O poder da decisão na Bíblia: escolhas e consequências
O que a Bíblia ensina sobre o poder da decisão
A Bíblia ensina que o ser humano tem a capacidade real de tomar decisões e responde diante de Deus por cada uma delas. Esse poder de escolha não significa controle sobre o futuro, mas a responsabilidade moral de definir a quem servir e qual caminho seguir.
Em Josué 24:15, Josué reúne as tribos de Israel e exige um posicionamento claro, mostrando que a fé exige uma escolha deliberada:
पर यदि यहोवा के सेवा करई तुमन ला बने नइं लगय, त आज तुमन अपन बर चुन लव कि तुमन काकर सेवा करहू, ओ देवतामन के, जेमन के सेवा तुम्हर पुरखामन फरात नदी के ओ पार म करत रिहिन, या फेर अमोरीमन के देवतामन के, जेमन के देस म तुमन रहत हव। पर जहां तक मोर अऊ मोर परिवार के बात ए, हमन यहोवा के ही सेवा करबो।"(यहोसू 24:15)
यहोसू ह ओमन ला कहिस, "तुमन खुदेच अपन गवाह अव कि तुमन यहोवा के सेवा करई के बात ला चुन ले हव।"
ओमन जबाब दीन, "हव, हमन गवाह अन।"(यहोसू 24:22)
A omissão também é uma forma de decisão. A advertência à igreja de Laodiceia deixa claro que a tentativa de neutralidade espiritual é reprovada por Deus:
मेंह तुम्हर काममन ला जानत हंव। तुमन न तो ठंडा हवव अऊ न तात। बने होतिस कि तुमन या तो ठंडा रहितेव या फेर तात। काबरकि तुमन कुनकुना हवव, न ठंडा अऊ न तात; एकरसेति मेंह तुमन ला अपन मुहूं ले उछर दूहूं।(दरसन 3:15,16)
Toda escolha produz consequências morais e espirituais
As Escrituras não separam a liberdade de escolher das consequências que ela produz. Cada ato de obediência ou de desobediência constrói um desfecho na vida presente e na eternidade. Por isso, o chamado bíblico ao arrependimento é sempre urgente:
"एकरसेति, हे इसरायलीमन, मेंह तुमन म ले हर एक मनखे के नियाय ओकर खुद के चालचलन के मुताबिक करहूं, परमपरधान यहोवा ह घोसना करत हे। पछताप करव! अपन जम्मो पाप ला छोंड़ दव; तब पाप ह तुम्हर पतन होय के कारन नइं होही। अपन करे गय जम्मो अपराध ले दूरिहा हो जावव अऊ एक नवां हिरदय अऊ एक नवां आतमा ले लव। हे इसरायल के मनखेमन, तुम्हर मिरतू काबर होवय? काबरकि मोला काकरो मिरतू ले खुसी नइं होवय, परमपरधान यहोवा ह घोसना करत हे। एकरसेति पछताप करव अऊ जीयत रहव!(यहेजकेल 18:30-32)
परमेसर ह हर एक मनखे ला ओकर काम के मुताबिक फर दीही। जऊन मन धीरज धरके बने काम करथें अऊ महिमा, आदर अऊ अमरता के खोज म रहिथें, ओमन ला ओह सदाकाल के जिनगी दीही। पर जऊन मन सुवारथी अंय अऊ सच्चई ला नइं मानंय, पर बुरई के पाछू चलथें, ओमन ऊपर परमेसर के कोप अऊ कोरोध ह भड़कही।(रोमीमन 2:6-8)
A resistência à orientação de Deus endurece o coração e traz juízo, como Estêvão alertou aos líderes religiosos em Atos 7:51. Em contraste, a perseverança na decisão correta sustenta o crente diante das adversidades:
"हे ढीठ मनखेमन! तुमन हिरदय म परमेसर के संदेस ला सुने नइं चाहत हव। तुमन हमेसा पबितर आतमा के बिरोध करथव, जइसने तुम्हर पुरखामन करत रिहिन।(प्रेरितमन के काम 7:51)
एकरसेति अपन भरोसा ला झन छोंड़व, काबरकि तुमन ला एकर एक बड़े ईनाम मिलही।
तुमन ला धीरज धरई जरूरी ए, ताकि जब तुमन परमेसर के ईछा ला पूरा कर लेवव, त तुमन ला ओ ईनाम मिलय, जेकर वायदा परमेसर ह तुम्हर ले करे हवय। काबरकि परमेसर के बचन ह कहिथे,
"अब बहुंते कम समय बचे हवय;
जऊन ह अवइया हवय,
ओह आही अऊ ओह देरी नइं करय।"
अऊ,
"पर मोर धरमी मनखे ह बिसवास के दुवारा जीयत रहिही।
अऊ कहूं ओह पाछू हटथे,
त मेंह ओकर ले खुस नइं होवंव।"
पर हमन ओ मनखे नो हन, जऊन मन पाछू हट जाथें अऊ नास हो जाथें, पर हमन ओ मनखे अन, जऊन मन बिसवास करथें अऊ बचाय जाथें।(इबरीमन 10:35-39)
A soberania de Deus e os limites da vontade humana
O ser humano planeja e decide, mas a autoridade final pertence ao Criador. O poder de decisão do homem atua dentro da soberania de Deus, e a verdadeira sabedoria consiste em submeter os próprios planos à vontade divina antes de agir:
अपन जम्मो काम ला यहोवा ला सऊंप दव,
अऊ ओह तुम्हर योजना ला स्थापित करही।(नीतिबचन 16:3)
परची ह कोरा म डाले जाथे,
पर येकर हर एक निरनय ह यहोवा कोति ले होथे।(नीतिबचन 16:33)
मनखे ह अपन मन म बहुंत योजना बनाथे,
पर येह सिरिप यहोवा के ही उदेस्य अय, जऊन ह पूरा होथे।(नीतिबचन 19:21)
Quando a decisão humana está alinhada ao propósito do Senhor, a determinação deixa de ser presunção e se torna confiança inabalável:
काबरकि परमपरधान यहोवा ह मोर सहायता करथे,
मेंह कलंकित नइं होवंव।
एकरसेति मेंह अपन चेहरा ला चकमक पथरा के सहीं कड़ा कर ले हंव,
अऊ मेंह जानत हंव कि मोला लजाय बर नइं पड़य।(यसायाह 50:7)
Como tomar decisões alinhadas à vontade de Deus
Para quem precisa tomar decisões, a Bíblia estabelece uma ordem prática: disposição sincera para obedecer, arrependimento contínuo e submissão diária ao Senhor. A clareza quanto ao que fazer nasce da fidelidade àquilo que Deus já revelou:
जऊन ह परमेसर के ईछा म चले बर चाहथे, ओह जान डारही कि मोर उपदेस ह परमेसर कोति ले आथे या फेर मेंह अपन खुद के अधिकार ले गोठियावत हंव।(यूहन्ना 7:17)
ओमन मोर मनखे होहीं, अऊ मेंह ओमन के परमेसर होहूं। मेंह ओमन ला एक ही मन अऊ एक ही चालचलन दूहूं, ताकि ओमन हमेसा मोर भय मानंय अऊ ओमन के जिनगी अऊ ओमन के बाद ओमन के लइकामन के जिनगी घलो सही-सलामत बितय।(यरमियाह 32:38,39)
पतरस ह ओमन ला कहिस, "अपन पाप के पछताप करव, अऊ तुमन म ले, हर एक झन अपन-अपन पाप के छेमा खातिर यीसू मसीह के नांव म बतिसमा लेवव, अऊ तुमन पबितर आतमा के दान पाहू।(प्रेरितमन के काम 2:38)
एकरसेति तुमन परमेसर के बस म रहव, अऊ सैतान के सामना करव, त सैतान ह तुम्हर करा ले भाग जाही। परमेसर के लकठा म आवव, त ओह घलो तुम्हर लकठा म आही। हे पापी मनखेमन, अपन हांथ ला धोवव, अऊ हे ढोंगी मनखेमन, अपन हिरदय ला सुध करव।(याकूब 4:7,8)
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