Versículo sobre servir ao Senhor: o que a Bíblia ensina
O que a Bíblia ensina sobre servir ao Senhor
Servir ao Senhor é dedicar a vida inteira a Deus, reconhecendo a autoridade dEle sobre cada decisão e atitude diária. Nas Escrituras, esse serviço não se restringe a funções religiosas: trata-se de uma postura de lealdade exclusiva, obediência à Sua Palavra e amor prático ao próximo.
Quando Josué reuniu o povo de Israel em Siquém, ele destacou que servir a Deus exige uma decisão consciente e firme:
कड़ी मेहनत करैं और आलसी ना बनै; आत्मिक धुन और हौंसला से भरे रहबौ प्रभु की सेवा करत रहबौ।(रोमियों 12:11)
तौ मसीह को खून जो अपने आपकै अनंत आत्मा के जरिया परमेस्वर के अग्गु निर्दोस चढ़ाई, तुम्हारे मन कै मरे भै कामन से काहे नाय सुद्ध करैगो, ताकी तुम जिंदे परमेस्वर की आराधना करौ।(इब्रानियों 9:14)
Jesus como modelo de servo
Cristo redefiniu o conceito de grandeza. Enquanto o mundo associa autoridade ao domínio sobre os outros, Jesus lavou os pés dos discípulos e colocou a própria vida à disposição da humanidade:
इंसान को लौड़ा जाके ताहीं नाय आओ है कि बाकी सेवा करी जाबै, बल्कि जाके ताहीं आओ कि बौ खुद सेवा करै, और दुसरेन कै छुड़ान ताहीं अपनी ज्यान देबै।"(मरकुस 10:45)
पर तुमरे बीच मैं ऐसो नाय होनो चाहिए; पर तुम मैं जो कोई पहलो बननो चाहबै बाकै तुमरो सेवक बननो होगो। और जो तुम मैं पधान होनो चाहबै बौ तुमरो दास बनै;(मत्ती 20:26,27)
अगर मैं प्रभु और गुरु बनकै तुमरे पाँव कै धो, तौ तुमकै एक दुसरे के पाँव धोनो चाहिए।(यूहन्ना 13:14)
बौ बैठकै बारहों कै बुलाई और उनसे कही, "अगर कोई बड़ो होनो चाहबै, तौ अग्गु सबसे छोटो और सबकी सेवा करन बारो सेवक बनै।"(मरकुस 9:35)
तुमकै इंसान के लौड़ा के हानी होनो चाहिए, जो सेवा करान कै नाय सेवा करन और भौतन के छुड़ौती के ताहीं अपनी ज्यान देन कै आओ है।"(मत्ती 20:28)
Servir a Deus cuidando do próximo
A devoção a Deus se expressa diretamente nas relações cotidianas. O apóstolo Paulo explica que a liberdade trazida pelo evangelho não é desculpa para o egoísmo, mas uma oportunidade para se colocar a serviço das necessidades alheias:
तुमरे ताहीं, मेरे भईय्यौ और बहेनियौ, आजाद होन के ताहीं बुलाए गै हौ। लेकिन ऐसो ना होबै कि जौ आजादी सरीर के कामन ताहीं मौका बनै, बल्किन प्यार से एक दुसरे के गुलाम बनौ।(गलातियों 5:13)
तुम आजाद लोगन के हानी जीबौ, फिर भी तुम परमेस्वर के दास हौ, तभईये अपनी आजादी को उपयोग बुराई करन के बहाने के रूप मैं मत करौ, परमेस्वर के दास के नाई जीबौ।(1 पतरस 2:16)
अगर कोई मेरी सेवा करै, तौ मेरे पच्छू हुई लेबै; और जहाँ मैं हौं, हूँना मेरो सेवक होगो। अगर कोई मेरी सेवा करै, तौ दऊवा बाको आदर करैगो।"(यूहन्ना 12:26)
"कोई भी एक संग दुई मालिक की सेवा नाय हुई सकथै; काहैकि बौ एक से नफरत करैगो, और दुसरे से प्यार करैगे; एक के प्रति बफादार रैहगो और दुसरे को तिरस्कार करैगो। तुम धन की और परमेस्वर की सेवा नाय कर सकथौ।"(मत्ती 6:24)
और ना अपने सरीर के कोई भी हिस्सा कै अधर्म को हथियार होन के ताहीं पाप कै सौपौं, पर खुदकै मरे भै मैं से जिंदो करो गौ जानकै परमेस्वर कै सौंपौ, और अपने सरीर के एक-एक हिस्सा कै धर्मी को हथियार होन के ताहीं परमेस्वर कै सौंपौ।(रोमियों 6:13)
A fidelidade e a promessa do Senhor
Muitas vezes o serviço diário é silencioso e não recebe reconhecimento humano. A Escritura ensina que Deus conhece a dedicação de quem permanece fiel nas pequenas tarefas e que nenhuma dedicação feita a Ele se perde:
बाको मालिक बासे कही, ‘धन्य है अच्छो और बिस्वास के काबिल सेवक, तैं थोड़ी मैं बिस्वास के काबिल रहो; मैं तोकै तमान चीजन को हकदार बनांगो। अपने मालिक की खुसी मैं मिल जा।’(मत्ती 25:21)
तौ मेरे प्रिय भईय्यौ और बहेनियौ, मजबूत रहकै अटल रहबौ, प्रभु के काम मैं सदा बढ़ते जाबौ, तुम जानथौ कि तुमरी मेहनत प्रभु मैं बेकार नाय है।(1 कुरिन्थियों 15:58)
पूरो सास्त्र परमेस्वर से प्रेरित हैं और सच्चाई कै सिखान, गलती कै झुकाने, दोसन कै सुधारन, धार्मिकता और सई जिंदगी जीन के निर्देस देन के ताहीं काम मैं आनबारे है, ताकी परमेस्वर की सेवा करन बारो आदमी पूरे तरीका से लायक और काबिल हुई सकै और सबै तरहन के अच्छे काम कर सकै।(2 Timóteo 3:16,17)
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