O pão da vida
Jesus se declarou o Pão da Vida — o alimento espiritual que satisfaz a fome mais profunda da alma humana. Quem come deste pão viverá para sempre.
Eu sou o Pão da Vida
Jesus disse: 'Eu sou o pão da vida; quem vem a mim nunca terá fome.' Ele é o sustento que sacia a alma eternamente.
यीशु नै उनतै कह्या, "जीवन की रोट्टी मै सूं: जो मेरै धोरै आवैगा, वो कदे भूक्खा कोनी रहवैगा, अर जो कोए मेरै पै बिश्वास करैगा, वो कदे तिसाया कोनी होवैगा।
जीवन की रोट्टी मै सूं।
इसपै यहूदी उसपै बिरड़ाण लागगे, क्यूँके उसनै कह्या था, "जो रोट्टी सुर्ग तै उतरी, वा मै सूं।"
उस खाणे खात्तर मेहनत ना करो जो सड़ जावै सै, पर उस खाणे खात्तर जतन करो जो कदे खराब न्ही होंदा अर अनन्त जीवन देवै सै, मै माणस का बेट्टा यो खाणा थारे ताहीं देऊँगा, क्यूँके पिता परमेसवर नै मेरे ताहीं इसा करण का हक दिया सै।
O pão que dá vida ao mundo
Jesus é o pão vivo que desceu do céu. Quem come da sua carne e bebe do seu sangue tem a vida eterna e será ressuscitado no último dia.
जीवन की रोट्टी जो सुर्ग तै उतरी सै, मै सूं। जै कोए इस रोट्टी म्ह तै खावै, तो सारी हाण जिन्दा रहवैगा, अर जो रोट्टी मै दुनिया कै जीवन खात्तर दियुँगा, वो मेरा माँस सै।
यीशु नै उन ताहीं कह्या, "मै थारैताहीं साच्ची-साच कहूँ सूं, के जिब ताहीं थम मुझ माणस कै बेट्टे का माँस ना खाओ, अर मेरा लहू ना पियो, थारे म्ह जीवन कोनी।
यीशु नै उस ताहीं जवाब दिया, "मै ए वो राह अर सच अर अनन्त जीवन सूं, बिना मेरै जरिये कोए पिता धोरै कोनी पोहच सकदा।
Saciar a fome da alma
Bem-aventurados os que têm fome e sede de justiça, porque serão fartos. Nem só de pão vive o homem, mas de toda palavra que sai da boca de Deus.
धन्य सै वे, जो धार्मिकता का जीवन जीण खात्तर भूखे अर तिसाए सै, क्यूँके वे परमेसवर के जरिये छिकाए जावैंगे।
यीशु नै जवाब दिया: "पवित्र ग्रन्थ म्ह लिख्या सै,
‘माणस सिर्फ रोट्टी तै ए न्ही, पर परमेसवर के हरेक वचन तै जो उसनै मान्नै सै, जिन्दा रह्वैगा।’"
"इस करकै मै थमनै कहूँ सूं के अपणे जीवन के खात्तर या चिंता ना करियो के हम के खावांगें अर के पीवागें, अर ना अपणी देह के खात्तर के पैहरागें। के जीवन खाणे तै, के देह लत्यां तै बढ़कै कोन्या? अकास के पंछियाँ नै देक्खों! वे ना बोवै सै, ना काटै सै, अर ना कुठले (गोदाम) म्ह कठ्ठा करै सै, फेर भी थारा सुर्गीय पिता उन ताहीं खुवावै सै। के थम पंछियाँ तै घणे कीमती कोनी?