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Proximidade

Por Bíblia Online

Deus é próximo dos que o buscam. Ele não é um Deus distante, mas presente, íntimo e acessível a todo o que o invoca com sinceridade de coração.

Buscar a presença de Deus

A Bíblia nos exorta a buscar a face do Senhor continuamente. Quem se aproxima dele encontra plenitude de alegria e delícias perpétuas.

याहवेह और उनकी सामर्थ्य की खोज करो;

उनकी उपस्थिति के सतत खोजी बने रहो.

याहवेह और उनकी सामर्थ्य की खोज करो;

उनकी उपस्थिति के सतत खोजी बने रहो.

जब तक याहवेह मिल सकते हैं उन्हें खोज लो;

जब तक वह पास हैं उन्हें पुकार लो.

याहवेह से मैंने एक ही प्रार्थना की है,

यही मेरी आकांक्षा है:

मैं आजीवन याहवेह के आवास में निवास कर सकूं,

कि याहवेह के सौंदर्य को देखता रहूं

और उनके मंदिर में मनन करता रहूं.

आपके परिसर में एक दिन,

अन्यत्र के हजार दिनों से उत्तमतर है;

दुष्टों के मंडप में निवास की अपेक्षा मैं,

आपके भवन का द्वारपाल होना उपयुक्त समझता हूं.

आप मुझ पर सर्वदा जीवन का मार्ग प्रकाशित करेंगे;

आपकी उपस्थिति में परम आनंद है,

आपके दाहिने हाथ में सर्वदा सुख बना रहता है.

Deus está perto

O Senhor está perto dos que o invocam, dos quebrantados de coração e dos que clamam por socorro. Sua presença nos sustenta.

धर्मी की पुकार को याहवेह अवश्य सुनते हैं;

वह उन्हें उनके संकट से छुड़ाते हैं.

याहवेह टूटे हृदय के निकट होते हैं,

वह उन्हें छुड़ा लेते हैं, जो आत्मा में पीसे हुए है.

तुम्हारी शालीनता सब पर प्रकट हो जाने दो. प्रभु निकट हैं.

एक समय था जब तुम दूर थे, किंतु अब मसीह येशु में उनके लहू के द्वारा पास लाए गए हो.

निश्चयतः कुशल मंगल और करुणा-प्रेम

आजीवन मेरे साथ साथ बने रहेंगे,

और मैं सदा-सर्वदा याहवेह के आवास में,

निवास करता रहूंगा.

A presença que nunca abandona

Deus promete nunca nos deixar. Ele permanece fiel, está conosco em todo tempo e envia o Espírito para habitar em nossos corações.

मैं तुम्हें अनाथ नहीं छोड़ूंगा, मैं तुम्हारे पास लौटकर आऊंगा.

याहवेह हमारे परमेश्वर हमारे साथ रहें, जैसे वह हमारे पूर्वजों के साथ रहे थे. ऐसा कभी न हो कि वह हमें त्याग दें, हमें भुला दें,

फिर भी, अपनी अपार दया में आपने उन्हें मिटा नहीं दिया और न ही उन्हें अकेला छोड़ दिया; क्योंकि आप दयालु और अनुग्रहकारी परमेश्वर हैं.

शांति के परमेश्वर स्वयं तुम्हें हर एक परिस्थिति में निरंतर शांति प्रदान करते रहें. प्रभु तुम सबके साथ हों.

अंत में, प्रिय भाई बहनो, आनंदित रहो, अपना स्वभाव साफ़ रखो, एक दूसरे को प्रोत्साहित करते रहो, एक मत रहो, शांति बनाए रखो और प्रेम और शांति के परमेश्वर तुम्हारे साथ होंगे.

हमें यह अहसास होता है कि हमारा उनमें और उनका हममें वास है क्योंकि उन्होंने हमें अपना आत्मा दिया है.

परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा, केवल परमेश्वर-पुत्र के अलावा; जो पिता से हैं; उन्हीं ने हमें परमेश्वर से अवगत कराया.

मोशेह याहवेह के साथ चालीस दिन तथा चालीस रात रहे. उन्होंने न तो रोटी खाई और न पानी पिया. उन्होंने उन पट्टियों पर परमेश्वर की वाचा अथवा दस आज्ञाएं लिखीं.

वहां जो बीमार हैं, उन्हें चंगा करना और उन्हें सूचित करना, ‘परमेश्वर का राज्य तुम्हारे निकट आ गया है.’

आसा द्वारा किए गए सुधार

परमेश्वर के आत्मा ओदेद के पुत्र अज़रियाह पर उतरे. वह आसा से भेंट करने गए और उससे कहा, "आसा, मेरी सुनो और यहूदिया और बिन्यामिन भी सुनें: याहवेह उस समय तक तुम्हारे साथ है, जब तक तुम उनके साथ सच्चे हो. तुम यदि याहवेह की खोज करोगे, तुम उन्हें पा लोगे. यदि तुम उनको छोड़ दोगे, वह भी तुम्हें छोड़ देंगे. लंबे समय से इस्राएल बिना किसी सच्चे परमेश्वर, बिना किसी शिक्षा देनेवाले पुरोहित और बिना किसी व्यवस्था के रहता आया है. मगर जब उन पर विपत्ति आई वे इस्राएल के परमेश्वर, याहवेह की ओर मुड़ गए. उन्होंने उनकी खोज की और याहवेह ने ऐसा होने दिया कि उन्होंने याहवेह को पा भी लिया. ये वे दिन थे, जब न तो जानेवाले सुरक्षित थे, न वे जो नगर में आ रहे होते थे, क्योंकि सभी राष्ट्रों के निवासियों को बहुत कोलाहल ने आ घेरा था. एक राष्ट्र दूसरे को कुचल रहा था और एक नगर दूसरे को, क्योंकि परमेश्वर ही उन्हें अलग-अलग तरह की मुसीबतें देकर उन्हें घबरा रहे थे. मगर तुम्हारे लिए मेरी सलाह है, स्थिर रहो, साहस न छोड़ो क्योंकि तुम्हारे द्वारा किए जा रहे काम के लिए उत्तम प्रतिफल तय है."

जब आसा ने ओदेद के पुत्र अज़रियाह की यह बातें और यह भविष्यवाणी सुनी, उसमें साहस का संचार आया. उसने सारे यहूदिया और बिन्यामिन एफ्राईम के पहाड़ी इलाके के कई नगरों में से घृणित मूर्तियां हटा दी. इसके बाद उसने याहवेह के ओसारे के सामने की याहवेह की वेदी को दोबारा बनाया.

तब उसने सारे यहूदिया, बिन्यामिन और इनके अलावा एफ्राईम, मनश्शेह और शिमओन के रहनेवालों को इकट्ठा होने को कहा. इस्राएल राज्य से अनेक यहां आकर बस गए थे, क्योंकि उन्होंने यह देखा, कि याहवेह, उनके परमेश्वर उनके साथ थे.

ये सभी आसा के शासन के पन्द्रहवें साल के तीसरे महीने में येरूशलेम में इकट्ठा हुए. उस दिन उन्होंने याहवेह के लिए सात सौ बैलों और सात हज़ार भेड़ों की बलि चढ़ाई. ये सभी पशु वे युद्ध में लूटकर लाए थे. उन्होंने पूरे हृदय और पूरे प्राणों से अपने पूर्वजों के परमेश्वर याहवेह को खोजने की वाचा बांधी. वहां यह निर्णय भी लिया गया कि जो कोई याहवेह इस्राएल के परमेश्वर की खोज न करे, चाहे साधारण हो या विशेष, स्त्री हो या पुरुष, उसका वध कर दिया जाए. इसके अलावा उन्होंने ऊंची आवाज में तुरहियों और नरसिंगों के शब्द के साथ यह चिल्लाते हुए याहवेह से यह शपथ ली थी. यह शपथ सारे यहूदिया के लिए उल्लास का विषय थी, क्योंकि उन्होंने यह शपथ पूरे हृदय से ली थी और उन्होंने याहवेह की खोज पूरी सच्चाई में की थी. फलस्वरूप याहवेह ने खुद को उन्हें प्राप्‍त होने दिया था. यह होने पर याहवेह ने उन्हें हर एक ओर से शांति दी.

राजा आसा ने अपनी दादी माकाह को राजमाता पद से हटा दिया, क्योंकि उसने अशेरा की घृणित मूर्ति बनाकर रखी थी. आसा ने इस मूर्ति को काटकर उसे किद्रोन नदी तट पर राख बना डाला. मगर पूजा की जगहों को इस्राएल से हटाया नहीं गया था. फिर भी आसा का मन जीवन भर याहवेह के लिए पूरी तरह सच्चा बना रहा. उसने परमेश्वर के भवन में वे सारी पवित्र वस्तुएं लाकर रख दीं, सोना, चांदी और बर्तन, जो उसके पिता और खुद उसके पास थी.

आसा के शासनकाल के पैंतीसवें साल तक कोई युद्ध नहीं हुआ.

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