरे प्यारे बिश्वासी भाईयो, या बात थम जाण ल्यो, हरेक माणस सुणण कै खात्तर तैयार अर बोल्‍लण म्ह उतावळा ना हो, अर अपणे छो नै काब्बू म्ह करण आळा हो।(याकूब 1:19)

जो बिना बात सुणे जवाब देवै सै, वो बेकूफ ठहरै सै,

अर उसका अनादर होवै सै।(नीतिवचन 18:13)

जो वचन पै मन लगावै सै, वो कल्याण पावै सै,

अर जो यहोवा पै भरोस्सा राक्खै, वो धन्य होवै सै।(नीतिवचन 16:20)

जो शिक्षा पै चाल्‍लै, वो जीवन की राह पै सै,

पर जो डाँट तै मुँह मोड़ै, वो भटकै सै।(नीतिवचन 10:17)

जो अपणा कान नियम-कायदा नै सुणण तै मोड़ लेवै सै,

उसकी प्रार्थना घृणित ठहरै सै।(नीतिवचन 28:9)

बेकूफां के गीत सुणण तै बुद्धिमान की फटकार सुणनी आच्छी सै।(सभोपदेशक 7:5)

"जै तेरा बिश्वासी भाई तेरे खिलाफ कसूर करै, तो जा अर एक्ले म्ह बतळा कै उसनै समझा, जै वो तेरी सुणकै पछतावै तो तन्‍नै अपणे भाई ताहीं पा लिया। जै वो तेरी न्ही सुणै, तो एक या दो जन नै अपणे गेल्या और ले जा, क्यूँके मूसा नबी के नियम-कायदा के मुताबिक ‘हरेक बात दो या तीन तै ज्यादा गवाह के स्याम्ही सच साबित हो जावै।’ जै वो उनकी भी न्ही मान्‍नै, तो कलीसिया तै कह दे, पर जै वो कलीसिया की भी कोनी मान्‍नै तो तू यो समझ ले के वो गैर यहूदी अर चुंगी लेण आळे जिसा सै।"(मत्ती 18:15-17)

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