Preservação das escrituras
A Palavra de Deus permanece para sempre. As Escrituras foram preservadas por Deus ao longo dos milênios para instrução, consolação e guia de todas as gerações.
A Palavra eterna
Céus e terra passarão, mas as palavras de Deus jamais passarão. Sua Palavra é eterna, infalível e imutável — a verdade que sustenta tudo.
आकाश और पृथ्वी टल जाएँगे, परन्तु मेरे शब्द कभी न टलेंगे।
क्योंकि मैं तुम से सच कहता हूँ, कि जब तक आकाश और पृथ्वी टल न जाएँ, तब तक व्यवस्था से एक मात्रा या बिन्दु भी बिना पूरा हुए नहीं टलेगा।
घास तो सूख जाती, और फूल मुर्झा जाता है; परन्तु हमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगाहमारे परमेश्वर का वचन सदैव अटल रहेगा: परमेश्वर का वचन का संदर्भ या तो दासत्व से उसकी प्रजा की रक्षा एवं मोक्ष की प्रतिज्ञा से है या सामान्य अर्थ हो सकता है कि उसकी प्रतिज्ञाएँ दृढ़ एवं अपरिवर्तनीय हैं। । (1 पत. 1:24,25)
क्योंकि "हर एक प्राणी घास के समान है, और उसकी सारी शोभा घास के फूल के समान है:
घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है।
परन्तु प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहता है।"
और यह ही सुसमाचार का वचन है जो तुम्हें सुनाया गया था। (लूका 16:17, 1 यूह. 1:1, यशा. 40:8)
क्योंकि तुम ने नाशवान नहीं पर अविनाशी बीज से परमेश्वर के जीविते और सदा ठहरनेवाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है। क्योंकि "हर एक प्राणी घास के समान है, और उसकी सारी शोभा घास के फूल के समान है:
घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है।
परन्तु प्रभु का वचन युगानुयुग स्थिर रहता है।"
और यह ही सुसमाचार का वचन है जो तुम्हें सुनाया गया था। (लूका 16:17, 1 यूह. 1:1, यशा. 40:8)
A inspiração divina
Toda Escritura é inspirada por Deus. Homens santos falaram da parte do Senhor, e a Palavra escrita é a expressão fiel da vontade divina.
पर पहले यह जान लो कि पवित्रशास्त्र की कोई भी भविष्यद्वाणी किसी की अपने ही विचारधारा के आधार पर पूर्ण नहीं होती। क्योंकि कोई भी भविष्यद्वाणी मनुष्य की इच्छा से कभी नहीं हुई पर भक्त जन पवित्र आत्मा के द्वारा उभारे जाकर परमेश्वर की ओर से बोलते थे।
पुत्र का स्वभाव
पूर्व युग में परमेश्वर ने पूर्वजों से थोड़ा-थोड़ा करके और भाँति-भाँति से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें की, पर इन अन्तिम दिनों में हम से अपने पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उसने सारी वस्तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्टि भी रची है। (1 कुरि. 8:6, यूह. 1:3) वह उसकी महिमा का प्रकाश, और उसके तत्व की छाप है, और सब वस्तुओं को अपनी सामर्थ्य के वचन से सम्भालता है: वह पापों को धोकर ऊँचे स्थानों पर महामहिमन् के दाहिने जा बैठा।
और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण होकर हमारे बीच में डेरा किया, और हमने उसकी ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। (1 यूह. 4:9)
मैं जानता हूँ कि जो कुछ परमेश्वर करता है वह सदा स्थिर रहेगा; न तो उसमें कुछ बढ़ाया जा सकता है और न कुछ घटाया जा सकता है; परमेश्वर ऐसा इसलिए करता है कि लोग उसका भय मानें।
A Palavra como guia e tesouro
A Palavra de Deus é lâmpada para os pés, espada do Espírito e tesouro para o coração. Guardá-la e meditá-la nos protege do pecado.
मैंने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है,
कि तेरे विरुद्ध पाप न करूँ।
सृष्टि द्वारा सृष्टिकर्ता की महिमा का वर्णन
आकाश परमेश्वर की महिमा वर्णन करता है;
और आकाशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट करता है।
दिन से दिन बातें करता है,
और रात को रात ज्ञान सिखाती है।
न तो कोई बोली है और न कोई भाषा;
जहाँ उनका शब्द सुनाई नहीं देता है।
फिर भी उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूँज गया है,
और उनका वचन जगत की छोर तक पहुँच गया है।
उनमें उसने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है,
जो दुल्हे के समान अपने कक्ष से निकलता है।
वह शूरवीर के समान अपनी दौड़ दौड़ने में हर्षित होता हैशूरवीर के समान अपनी दौड़ दौड़ने में हर्षित होता है: दौड़ में प्रवेश करनेवाले मनुष्य के समान कुशल और शक्तिशाली।।
वह आकाश की एक छोर से निकलता है,
और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है;
और उसकी गर्मी से कोई नहीं बच पाता।
यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है;
यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं,
बुद्धिहीन लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं;
यहोवा के उपदेशयहोवा के उपदेश: उपदेश शब्द का प्रयोग में सही अर्थ है, आज्ञा, आदेश या नियम, जो मार्गदर्शन के लिए है। सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं;
यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आँखों में
ज्योति ले आती है;
यहोवा का वचन पवित्र है,
उस चाँदी के समान जो भट्ठी में मिट्टी पर ताई गई,
और सात बार निर्मल की गई होसात बार निर्मल की गई हो: अर्थात् बार बार आग में पिघलाई गई।।
तू ही हे यहोवा उनकी रक्षा करेगा,
उनको इस काल के लोगों से सर्वदा के लिये बचाए रखेगा।
परन्तु क्या कहती है? यह, कि
"वचन तेरे निकट है,
तेरे मुँह में और तेरे मन में है," यह वही विश्वास का वचन है, जो हम प्रचार करते हैं।
इसलिए विश्वास सुनने से, और सुनना मसीह के वचन से होता है।
परन्तु मैं कहता हूँ, "क्या उन्होंने नहीं सुना?" सुना तो सही क्योंकि लिखा है,
"उनके स्वर सारी पृथ्वी पर,
और उनके वचन जगत के छोर तक पहुँच गए हैं।" (भज. 19:4)
जितनी बातें पहले से लिखी गईं, वे हमारी ही शिक्षा के लिये लिखी गईं हैं कि हम धीरज और पवित्रशास्त्र के प्रोत्साहन के द्वारा आशा रखें।
और ये आज्ञाएँ जो मैं आज तुझको सुनाता हूँ वे तेरे मन में बनी रहें और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना। (इफि. 6:4) और इन्हें अपने हाथ पर चिन्ह के रूप में बाँधना, और ये तेरी आँखों के बीच टीके का काम दें। (मत्ती 23:5) और इन्हें अपने-अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना।
और मसीह के उस प्रेम को जान सको जो ज्ञान से परे है कि तुम परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाओ।
यह हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर को अच्छा लगता और भाता भी है, जो यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो; और वे सत्य को भली भाँति पहचान लें। (यहे. 18:23)