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Relacionamentos: o que a Bíblia ensina sobre conviver

O que a Bíblia ensina sobre relacionamentos

A Bíblia ensina que ninguém foi criado para viver isolado e que a maturidade da fé se mede na convivência com o próximo. Todo relacionamento saudável — seja amizade, casamento ou vida comunitária — tem como base o amor prático, a renúncia do egoísmo e o respeito mútuo.

Jesus resumiu a ética das relações humanas na chamada Regra de Ouro:

इस कारण जो किमे थम चाहो सों के माणस थारे गेल्या करै, थम भी उनकै गेल्या उसाए करो, क्यूँके नियम-कायदे अर नबियाँ की शिक्षा याए सै।"(मत्ती 7:12)

अपणे माँ-बाप का आदर करियो, अर अपणे पड़ोसी तै अपणे जिसा प्यार राखियो।"(मत्ती 19:19)

हम प्रार्थना करां, के जिसा हम थारे तै प्यार करां सां; उस्से तरियां ए थारा प्यार भी आप्पस म्ह, अर सारे माणसां कै गेल्या बधै, अर परमेसवर थारे प्यार म्ह बढ़ोतरी करदा जावै।(1 थिस्सलुनीकियों 3:12)

Amizade: lealdade e crescimento conjunto

Nas Escrituras, amizade não é conveniência passageira nem rede de contatos: é aliança. O livro de Provérbios destaca que o verdadeiro amigo se prova na crise, não na festa.

दोस्त हरेक बखत म्ह प्यार करै सै,

अर बिप्दा के दिन भाई बण जावै सै।(नीतिवचन 17:17)

जुकर लोहा लोहे नै चमका देवै सै,

उस्से तरियां माणस का मुँह अपणे दोस्त की संगत तै चमकदार हो जावै सै।(नीतिवचन 27:17)

Em Eclesiastes, Salomão usa a imagem prática do viajante no deserto: quem anda sozinho corre o risco de cair sem ter quem o levante, mas a companhia traz segurança e resistência contra as adversidades da vida.

एक तै दो भले सै, क्यूँके उनकी मेहनत का आच्छा फळ मिलै सै।(सभोपदेशक 4:9)

क्यूँके जै उन म्ह तै एक गिरै, तो दूसरा उस नै ठावैगा; पर हाय उसपै जो एक्ला होकै गिरै अर उसका कोए ठाणिया ना हो।(सभोपदेशक 4:10)

जै कोए एक्ले पै हावी हो तो हो, पर दो उसका मुकाबला कर सकैगें। जो डोरी तीन ताघयां तै बटी हो तो वो ताव्ळी न्ही टूटदी।(सभोपदेशक 4:12)

Casamento e família: aliança e cuidado mútuo

A Bíblia apresenta o casamento como uma instituição criada por Deus para suprir a solidão humana e gerar parceria profunda entre homem e mulher.

फेर यहोवा परमेसवर नै कह्या, "आदम का एक्ला रहणा ठीक कोनी; मै उसकै खात्तर एक इसा मददगार बणाऊँगा जो उसकै लायक होवैगा।"(उत्पत्ति 2:18)

घर अर धन पूर्वजां के भाग तै,

पर बुद्धिमान घरआळी यहोवा की ओड़ तै ए मिलै सै।(नीतिवचन 19:14)

क्यूँके भोत सारे माणस जारी करै सै, इस करकै हरेक माणस जारी तै बचण खात्तर ब्याह करले, अर धणी-बीर एक-दुसरे के प्रति वफादार हो।(1 कुरिन्थियों 7:2)

हे मेरी प्यारी तू सर्वांग सुन्दरी सै;

तेरे म्ह कोए खोट कोनी।(श्रेष्ठगीत 4:7)

भली पत्नी कौण पाँ सकै सै?

क्यूँके उसका मोल तो मूँगों तै बाध सै।(नीतिवचन 31:10)

No Novo Testamento, Paulo eleva o casamento ao nível do relacionamento entre Cristo e a igreja. O marido é chamado a amar a esposa com espírito de entrega sacrificial, e a esposa é chamada ao respeito e à cooperação. Não se trata de autoritarismo, mas de serviço e honra mútua.

हे पत्नियों, अपणे-अपणे पति कै इस ढाळ अधीन रहो जिस ढाळ प्रभु के अधीन रहो सों। क्यूँके पति तो पत्नी का सिर सै, जिस ढाळ मसीह कलीसिया का सिर सै, अर कलीसिया मसीह की देह सै अर उद्धारकर्ता भी सै।(इफिसियों 5:22,23)

हे पतियों, अपणी-अपणी पत्नियाँ तै प्यार राक्खो, जिसा मसीह नै भी कलीसिया तै प्यार करकै उसकै खात्तर अपणी जान दे दी। ताके वो कलीसिया (बिश्वासी लोग्गां) ताहीं वचन तै नाहण के जरिये पापां तै शुद्ध करै, अर पवित्र बणावै।(इफिसियों 5:25,26)

इस तरियां सही सै के पति अपणी-अपणी पत्नी तै अपणी देह कै समान प्यार राक्खै। जो अपणी पत्नी तै प्यार करै सै। वो अपणे-आप तै प्यार करै सै।(इफिसियों 5:28)

पर थारे म्ह तै हरेक अपणी पत्नी तै अपणे समान प्यार करै, अर पत्नी भी अपणे पति का डर मान्‍नै।(इफिसियों 5:33)

हे पत्नियों, जिसा प्रभु म्ह सही सै, उसाए अपणे-अपणे धणी कै अधीन रहो। हे पतियों, अपणी-अपणी घरआळी तै प्यार राक्खो, अर उनकै गैल नरमाई तै पेश आओ।(कुलुस्सियों 3:18,19)

O dever do cuidado se estende à responsabilidade com a própria casa:

पर जै कोए अपणे रिश्तेदारां की अर खास करकै अपणे कुण्बे की फिक्र ना करै, तो वो बिश्वास तै मुकर गया सै अर अबिश्वासी तै भी बुरा बण गया सै।(1 तीमुथियुस 5:8)

Limites e integridade na convivência

Amar as pessoas não significa abrir mão de princípios nem viver para agradar aos outros. A Bíblia orienta discernimento nas alianças e coerência de caráter em todas as interações.

अबिश्वासियाँ कै गैल साझीदार ना बणो, क्यूँके धार्मिकता अर अधर्म का मेलजोल कोनी। या चाँदणे अर अन्धकार की संगति कोनी होन्दी।(2 कुरिन्थियों 6:14)

मै माणसां नै खुश करण की कोशिश न्ही करदा, पर परमेसवर नै खुश करण की कोशिश करुँ सूं, जै मै इब लग माणसां नै खुश करदा रहन्दा तो मसीह का दास न्ही होंदा।(गलातियों 1:10)

घणे धन तै आच्छा नाम चाह्ण कै लायक सै,

अर सोन्‍ने-चाँदी तै दुसरे माणसां के जरिये पक्ष पाणा आच्छा सै।(नीतिवचन 22:1)

A convivência diária funciona como o terreno onde as virtudes cristãs são cultivadas com paciência e perseverança:

इस कारण थम सिर्फ मसीह पैए बिश्वास करण आळे न्ही, पर हमेशा दुसरयां की भलाई करण म्ह लाग्गै रहों, अर सिर्फ भलाई ए न्ही बल्के बुध्दिमानी तै बरताव करण आळे भी बणो। थम सिर्फ बुध्दिमानी तै ए बरताव करण आळे न्ही बल्के अपणे-आप पै काब्बू राक्खण आळे भी बणो, अर अपणे-आप पै काब्बू राक्खण आळे ए न्ही बल्के दुखां नै धीरज तै सहण आळे भी बणो, अर दुखां नै धीरज तै सहण आळे ए न्ही बल्के भगति म्ह जिन्दगी बिताण आळे भी बणो। ना सिर्फ थम परमेसवर नै भावण आळी जिन्दगी जिओ, बल्के बिश्वासियाँ तै भी अपणे परिवार के माणस की तरियां प्यार करो, एक-दुसरे ताहीं अपणे परिवार के माणस की तरियां प्यार करण आळे ए न्ही बल्के सब नै प्यार करण आळे भी बणो।(2 पतरस 1:5-7)

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