As 10 parábolas mais importantes de Jesus
Jesus ensinou lições profundas por meio de parábolas, histórias curtas e simbólicas que comunicam verdades espirituais. Cada parábola tem um significado especial e atemporal, revelando o caráter de Deus e ensinando como viver como cristãos. Aqui estão 10 das parábolas mais marcantes e suas lições:
1. Parábola do Semeador (Mateus 13:3-9)
फिर उसने उन्हें बहुत-सी बातें तमसीलों में सुनाईं।
"एक किसान बीज बोने के लिए निकला। जब बीज इधर-उधर बिखर गया तो कुछ दाने रास्ते पर गिरे और परिंदों ने आकर उन्हें चुग लिया। कुछ पथरीली ज़मीन पर गिरे जहाँ मिट्टी की कमी थी। वह जल्द उग आए क्योंकि मिट्टी गहरी नहीं थी। लेकिन जब सूरज निकला तो पौदे झुलस गए और चूँकि वह जड़ न पकड़ सके इसलिए सूख गए। कुछ ख़ुदरौ काँटेदार पौदों के दरमियान भी गिरे। वहाँ वह उगने तो लगे, लेकिन ख़ुदरौ पौदों ने साथ साथ बढ़कर उन्हें फलने फूलने न दिया। चुनाँचे वह भी ख़त्म हो गए। लेकिन ऐसे दाने भी थे जो ज़रख़ेज़ ज़मीन में गिरे और बढ़ते बढ़ते तीस गुना, साठ गुना बल्कि सौ गुना तक ज़्यादा फल लाए। जो सुन सकता है वह सुन ले!"
A parábola do semeador fala sobre a receptividade das pessoas à Palavra de Deus. Cada tipo de solo representa diferentes maneiras de receber e aplicar o Evangelho em nossas vidas. Somente um coração fértil e comprometido pode dar frutos espirituais abundantes.
2. O Bom Samaritano (Lucas 10:25-37)
नेक सामरी की तमसील
एक मौक़े पर शरीअत का एक आलिम ईसा को फँसाने की ख़ातिर खड़ा हुआ। उसने पूछा, "उस्ताद, मैं क्या क्या करने से मीरास में अबदी ज़िंदगी पा सकता हूँ?"
ईसा ने उससे कहा, "शरीअत में क्या लिखा है? तू उसमें क्या पढ़ता है?"
आदमी ने जवाब दिया, "‘रब अपने ख़ुदा से अपने पूरे दिल, अपनी पूरी जान, अपनी पूरी ताक़त और अपने पूरे ज़हन से प्यार करना।’ और ‘अपने पड़ोसी से वैसी मुहब्बत रखना जैसी तू अपने आपसे रखता है’।"
ईसा ने कहा, "तूने ठीक जवाब दिया। ऐसा ही कर तो ज़िंदा रहेगा।"
लेकिन आलिम ने अपने आपको दुरुस्त साबित करने की ग़रज़ से पूछा, "तो मेरा पड़ोसी कौन है?"
ईसा ने जवाब में कहा, "एक आदमी यरूशलम से यरीहू की तरफ़ जा रहा था कि वह डाकुओं के हाथों में पड़ गया। उन्होंने उसके कपड़े उतारकर उसे ख़ूब मारा और अधमुआ छोड़कर चले गए। इत्तफ़ाक़ से एक इमाम भी उसी रास्ते पर यरीहू की तरफ़ चल रहा था। लेकिन जब उसने ज़ख़मी आदमी को देखा तो रास्ते की परली तरफ़ होकर आगे निकल गया। लावी क़बीले का एक ख़ादिम भी वहाँ से गुज़रा। लेकिन वह भी रास्ते की परली तरफ़ से आगे निकल गया। फिर सामरिया का एक मुसाफ़िर वहाँ से गुज़रा। जब उसने ज़ख़मी आदमी को देखा तो उसे उस पर तरस आया। वह उसके पास गया और उसके ज़ख़मों पर तेल और मै लगाकर उन पर पट्टियाँ बाँध दीं। फिर उसको अपने गधे पर बिठाकर सराय तक ले गया। वहाँ उसने उस की मज़ीद देख-भाल की। अगले दिन उसने चाँदी के दो सिक्के निकालकर सराय के मालिक को दिए और कहा, ‘इसकी देख-भाल करना। अगर ख़र्चा इससे बढ़कर हुआ तो मैं वापसी पर अदा कर दूँगा’।"
फिर ईसा ने पूछा, "अब तेरा क्या ख़याल है, डाकुओं की ज़द में आनेवाले आदमी का पड़ोसी कौन था? इमाम, लावी या सामरी?"
आलिम ने जवाब दिया, "वह जिसने उस पर रहम किया।"
ईसा ने कहा, "बिलकुल ठीक। अब तू भी जाकर ऐसा ही कर।"
Essa parábola nos ensina sobre o amor ao próximo, independentemente de raça ou religião. O samaritano ajudou um desconhecido, mostrando que a verdadeira fé se revela no amor ao próximo.
3. A Ovelha Perdida (Lucas 15:4-7)
"फ़र्ज़ करो कि तुममें से किसी की सौ भेड़ें हैं। लेकिन एक गुम हो जाती है। अब मालिक क्या करेगा? क्या वह बाक़ी 99 भेड़ें खुले मैदान में छोड़कर गुमशुदा भेड़ को ढूँडने नहीं जाएगा? ज़रूर जाएगा, बल्कि जब तक उसे वह भेड़ मिल न जाए वह उस की तलाश में रहेगा। फिर वह ख़ुश होकर उसे अपने कंधों पर उठा लेगा। यों चलते चलते वह अपने घर पहुँच जाएगा और वहाँ अपने दोस्तों और हमसायों को बुलाकर उनसे कहेगा, ‘मेरे साथ ख़ुशी मनाओ! क्योंकि मुझे अपनी खोई हुई भेड़ मिल गई है।’ मैं तुमको बताता हूँ कि आसमान पर बिलकुल इसी तरह ख़ुशी मनाई जाएगी जब एक ही गुनाहगार तौबा करेगा। और यह ख़ुशी उस ख़ुशी की निसबत ज़्यादा होगी जो उन 99 अफ़राद के बाइस मनाई जाएगी जिन्हें तौबा करने की ज़रूरत ही नहीं थी।
Deus é como o pastor que busca incessantemente uma ovelha perdida. Essa parábola revela o amor incansável de Deus pelos pecadores, celebrando a alegria no céu quando alguém se arrepende.
4. O Filho Pródigo (Lucas 15:11-32)
गुमशुदा बेटा
ईसा ने अपनी बात जारी रखी। "किसी आदमी के दो बेटे थे। इनमें से छोटे ने बाप से कहा, ‘ऐ बाप, मीरास का मेरा हिस्सा दे दें।’ इस पर बाप ने दोनों में अपनी मिलकियत तक़सीम कर दी। थोड़े दिनों के बाद छोटा बेटा अपना सारा सामान समेटकर अपने साथ किसी दूर-दराज़ मुल्क में ले गया। वहाँ उसने ऐयाशी में अपना पूरा मालो-मता उड़ा दिया। सब कुछ ज़ाया हो गया तो उस मुल्क में सख़्त काल पड़ा। अब वह ज़रूरतमंद होने लगा। नतीजे में वह उस मुल्क के किसी बाशिंदे के हाँ जा पड़ा जिसने उसे सुअरों को चराने के लिए अपने खेतों में भेज दिया। वहाँ वह अपना पेट उन फलियों से भरने की शदीद ख़ाहिश रखता था जो सुअर खाते थे, लेकिन उसे इसकी भी इजाज़त न मिली। फिर वह होश में आया। वह कहने लगा, मेरे बाप के कितने मज़दूरों को कसरत से खाना मिलता है जबकि मैं यहाँ भूका मर रहा हूँ। मैं उठकर अपने बाप के पास वापस चला जाऊँगा और उससे कहूँगा, ‘ऐ बाप, मैंने आसमान का और आपका गुनाह किया है। अब मैं इस लायक़ नहीं रहा कि आपका बेटा कहलाऊँ। मेहरबानी करके मुझे अपने मज़दूरों में रख लें।’ फिर वह उठकर अपने बाप के पास वापस चला गया।
लेकिन वह घर से अभी दूर ही था कि उसके बाप ने उसे देख लिया। उसे तरस आया और वह भागकर बेटे के पास आया और गले लगाकर उसे बोसा दिया। बेटे ने कहा, ‘ऐ बाप, मैंने आसमान का और आपका गुनाह किया है। अब मैं इस लायक़ नहीं रहा कि आपका बेटा कहलाऊँ।’ लेकिन बाप ने अपने नौकरों को बुलाया और कहा, ‘जल्दी करो, बेहतरीन सूट लाकर इसे पहनाओ। इसके हाथ में अंगूठी और पाँवों में जूते पहना दो। फिर मोटा-ताज़ा बछड़ा लाकर उसे ज़बह करो ताकि हम खाएँ और ख़ुशी मनाएँ, क्योंकि यह मेरा बेटा मुरदा था अब ज़िंदा हो गया है, गुम हो गया था अब मिल गया है।’ इस पर वह ख़ुशी मनाने लगे।
इस दौरान बाप का बड़ा बेटा खेत में था। अब वह घर लौटा। जब वह घर के क़रीब पहुँचा तो अंदर से मौसीक़ी और नाचने की आवाज़ें सुनाई दीं। उसने किसी नौकर को बुलाकर पूछा, ‘यह क्या हो रहा है?’ नौकर ने जवाब दिया, ‘आपका भाई आ गया है और आपके बाप ने मोटा-ताज़ा बछड़ा ज़बह करवाया है, क्योंकि उसे अपना बेटा सहीह-सलामत वापस मिल गया है।’
यह सुनकर बड़ा बेटा ग़ुस्से हुआ और अंदर जाने से इनकार कर दिया। फिर बाप घर से निकलकर उसे समझाने लगा। लेकिन उसने जवाब में अपने बाप से कहा, ‘देखें, मैंने इतने साल आपकी ख़िदमत में सख़्त मेहनत-मशक़्क़त की है और एक दफ़ा भी आपकी मरज़ी की ख़िलाफ़वरज़ी नहीं की। तो भी आपने मुझे इस पूरे अरसे में एक छोटा बकरा भी नहीं दिया कि उसे ज़बह करके अपने दोस्तों के साथ ज़ियाफ़त करता। लेकिन ज्योंही आपका यह बेटा आया जिसने आपकी दौलत कसबियों में उड़ा दी, आपने उसके लिए मोटा-ताज़ा बछड़ा ज़बह करवाया।’ बाप ने जवाब दिया, ‘बेटा, आप तो हर वक़्त मेरे पास रहे हैं, और जो कुछ मेरा है वह आप ही का है। लेकिन अब ज़रूरी था कि हम जशन मनाएँ और ख़ुश हों। क्योंकि आपका यह भाई जो मुरदा था अब ज़िंदा हो गया है, जो गुम हो गया था अब मिल गया है’।"
A parábola do filho pródigo fala sobre o perdão e o amor incondicional de Deus por Seus filhos, mesmo quando se desviam.
5. A Pérola de Grande Valor (Mateus 13:45-46)
मोती की तमसील
नीज़, आसमान की बादशाही ऐसे सौदागर की मानिंद है जो अच्छे मोतियों की तलाश में था। जब उसे एक निहायत क़ीमती मोती के बारे में मालूम हुआ तो वह चला गया, अपनी तमाम मिलकियत फ़रोख़्त कर दी और उस मोती को ख़रीद लिया।
Jesus ensina que o Reino de Deus é o bem mais precioso e devemos estar dispostos a renunciar tudo para possuí-lo.
6. O Fariseu e o Publicano (Lucas 18:9-14)
फ़रीसी और टैक्स लेनेवाले की तमसील
बाज़ लोग मौजूद थे जो अपनी रास्तबाज़ी पर भरोसा रखते और दूसरों को हक़ीर जानते थे। उन्हें ईसा ने यह तमसील सुनाई, "दो आदमी बैतुल-मुक़द्दस में दुआ करने आए। एक फ़रीसी था और दूसरा टैक्स लेनेवाला।
फ़रीसी खड़ा होकर यह दुआ करने लगा, ‘ऐ ख़ुदा, मैं तेरा शुक्र करता हूँ कि मैं बाक़ी लोगों की तरह नहीं हूँ। न मैं डाकू हूँ, न बेइनसाफ़, न ज़िनाकार। मैं इस टैक्स लेनेवाले की मानिंद भी नहीं हूँ। मैं हफ़ते में दो मरतबा रोज़ा रखता हूँ और तमाम आमदनी का दसवाँ हिस्सा तेरे लिए मख़सूस करता हूँ।’
लेकिन टैक्स लेनेवाला दूर ही खड़ा रहा। उसने अपनी आँखें आसमान की तरफ़ उठाने तक की जुर्रत न की बल्कि अपनी छाती पीट पीटकर कहने लगा, ‘ऐ ख़ुदा, मुझ गुनाहगार पर रहम कर!’ मैं तुमको बताता हूँ कि जब दोनों अपने अपने घर लौटे तो फ़रीसी नहीं बल्कि यह आदमी अल्लाह के नज़दीक रास्तबाज़ ठहरा। क्योंकि जो भी अपने आपको सरफ़राज़ करे उसे पस्त किया जाएगा और जो अपने आपको पस्त करे उसे सरफ़राज़ किया जाएगा।"
Essa parábola nos lembra que Deus valoriza um coração humilde e arrependido, em contraste com a arrogância espiritual. O publicano, ao reconhecer seus pecados, foi justificado diante de Deus.
7. Os Talentos (Mateus 25:14-30)
तीन नौकरों की तमसील
उस वक़्त आसमान की बादशाही यों होगी : एक आदमी को बैरूने-मुल्क जाना था। उसने अपने नौकरों को बुलाकर अपनी मिलकियत उनके सुपुर्द कर दी। पहले को उसने सोने के 5,000 सिक्के दिए, दूसरे को 2,000 और तीसरे को 1,000। हर एक को उसने उस की क़ाबिलियत के मुताबिक़ पैसे दिए। फिर वह रवाना हुआ। जिस नौकर को 5,000 सिक्के मिले थे उसने सीधा जाकर उन्हें किसी कारोबार में लगाया। इससे उसे मज़ीद 5,000 सिक्के हासिल हुए। इसी तरह दूसरे को भी जिसे 2,000 सिक्के मिले थे मज़ीद 2,000 सिक्के हासिल हुए। लेकिन जिस आदमी को 1,000 सिक्के मिले थे वह चला गया और कहीं ज़मीन में गढ़ा खोदकर अपने मालिक के पैसे उसमें छुपा दिए।
बड़ी देर के बाद उनका मालिक लौट आया। जब उसने उनके साथ हिसाब-किताब किया तो पहला नौकर जिसे 5,000 सिक्के मिले थे मज़ीद 5,000 सिक्के लेकर आया। उसने कहा, ‘जनाब, आपने 5,000 सिक्के मेरे सुपुर्द किए थे। यह देखें, मैंने मज़ीद 5,000 सिक्के हासिल किए हैं।’ उसके मालिक ने जवाब दिया, ‘शाबाश, मेरे अच्छे और वफ़ादार नौकर। तुम थोड़े में वफ़ादार रहे, इसलिए मैं तुम्हें बहुत कुछ पर मुक़र्रर करूँगा। अंदर आओ और अपने मालिक की ख़ुशी में शरीक हो जाओ।’
फिर दूसरा नौकर आया जिसे 2,000 सिक्के मिले थे। उसने कहा, ‘जनाब, आपने 2,000 सिक्के मेरे सुपुर्द किए थे। यह देखें, मैंने मज़ीद 2,000 सिक्के हासिल किए हैं।’ उसके मालिक ने जवाब दिया, ‘शाबाश, मेरे अच्छे और वफ़ादार नौकर। तुम थोड़े में वफ़ादार रहे, इसलिए मैं तुम्हें बहुत कुछ पर मुक़र्रर करूँगा। अंदर आओ और अपने मालिक की ख़ुशी में शरीक हो जाओ।’
फिर तीसरा नौकर आया जिसे 1,000 सिक्के मिले थे। उसने कहा, ‘जनाब, मैं जानता था कि आप सख़्त आदमी हैं। जो बीज आपने नहीं बोया उस की फ़सल आप काटते हैं और जो कुछ आपने नहीं लगाया उस की पैदावार जमा करते हैं। इसलिए मैं डर गया और जाकर आपके पैसे ज़मीन में छुपा दिए। अब आप अपने पैसे वापस ले सकते हैं।’
उसके मालिक ने जवाब दिया, ‘शरीर और सुस्त नौकर! क्या तू जानता था कि जो बीज मैंने नहीं बोया उस की फ़सल काटता हूँ और जो कुछ मैंने नहीं लगाया उस की पैदावार जमा करता हूँ? तो फिर तूने मेरे पैसे बैंक में क्यों न जमा करा दिए? अगर ऐसा करता तो वापसी पर मुझे कम अज़ कम वह पैसे सूद समेत मिल जाते।’ यह कहकर मालिक दूसरों से मुख़ातिब हुआ, ‘यह पैसे इससे लेकर उस नौकर को दे दो जिसके पास 10,000 सिक्के हैं। क्योंकि जिसके पास कुछ है उसे और दिया जाएगा और उसके पास कसरत की चीज़ें होंगी। लेकिन जिसके पास कुछ नहीं है उससे वह भी छीन लिया जाएगा जो उसके पास है। अब इस बेकार नौकर को निकालकर बाहर की तारीकी में फेंक दो, वहाँ जहाँ लोग रोते और दाँत पीसते रहेंगे।’
Nesta história, Jesus ensina sobre a responsabilidade de usar bem os dons e recursos que Deus nos confiou. A fidelidade nas pequenas coisas abre portas para bênçãos maiores.
8. O Rico e Lázaro (Lucas 16:19-31)
अमीर आदमी और लाज़र
एक अमीर आदमी का ज़िक्र है जो अरग़वानी रंग के कपड़े और नफ़ीस कतान पहनता और हर रोज़ ऐशो-इशरत में गुज़ारता था। अमीर के गेट पर एक ग़रीब आदमी पड़ा था जिसके पूरे जिस्म पर नासूर थे। उसका नाम लाज़र था और उस की बस एक ही ख़ाहिश थी कि वह अमीर की मेज़ से गिरे हुए टुकड़े खाकर सेर हो जाए। कुत्ते उसके पास आकर उसके नासूर चाटते थे।
फिर ऐसा हुआ कि ग़रीब आदमी मर गया। फ़रिश्तों ने उसे उठाकर इब्राहीम की गोद में बिठा दिया। अमीर आदमी भी फ़ौत हुआ और दफ़नाया गया। वह जहन्नुम में पहुँचा। अज़ाब की हालत में उसने अपनी नज़र उठाई तो दूर से इब्राहीम और उस की गोद में लाज़र को देखा। वह पुकार उठा, ‘ऐ मेरे बाप इब्राहीम, मुझ पर रहम करें। मेहरबानी करके लाज़र को मेरे पास भेज दें ताकि वह अपनी उँगली को पानी में डुबोकर मेरी ज़बान को ठंडा करे, क्योंकि मैं इस आग में तड़पता हूँ।’
लेकिन इब्राहीम ने जवाब दिया, ‘बेटा, याद रख कि तुझे अपनी ज़िंदगी में बेहतरीन चीज़ें मिल चुकी हैं जबकि लाज़र को बदतरीन चीज़ें। लेकिन अब उसे आराम और तसल्ली मिल गई है जबकि तुझे अज़ियत। नीज़, हमारे और तुम्हारे दरमियान एक वसी ख़लीज क़ायम है। अगर कोई चाहे भी तो उसे पार करके यहाँ से तुम्हारे पास नहीं जा सकता, न वहाँ से कोई यहाँ आ सकता है।’ अमीर आदमी ने कहा, ‘मेरे बाप, फिर मेरी एक और गुज़ारिश है, मेहरबानी करके लाज़र को मेरे वालिद के घर भेज दें। मेरे पाँच भाई हैं। वह वहाँ जाकर उन्हें आगाह करे, ऐसा न हो कि उनका अंजाम भी यह अज़ियतनाक मक़ाम हो।’
लेकिन इब्राहीम ने जवाब दिया, ‘उनके पास मूसा की तौरेत और नबियों के सहीफ़े तो हैं। वह उनकी सुनें।’ अमीर ने अर्ज़ की, ‘नहीं, मेरे बाप इब्राहीम, अगर कोई मुरदों में से उनके पास जाए तो फिर वह ज़रूर तौबा करेंगे।’ इब्राहीम ने कहा, ‘अगर वह मूसा और नबियों की नहीं सुनते तो वह उस वक़्त भी क़ायल नहीं होंगे जब कोई मुरदों में से जी उठकर उनके पास जाएगा’।"
A parábola alerta sobre as consequências de negligenciar os necessitados e viver para si mesmo. Também destaca a realidade do julgamento e da vida após a morte.
9. O Joio e o Trigo (Mateus 13:24-30)
ख़ुदरौ पौदों की तमसील
ईसा ने उन्हें एक और तमसील सुनाई। "आसमान की बादशाही उस किसान से मुताबिक़त रखती है जिसने अपने खेत में अच्छा बीज बो दिया। लेकिन जब लोग सो रहे थे तो उसके दुश्मन ने आकर अनाज के पौदों के दरमियान ख़ुदरौ पौदों का बीज बो दिया। फिर वह चला गया। जब अनाज फूट निकला और फ़सल पकने लगी तो ख़ुदरौ पौदे भी नज़र आए। नौकर मालिक के पास आए और कहने लगे, ‘जनाब, क्या आपने अपने खेत में अच्छा बीज नहीं बोया था? तो फिर यह ख़ुदरौ पौदे कहाँ से आ गए हैं?’
उसने जवाब दिया, ‘किसी दुश्मन ने यह कर दिया है।’
नौकरों ने पूछा, ‘क्या हम जाकर उन्हें उखाड़ें?’
‘नहीं,’ उसने कहा। ‘ऐसा न हो कि ख़ुदरौ पौदों के साथ साथ तुम अनाज के पौदे भी उखाड़ डालो। उन्हें फ़सल की कटाई तक मिलकर बढ़ने दो। उस वक़्त मैं फ़सल की कटाई करनेवालों से कहूँगा कि पहले ख़ुदरौ पौदों को चुन लो और उन्हें जलाने के लिए गठों में बाँध लो। फिर ही अनाज को जमा करके गोदाम में लाओ’।"
Essa história simboliza o bem e o mal coexistindo no mundo até o julgamento final, quando Deus fará a separação entre os justos e os ímpios.
10. As Dez Virgens (Mateus 25:1-13)
दस कुँवारियों की तमसील
उस वक़्त आसमान की बादशाही दस कुँवारियों से मुताबिक़त रखेगी जो अपने चराग़ लेकर दूल्हे को मिलने के लिए निकलें। उनमें से पाँच नासमझ थीं और पाँच समझदार। नासमझ कुँवारियों ने अपने पास चराग़ों के लिए फ़ाल्तू तेल न रखा। लेकिन समझदार कुँवारियों ने कुप्पी में तेल डालकर अपने साथ ले लिया। दूल्हे को आने में बड़ी देर लगी, इसलिए वह सब ऊँघ ऊँघकर सो गईं।
आधी रात को शोर मच गया, ‘देखो, दूल्हा पहुँच रहा है, उसे मिलने के लिए निकलो!’ इस पर तमाम कुँवारियाँ जाग उठीं और अपने चराग़ों को दुरुस्त करने लगीं। नासमझ कुँवारियों ने समझदार कुँवारियों से कहा, ‘अपने तेल में से हमें भी कुछ दे दो। हमारे चराग़ बुझनेवाले हैं।’ दूसरी कुँवारियों ने जवाब दिया, ‘नहीं, ऐसा न हो कि न सिर्फ़ तुम्हारे लिए बल्कि हमारे लिए भी तेल काफ़ी न हो। दुकान पर जाकर अपने लिए ख़रीद लो।’ चुनाँचे नासमझ कुँवारियाँ चली गईं। लेकिन इस दौरान दूल्हा पहुँच गया। जो कुँवारियाँ तैयार थीं वह उसके साथ शादी हाल में दाख़िल हुईं। फिर दरवाज़े को बंद कर दिया गया।
कुछ देर के बाद बाक़ी कुँवारियाँ आईं और चिल्लाने लगीं, ‘जनाब! हमारे लिए दरवाज़ा खोल दें।’ लेकिन उसने जवाब दिया, ‘यक़ीन जानो, मैं तुमको नहीं जानता।’
इसलिए चौकस रहो, क्योंकि तुम इब्ने-आदम के आने का दिन या वक़्त नहीं जानते।
Jesus enfatiza a necessidade de estarmos sempre preparados espiritualmente para Sua segunda vinda, pois ninguém sabe o momento exato.
As parábolas de Jesus continuam sendo fontes ricas de sabedoria e direção para a vida cristã. Ao aplicarmos esses ensinamentos, nos aproximamos mais de Deus e de Sua vontade.
Se este artigo te ajudou, faça sua parte e compartilhe a Palavra de Deus com aqueles que você ama.