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Preservação das escrituras

Por Bíblia Online

A Palavra de Deus permanece para sempre. As Escrituras foram preservadas por Deus ao longo dos milênios para instrução, consolação e guia de todas as gerações.

A Palavra eterna

Céus e terra passarão, mas as palavras de Deus jamais passarão. Sua Palavra é eterna, infalível e imutável — a verdade que sustenta tudo.

आकऔर टल े, परनशबकभटलेंे।

ोंि ैं सच कहतूँ, ि जब तक आकऔर टल ँ, तब तक यवसएक ििनहीं टला।

ी, और ै; परनहमपरमवर वचन सदअटल रहहमपरमवर वचन सदअटल रहा: परमवर वचन दरसतउसकरजरकएवरतिअरसकति उसकरतिएवअपरिवरतनैं। (1 पत. 1:24,25)

ोंि "हर एक समै, और उसकसमै:

ै, और झडै।

परनरभवचन िरहत"

और यह समवचन ें गया। (16:17, 1 . 1:1, यशा. 40:8)

ोंि शवनहीं पर अविपरमवर िऔर सदठहरनवचन नयजनै। ोंि "हर एक समै, और उसकसमै:

ै, और झडै।

परनरभवचन िरहत"

और यह समवचन ें गया। (16:17, 1 . 1:1, यशा. 40:8)

A inspiração divina

Toda Escritura é inspirada por Deus. Homens santos falaram da parte do Senhor, e a Palavra escrita é a expressão fiel da vontade divina.

पर पहलयह ि पविरशभवियदिअपनिरधआधपर नहीं ी। ोंि भवियदमनइचकभनहीं पर भकजन पविआतउभकर परमवर ओर लते।

वभ

ें परमवर वजों ़ा-़ा करकऔर ाँि-ाँि भवियदवकें ी, पर इन अनििों ें हम अपनें ी, िउसनवसिठहरऔर उसउसनि रचै। (1 ि. 8:6, . 1:3) वह उसकमहिरक, और उसकततै, और सब वसअपनमरवचन समलतै: वह ों कर ों पर महमहिमनिा।

और वचन हध; और अनरह और सचपरिकर हमें िा, और हमनउसकऐसमहिी, िएकलमहिा। (1 . 4:9)

ैं नतूँ ि परमवर करतवह सदिरहा; उसमें बढ़ासकतऔर घटसकतै; परमवर ऐसइसलिकरति उसकभय ें।

A Palavra como guia e tesouro

A Palavra de Deus é lâmpada para os pés, espada do Espírito e tesouro para o coração. Guardá-la e meditá-la nos protege do pecado.

ैंवचन अपनदय ें रख ़ा ै,

ि िकरूँ।

ि िकरमहिवरणन

आकपरमवर महिवरणन करतै;

और आकशमणडल उसकहसतकलरगट करतै।

ििें करतै,

और िै।

और ा;

जहाँ उनकशबनहीं ै।

िउनकवर पर ूँगयै,

और उनकवचन जगत तक पहुँगयै।

उनमें उसनिएक मणडप खड़ा िै,

समअपनककिकलतै।

वह रवसमअपनें हरिरवसमअपनें हरिै: ें रवकरनमनसमशल और शकिी।

वह आकएक िकलतै,

और वह उसकसरतक चककर रतै;

और उसकगरनहीं बच ा।

यहयवसखरै, वह बहकर ै;

यहियम िसयैं,

िों िबनैं;

यहउपदयहउपद: उपदशबरयें सहअरै, आजा, आदियम, गदरशन िै। िैं, दय आननिकर ैं;

यहआजिमल ै, वह ों ें

ि आतै;

यहवचन पविै,

उस ाँसमभटें िपर गई,

और िमल गई िमल गई ो: अरआग ें िघलगई

यहउनकरककरा,

उनकइस ों सरवदिबचरखा।

परनकहतै? यह, ि

"वचन िकट ै,

ुँें और मन ें ै," यह वहिवचन ै, हम रचकरतैं।

इसलििनने, और ननमसवचन ै।

परनैं कहतूँ, "उनोंनहीं ा?" सहोंि िै,

"उनकवर पर,

और उनकवचन जगत तक पहुँगए ैं।" (भज. 19:4)

ितनें पहलिगईं, हमिििगईैं ि हम रज और पविरशहन आशरखें।

और आजैं आज झकूँ मन ें बनरहें और इनें अपनल-बचों समझकर िकरना, और घर ें े, पर चलते, टते, उठते, इनकचरिकरना। (इफि. 6:4) और इनें अपनपर िें ाँधना, और ों ें। (मत23:5) और इनें अपने-अपनघर खट और अपनटकों पर िखना।

और मसउस सकपरि परमवर भरप तक परि

यह हमउदरकरपरमवर अचलगतऔर ै, यह हतै, ि सब मनों उदो; और सतभलाँि पहचें। (यहे. 18:23)

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