Pais e filhos
A relação entre pais e filhos é uma das mais preciosas na Bíblia. Deus estabeleceu a família como escola de fé, amor e formação de caráter.
Honrar pai e mãe
Honrar os pais é o primeiro mandamento com promessa. Os filhos são chamados a obedecer, respeitar e cuidar de seus pais.
अपने बाप और अपनी माँ की इज़्ज़त करना। फिर तू उस मुल्क में जो रब तेरा ख़ुदा तुझे देनेवाला है देर तक जीता रहेगा।
बच्चों और वालिदैन का ताल्लुक़
बच्चो, ख़ुदावंद में अपने माँ-बाप के ताबे रहें, क्योंकि यही रास्तबाज़ी का तक़ाज़ा है। कलामे-मुक़द्दस में लिखा है, "अपने बाप और अपनी माँ की इज़्ज़त करना।" यह पहला हुक्म है जिसके साथ एक वादा भी किया गया है, "फिर तू ख़ुशहाल और ज़मीन पर देर तक जीता रहेगा।"
बच्चो, हर बात में अपने माँ-बाप के ताबे रहें, क्योंकि यही ख़ुदावंद को पसंद है।
-16-
अपने बाप की सुन जिसने तुझे पैदा किया, और अपनी माँ को हक़ीर न जान जब बूढ़ी हो जाए।
जो अपने बाप पर ज़ुल्म करे और अपनी माँ को निकाल दे वह वालिदैन के लिए शर्म और रुसवाई का बाइस है।
जो अपने बाप या माँ पर लानत करे उसका चराग़ घने अंधेरे में बुझ जाएगा।
अगर किसी बेवा के बच्चे या पोते-नवासे हों तो उस की मदद करना उन्हीं का फ़र्ज़ है। हाँ, वह सीखें कि ख़ुदातरस होने का पहला फ़र्ज़ यह है कि हम अपने घरवालों की फ़िकर करें और यों अपने माँ-बाप, दादा-दादी और नाना-नानी को वह कुछ वापस करें जो हमें उनसे मिला है, क्योंकि ऐसा अमल अल्लाह को पसंद है।
Instruir os filhos
Os pais devem instruir os filhos no caminho certo. A educação começa cedo, com disciplina amorosa e ensino constante da Palavra.
छोटे बच्चे को सहीह राह पर चलने की तरबियत कर तो वह बूढ़ा होकर भी उससे नहीं हटेगा।
जो अहकाम मैं तुझे आज बता रहा हूँ उन्हें अपने दिल पर नक़्श कर। उन्हें अपने बच्चों के ज़हननशीन करा। यही बातें हर वक़्त और हर जगह तेरे लबों पर हों ख़ाह तू घर में बैठा या रास्ते पर चलता हो, लेटा हो या खड़ा हो।
ग़लत साथियों से ख़बरदार
मेरे बेटे, अपने बाप की तरबियत के ताबे रह, और अपनी माँ की हिदायत मुस्तरद न कर। क्योंकि यह तेरे सर पर दिलकश सेहरा और तेरे गले में गुलूबंद हैं।
ऐ वालिदो, अपने बच्चों से ऐसा सुलूक मत करें कि वह ग़ुस्से हो जाएँ बल्कि उन्हें ख़ुदावंद की तरफ़ से तरबियत और हिदायत देकर पालें।
वालिदो, अपने बच्चों को मुश्तइल न करें, वरना वह बेदिल हो जाएंगे।
छड़ी और नसीहत हिकमत पैदा करती हैं। जिसे बेलगाम छोड़ा जाए वह अपनी माँ के लिए शरमिंदगी का बाइस होगा।
जो अपने बेटे को तंबीह नहीं करता वह उससे नफ़रत करता है। जो उससे मुहब्बत रखे वह वक़्त पर उस की तरबियत करता है।
अपनी मुसीबतों को इलाही तरबियत समझकर बरदाश्त करें। इसमें अल्लाह आपसे बेटों का-सा सुलूक कर रहा है। क्या कभी कोई बेटा था जिसकी उसके बाप ने तरबियत न की?
Filhos como bênção
Os filhos são herança do Senhor. A coroa dos velhos são os filhos dos filhos, e a glória dos filhos são seus pais.
बच्चे ऐसी नेमत हैं जो हम मीरास में रब से पाते हैं, औलाद एक अज्र है जो वही हमें देता है।
जवानी में पैदा हुए बेटे सूरमे के हाथ में तीरों की मानिंद हैं।
मुबारक है वह आदमी जिसका तरकश उनसे भरा है। जब वह शहर के दरवाज़े पर अपने दुश्मनों से झगड़ेगा तो शरमिंदा नहीं होगा।
पोते बूढ़ों का ताज और वालिदैन अपने बच्चों के ज़ेवर हैं।
रास्तबाज़ का बाप बड़ी ख़ुशी मनाता है, और दानिशमंद बेटे का वालिद उससे लुत्फ़अंदोज़ होता है।
सुलेमान की हिकमत भरी हिदायात
ज़ैल में सुलेमान की अमसाल क़लमबंद हैं।
ज़िंदगीबख़्श बातें
दानिशमंद बेटा अपने बाप को ख़ुशी दिलाता जबकि अहमक़ बेटा अपनी माँ को दुख पहुँचाता है।
तुम बापों में से कौन अपने बेटे को साँप देगा अगर वह मछली माँगे? या कौन उसे बिच्छू देगा अगर वह अंडा माँगे? कोई नहीं! जब तुम बुरे होने के बावुजूद इतने समझदार हो कि अपने बच्चों को अच्छी चीज़ें दे सकते हो तो फिर कितनी ज़्यादा यक़ीनी बात है कि आसमानी बाप अपने माँगनेवालों को रूहुल-क़ुद्स देगा।"
क्योंकि अगर कोई अपनों और ख़ासकर अपने घरवालों की फ़िकर न करे तो उसने अपने ईमान का इनकार कर दिया। ऐसा शख़्स ग़ैरईमानदारों से बदतर है।
लेकिन अगर रब की ख़िदमत करना आपको बुरा लगे तो आज ही फ़ैसला करें कि किसकी ख़िदमत करेंगे, उन देवताओं की जिनकी पूजा आपके बापदादा ने दरियाए-फ़ुरात के पार की या अमोरियों के देवताओं की जिनके मुल्क में आप रह रहे हैं। लेकिन जहाँ तक मेरा और मेरे ख़ानदान का ताल्लुक़ है हम रब ही की ख़िदमत करेंगे।"
इसलिए मर्द अपने माँ-बाप को छोड़कर अपनी बीवी के साथ पैवस्त हो जाता है, और वह दोनों एक हो जाते हैं।
वालिदैन को उनके बच्चों के जरायम के सबब से सज़ाए-मौत न दी जाए, न बच्चों को उनके वालिदैन के जरायम के सबब से। अगर किसी को सज़ाए-मौत देनी हो तो उस गुनाह के सबब से जो उसने ख़ुद किया है।