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Roupas: o que a Bíblia diz sobre modéstia e vaidade

O que a Bíblia diz sobre roupas

A Bíblia trata a roupa tanto como necessidade prática provida por Deus quanto como símbolo do estado espiritual do ser humano. No dia a dia, a orientação das Escrituras pede modéstia, contentamento com o básico e confiança na providência divina, rejeitando a vaidade que mede o valor de alguém pelas aparências.

A origem do vestuário e o cuidado de Deus

Após a desobediência no Éden, Adão e Eva tentaram costurar folhas de figueira para cobrir a própria nudez. O próprio Deus interveio e fez para eles roupas de peles de animais, suprindo a fragilidade humana e ensinando que Ele cuida das necessidades essenciais dos seus filhos.

तब ओ दूनों के आंखी उघर गीस, अऊ ओमन ला महसूस होईस कि ओमन नंगरा हवंय; एकरे बर ओमन अंजीर के पानमन ला जोड़-जोड़के अपन बर ढपनी बना लीन।(उतपत्ती 3:7)

अऊ यहोवा परमेसर ह आदम अऊ ओकर घरवाली बर चमड़ा के पहिरावा बनाके ओमन ला पहिरा दीस।(उतपत्ती 3:21)

Jesus lembrou que o Pai veste os lírios do campo com mais beleza do que Salomão em toda a sua glória. Por isso, a busca por roupas não deve ser motivo de ansiedade nem sinal de ambição desenfreada, mas de contentamento com o sustento diário.

"एकरसेति, मेंह तुमन ला कहत हंव कि तुमन अपन जिनगी के बारे म चिंता झन करव कि तुमन का खाहू या का पीहू, अऊ न अपन देहें के बारे म चिंता करव कि तुमन का पहिरहू। का जिनगी ह भोजन ले जादा महत्व के नो हय? अऊ देहें ह ओनहा ले बढ़के नो हय?(मत्ती 6:25)

इही दौरान हजारों मनखेमन के भीड़ लग गीस अऊ ओमन एक-दूसर ऊपर गिरे पड़त रिहिन, त यीसू ह पहिली अपन चेलामन ला कहे के सुरू करिस, "फरीसीमन के खमीर ले सचेत रहव, मतलब कि ओमन के ढोंगीपन ले सचेत रहव। कुछू घलो बात ढंके नइं ए, जऊन ला उघारे नइं जाही या कुछू भी बात छिपे नइं ए, जऊन ला बताय नइं जाही। एकरसेति, जऊन बात तुमन अंधियार म कहे हवव, ओह दिन के अंजोर म सुने जाही, अऊ जऊन बात तुमन भीतर के खोली म मनखेमन के कान म चुपेचाप कहे हवय, ओला घर के छानी ऊपर ले खुलेआम बताय जाही।

"मोर संगवारीमन, मेंह तुमन ला कहत हंव कि ओमन ले झन डरव, जऊन मन देहें ला घात करथें अऊ ओकर बाद ओमन अऊ कुछू नइं कर सकंय। पर मेंह तुमन ला बतावत हंव कि तुमन ला काकर ले डरना चाही। ओकर ले डरव, जेकर करा तुमन ला मारे के बाद नरक म डारे के अधिकार हवय। हव, मेंह तुमन ला कहत हंव, ओकरेच ले डरव। पांच ठन गौरइया चिरई कतेक म बेचाथे? दू पईसा ले जादा म नइं बेचावय। तभो ले परमेसर ह ओमा ले एको ठन ला नइं भुलावय। अऊ त अऊ तुम्हर मुड़ के जम्मो चुंदीमन गने गे हवंय। झन डरव; तुमन गौरइया चिरईमन ले जादा कीमत के अव।

"मेंह तुमन ला कहत हंव कि जऊन कोनो मोला मनखेमन के आघू म स्वीकार करथे, ओला मनखे के बेटा घलो परमेसर के स्वरगदूतमन के आघू म स्वीकार करही। पर जऊन ह मोला मनखेमन के आघू म इनकार करथे, ओला मनखे के बेटा घलो परमेसर के स्वरगदूतमन के आघू म इनकार करही। अऊ जऊन ह मनखे के बेटा के बिरोध म कोनो बात कहिथे, त ओला माफ करे जाही, पर जऊन ह पबितर आतमा के बिरोध म निन्दा करथे, ओला माफ नइं करे जावय।

"जब मनखेमन तुमन ला यहूदीमन के सभा-घर, सासन करइया अऊ अधिकारीमन के आघू म लानथें, त ये बात के चिंता झन करव कि तुमन अपन बचाव कइसने करहू या ओमन के आघू म का कहिहू, काबरकि पबितर आतमा ह ओहीच बेरा तुमन ला ये बात ला सिखा दीही कि तुमन ला का कहना चाही।"

भीड़ म ले एक मनखे ह यीसू ला कहिस, "हे गुरू, मोर भाई ले कह कि ओह मोर संग ओ संपत्ति के बंटवारा करय, जऊन ला हमर ददा हमर बर छोंड़ गे हवय।"

यीसू ह ओला कहिस, "हे मनखे, कोन ह मोला तुम्हर नियायधीस या तुम्हर बीच म संपत्ति के बंटवारा करइया ठहिराईस?" तब ओह ओमन ला कहिस, "सचेत रहव! अपनआप ला जम्मो किसम के लालच ले दूर रखव; काबरकि मनखे के जिनगी ह ये बात ले नइं बनय कि ओकर करा कतेक जादा संपत्ति हवय।"

तब यीसू ह ओमन ला ये पटंतर कहिस, "एक धनवान मनखे के खेत म बहुंत फसल होईस। ओह अपन मन म सोचिस, ‘अब मेंह का करंव? मोर करा मोर फसल ला कुढ़ोय के जगह नइं ए।’

"ओह कहिस, ‘मेंह अइसने करहूं—मेंह अपन कोठारमन ला टोरके ओकर ले बड़े-बड़े कोठार बनाहूं, अऊ उहां मेंह अपन जम्मो अनाज अऊ दूसर माल-मत्ता ला रखहूं।’ तब में अपनआप ले कहिहूं, ‘तोर करा बहुंत संपत्ति हवय, जऊन ह बहुंते साल तक चलही। अपन जिनगी के चिंता झन कर; खा, पी अऊ खुसी मना।’

"पर परमेसर ह ओला कहिस, ‘हे मुरूख मनखे! इहीच रथिया तोर परान ला ले लिये जाही; तब ये जम्मो चीज काकर होही, जऊन ला तेंह अपन बर रखे हवस।’

"अइसनेच हर एक ओ मनखे के संग होही, जऊन ह अपन बर धन संकेलथे, पर परमेसर के नजर म धनवान नो हय।"

तब यीसू ह अपन चेलामन ला कहिस, "एकरसेति मेंह तुमन ला कहत हंव, अपन जिनगी के बारे म चिंता झन करव कि तुमन का खाहू, या अपन देहें के बारे म चिंता झन करव कि तुमन का पहिरहू। जिनगी ह भोजन ले जादा महत्व के अय, अऊ देहें ह ओनहा ले जादा महत्व रखथे। कऊआ चिरईमन के बारे सोचव: ओमन न कुछू बोवंय अऊ न लुवंय; ओमन करा न भंडारघर हवय न ही कोठार; तभो ले परमेसर ओमन ला खवाथे। तुमन तो चिरईमन ले जादा महत्व के अव। तुमन म अइसने कोनो हवय, जऊन ह चिंता करे के दुवारा अपन जिनगी के एको घरी ला घलो बढ़ा सकथे? जब तुमन ये बहुंत छोटे चीज ला नइं कर सकव, त तुमन आने बड़े चीजमन के बारे म चिंता काबर करथव?

"सोचव कि जंगली फूलमन कइसने बाढ़थें; ओमन न मेहनत करंय अऊ न ही अपन बर ओनहा बिनंय। पर मेंह तुमन ला बतावत हंव, अऊ त अऊ सुलेमान सहीं धनी राजा घलो येमन ले काकरो सहीं सुघर कपड़ा नइं पहिरे रिहिस। जब परमेसर ह भुइयां के कांदी ला अइसने ओनहा पहिराथे, जऊन ह आज इहां हवय अऊ कल आगी म झोंक दिये जाही, त हे अल्‍प बिसवासीमन, का ओह तुमन ला अऊ बने ओनहा नइं पहिराही। अऊ एकर धियान म झन रहव कि तुमन का खाहू या का पीहू; एकर चिंता झन करव। काबरकि ये संसार म मूरती-पूजा करइयामन ये जम्मो चीज के खोज म रहिथें, अऊ तुम्हर ददा परमेसर ह जानथे कि तुमन ला ये चीजमन के जरूरत हवय। परमेसर के राज के खोज म रहव, त संग म ये चीजमन घलो तुमन ला दिये जाही।

"हे छोटे झुंड! झन डर, काबरकि तोर ददा परमेसर ह तोला राज देके खुस हवय। अपन संपत्ति ला बेच अऊ गरीबमन ला दे। अपन बर अइसने बटुवा बनावव, जऊन ह जुन्ना नइं होवय, याने स्वरग म अपन धन जमा करव, जऊन ह कभू नइं घटय; जेकर लकठा म चोर नइं आ सकय अऊ जऊन ला कीरा घलो नास नइं कर सकय। काबरकि जिहां तुम्हर धन हवय, उहां तुम्हर मन घलो लगे रहिही।

"तुमन सेवा करे बर हमेसा तियार रहव अऊ अपन दीया ला बारे रखव; ओ सेवकमन सहीं, जऊन मन अपन मालिक के एक बिहाव भोज ले लहुंटे के बाट जोहत हवंय, ताकि जब ओह आवय अऊ कपाट ला खटखटावय, त ओमन तुरते ओकर बर कपाट ला खोल सकंय। ओ सेवकमन बर येह खुसी के बात होही, जब ओमन के मालिक लहुंटके आथे, त ओमन ला जागत पाथे। मेंह तुमन ला सच कहत हंव—ओह खुदे सेवा करे बर सेवक के कपड़ा पहिरही; ओह ओमन ला खाना खवाय बर बईठाही अऊ आके ओमन के सेवा करही। ओ सेवकमन बर येह बने बात होही, यदि ओमन के मालिक रथिया के दूसर या तीसरा पहर म आवय अऊ ओमन ला सचेत पावय। पर ये बात ला समझ लेवव: यदि घर के मालिक ला मालूम होतिस कि चोर ह कतेक बेरा आही, त ओह अपन घर म सेंध नइं लगन देतिस। तुमन घलो हमेसा तियार रहव, काबरकि मनखे के बेटा ह अइसने बेरा म आ जाही, जब तुमन ओकर आय के आसा नइं करत होहू।"

पतरस ह पुछिस, "हे परभू, ये पटंतर ला का तेंह हमर बर कहत हवस या फेर जम्मो झन बर?"

परभू ह जबाब देके कहिस, "तब ओ बिसवासयोग्य अऊ बुद्धिमान परबंधक कोन ए, जऊन ला मालिक ह अपन सेवकमन ऊपर मुखिया ठहिराथे, ताकि ओह सेवकमन ला सही समय म ओमन के खाना के भत्ता देवय। येह ओ सेवक बर खुसी के बात होही कि जब ओकर मालिक ह आथे, त ओला अइसने करत पाथे। मेंह तुमन ला सच कहत हंव कि मालिक ह ओ सेवक ला अपन जम्मो संपत्ति के जिम्मेदारी दे दीही। पर यदि ओ सेवक ह अपन मन म ये कहय, मोर मालिक ह आय म अब्बड़ देरी करत हवय। अऊ अइसने सोचके ओह आने सेवक अऊ सेविकामन ला मारन-पीटन लगय, अऊ खावय-पीयय अऊ मतवार हो जावय। तब ओ सेवक के मालिक ह एक अइसने दिन म आ जाही, जब ओह ओकर आय के आसा नइं करत होही अऊ ओकर आय के बेरा ला घलो नइं जानत होही। तब मालिक ह ओला कठोर सजा दीही अऊ ओला अबिसवासीमन के संग म रखही।

"ओ सेवक जऊन ह अपन मालिक के ईछा ला जानथे, पर तियार नइं रहय या जऊन बात ला ओकर मालिक चाहथे ओला नइं करय, त ओ सेवक ह बहुंत मार खाही। पर जऊन सेवक ह अपन मालिक के ईछा ला नइं जानत हवय, अऊ बिगर जाने ओह गलत काम करथे, त ओह कम मार खाही। जऊन ला बहुंत दिये गे हवय, ओकर ले बहुंत मांगे जाही, अऊ जऊन ला बहुंत सऊंपे गे हवय, ओकर ले बहुंत लिये जाही।

"मेंह धरती म आगी लगाय बर आय हवंव, अऊ मेंह ये चाहत हंव कि बने होतिस कि येमा पहिली ले आगी लगे होतिस। मोला एक बतिसमा म ले होके जाना हवय, अऊ जब तक ओह पूरा नइं हो जावय, मेंह बहुंत बियाकुल हवंव। का तुमन ये सोचत हव कि मेंह धरती म सांति लाने बर आय हवंव। नइं, मेंह तुमन ला कहत हंव कि मेंह फूट डारे बर आय हवंव। अब ले जब एक परिवार म पांच झन होहीं, त ओमन म फूट पड़ही; तीन झन ह दू झन के बिरोध म अऊ दू झन ह तीन झन के बिरोध म रहिहीं। ददा ह अपन बेटा के बिरूध होही, त बेटा ह अपन ददा के बिरूध। दाई ह अपन बेटी के बिरूध होही, त बेटी ह अपन दाई के बिरूध; अऊ सास ह अपन बहू के बिरूध होही, त बहू ह अपन सास के बिरूध।"

यीसू ह मनखेमन के भीड़ ला घलो कहिस, "जब तुमन पछिम दिग म एक बादर उठत देखथव, त तुरते तुमन कहिथव कि ‘बारिस होवइया हवय;’ अऊ अइसनेच होथे। अऊ जब दक्खिन दिग के हवा चलथे, ‘त तुमन कहिथव कि गरमी बढ़इया हवय,’ अऊ अइसनेच होथे। हे ढोंगी मनखेमन! धरती अऊ अकास ला तुमन देखके जान लेथव कि एकर का मतलब होथे; तब तुमन ये समय के मतलब ला काबर नइं जानव?

"तुमन खुदे काबर फैसला नइं कर लेवव कि का सही ए? यदि कोनो मनखे तुम्हर बिरोध म नालिस करय अऊ तुमन ला कचहरी म ले जावय, त तुमन भरसक कोसिस करव कि ओकर संग डहार म ही मामला के निपटारा हो जावय, नइं तो ओह तुमन ला नियायधीस करा खींचके ले जाही, अऊ नियायधीस ह तुमन ला पुलिस अधिकारी ला सऊंप दीही, अऊ पुलिस ह तुमन ला जेल म डार दीही। मेंह तुमन ला कहत हंव कि जब तक तुमन कौड़ी-कौड़ी नइं चुका दूहू, तब तक उहां ले नइं छूट सकव।"(लूका 12)

काबरकि हमन ये संसार म कुछू नइं लाने हवन अऊ हमन इहां ले कुछू नइं ले जा सकन। एकरसेति कहूं हमर करा भोजन अऊ कपड़ा हवय, त हमन ला ओहीच म संतोस रहना चाही।(1 तीमुथियुस 6:7,8)

Modéstia, simplicidade e aparência interior

Tanto Paulo quanto Pedro orientam os cristãos a se vestirem com decência e bom senso. O foco bíblico não é estabelecer um uniforme rígido, mas evitar a ostentação, o luxo extravagante e o exibicionismo, valorizando o caráter piedoso acima do adorno externo.

मेंह ये घलो चाहत हंव कि माईलोगनमन संकोच अऊ बने आचरन के संग ठीक से कपड़ा पहिरंय, न कि बाल गुंथके या सोन या मोती या मंहगा कपड़ा ले अपनआप ला संवारंय, पर भलई के काम करंय, जइसने कि ओ माईलोगनमन ला सोभा देथे, जऊन मन परमेसर के अराधना करे के घोसना करथें।(1 तीमुथियुस 2:9,10)

तुमन के सुघरता बाहिरी सिंगार के दुवारा झन होवय, जइसने कि बाल गुंथई, अऊ सोन के जेवर अऊ आने-आने किसम के कपड़ा पहिरई। एकर बदले, तुमन म मनखे के भीतरी गुन, नमरता अऊ सांत सुभाव के आतमा होना चाही, जऊन ह नइं मुरझावय अऊ अइसने बातमन परमेसर के नजर म बहुंत कीमती होथें।(1 पतरस 3:3,4)

A Bíblia também adverte que a vestimenta externa pode enganar. Jesus alertou contra falsos mestres disfarçados em "pele de ovelha", enquanto João Batista usava roupas rústicas de pelos de camelo coerentes com sua pregação de arrependimento no deserto.

"लबरा अगमजानीमन ले सचेत रहव। ओमन भेड़ के भेस म तुम्हर करा आथें, पर भीतर ले ओमन भयंकर भेड़िया अंय।(मत्ती 7:15)

यूहन्ना ह ऊंट के रूआं के बने कपड़ा पहिरय अऊ अपन कनिहां म चमड़ा के बने पट्टा बांधय। ओह फांफा अऊ जंगली मंधरस खावय।(मत्ती 3:4)

As vestes espirituais

Em sentido figurado, a Escritura usa o ato de vestir para descrever a salvação e a conduta moral. O crente é chamado a "despir-se" das práticas do pecado e a se "revestir" de Cristo — assumindo a compaixão, a humildade e a justiça que vêm de Deus até a vitória final descrita nas vestes brancas da eternidade.

में यहोवा म अति आनंदित हंव;

मोर जीव ह मोर परमेसर म आनंदित होथे।

काबरकि ओह मोला उद्धार के ओनहा पहिराय हवय

अऊ अपन धरमीपन के पहिरावा ले अइसन सजाय हवय,

जइसन कोनो दूल्हा ह अपन मुड़ी ला एक पुरोहित के सहीं सजाथे,

अऊ जइसन कोनो दुलहिन अपनआप ला अपन जेवर ले सिंगार करथे।(यसायाह 61:10)

मसीह यीसू म बिसवास करे के सेति, तुमन जम्मो झन परमेसर के संतान अव, काबरकि तुमन ले जतेक झन मसीह म एक होय बर बतिसमा ले हवव, तुमन मसीह के सुभाव ला अपना ले हवव।(गलातिया 3:26,27)

तुमन पबितर अऊ बहुंते मयारू अव। एकरसेति, परमेसर के चुने मनखेमन सहीं, अपनआप ला करूना, दया, दीनता, नमरता अऊ धीरज ले भर लेवव।(कुलुस्सी 3:12)

जऊन ह बिजयी होही, ओला येमन के सहीं सफेद कपड़ा पहिराय जाही। मेंह ओकर नांव ला जिनगी के किताब ले कभू नइं मिटावंव, पर अपन ददा अऊ ओकर स्वरगदूतमन के आघू म ओला गरहन करहूं।(दरसन 3:5)

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