Temor do Senhor
O temor do Senhor é o princípio da sabedoria. Não se trata de medo, mas de reverência profunda, respeito e admiração diante da santidade e grandeza de Deus.
O princípio da sabedoria
A Escritura afirma que temer ao Senhor é o primeiro passo para a verdadeira sabedoria. Quem teme a Deus discerne o certo e aprende a viver com prudência.
ख़ुदावन्द का ख़ौफ़ समझ का शुरू' है;
उसके मुताबिक 'अमल करने वाले अक़्लमंद हैं।
उसकी सिताइश हमेशा तक क़ाईम है।
ख़ुदावन्द का ख़ौफ़ हिकमत का शुरू' है,
और उस क़ुद्दुस की पहचान समझ है।
ख़ुदावन्द का ख़ौफ़ हिकमत की तरबियत है,
और सरफ़राज़ी से पहले फ़रोतनी है।
और उसने इंसान से कहा,
देख, ख़ुदावन्द का ख़ौफ़ ही हिकमत है;
और बदी से दूर रहना यही 'अक़्लमन्दी है।"
ख़ुदावन्द का ख़ौफ़ पाक है, वह अबद तक क़ाईम रहता है;
ख़ुदावन्द के अहकाम बरहक़ और बिल्कुल रास्त हैं।
वह सोने से बल्कि बहुत कुन्दन से ज़्यादा पसंदीदा हैं;
वह शहद से बल्कि छत्ते के टपकों से भी शीरीन हैं।
नीज़ उन से तेरे बन्दे को आगाही मिलती है;
उनको मानने का अज्र बड़ा है।
Bênçãos do temor
Quem teme ao Senhor encontra vida longa, provisão e proteção. O temor de Deus nos guarda do mal e nos conduz à humildade.
दौलत और 'इज़्ज़त — ओ — हयात,
ख़ुदावन्द के ख़ौफ़ और फ़रोतनी का अज्र हैं।
ख़ुदावन्द का ख़ौफ़' उम्र की दराज़ी बख़्शता है लेकिन शरीरों की ज़िन्दगी कोताह कर दी जायेगी।
ख़ुदावन्द का ख़ौफ़ ज़िन्दगी का चश्मा है,
जो मौत के फंदों से छुटकारे का ज़रिया' है।
शफ़क़त और सच्चाई से बदी का और लोग ख़ुदावन्द के ख़ौफ़ की वजह से बदी से बाज़ आते हैं।
मुबारक है वह आदमी जो सदा डरता रहता है,
लेकिन जो अपने दिल को सख़्त करता है, मुसीबत में पड़ेगा।
आज़माकर देखो, कि ख़ुदावन्द कैसा मेहरबान है!
वह आदमी जो उस पर भरोसा करता है।
ख़ुदावन्द से डरो, ऐ उसके पाक लोगों!
क्यूँकि जो उससे डरते हैं उनको कुछ कमी नहीं।
Vivendo no temor do Senhor
Temer ao Senhor é obedecer seus mandamentos, andar em seus caminhos e amá-lo de todo coração. Essa reverência se expressa em justiça e integridade.
तुम ख़ुदावन्द अपने ख़ुदा की पैरवी करना, और उसका ख़ौफ़ मानना, और उसके हुक्मों पर चलना, और उसकी बात सुनना; तुम उसी की बन्दगी करना और उसी से लिपटे रहना।
इसलिए तू ख़ुदावन्द अपने ख़ुदा की राहों पर चलने और उसका ख़ौफ़ मानने के लिए उसके हुक्मों पर 'अमल करना।
डरते हुए ख़ुदावन्द की इबादत करो,
काँपते हुए ख़ुशी मनाओ।
ऐ बच्चो, आओ मेरी सुनो,
मैं तुम्हें ख़ुदा से डरना सिखाऊँगा।
वह कौन आदमी है जो ज़िन्दगी का मुश्ताक़ है,
और बड़ी उम्र चाहता है ताकि भलाई देखें?
अपनी ज़बान को बदी से बाज़ रख,
और अपने होंटों को दग़ा की बात से।
बुराई को छोड़ और नेकी कर;
सुलह का तालिब हो और उसी की पैरवी कर।
फिर ख़ुदावन्द का ख़ौफ़ तुम में रहे; इसलिए ख़बरदारी से काम करना, क्यूँकि ख़ुदावन्द हमारे ख़ुदा में बेइन्साफ़ी नहीं है, और न किसी की रूदारी न रिश्वत ख़ोरी।
तू बहरे को न कोसना, और न अन्धे के आगे ठोकर खिलाने की चीज़ को धरना, बल्कि अपने ख़ुदा से डरना। मैं ख़ुदावन्द हूँ।
और तुम एक दूसरे पर अन्धेर न करना, बल्कि अपने ख़ुदा से डरते रहना; क्यूँकि मैं ख़ुदावन्द तुम्हारा ख़ुदा हूँ।
और अगर तेरा कोई भाई ग़रीब हो जाए और वह तेरे सामने तंगदस्त हो, तो तू उसे संभालना। वह परदेसी और मुसाफ़िर की तरह तेरे साथ रहे। तू उससे सूद या नफ़ा' मत लेना बल्कि अपने ख़ुदा का ख़ौफ़ रखना, ताकि तेरा भाई तेरे साथ ज़िन्दगी बसर कर सके।
"मगर तुम दोस्तों से मैं कहता हूँ कि उनसे न डरो जो बदन को क़त्ल करते हैं, और उसके बाद और कुछ नहीं कर सकते।" लेकिन मैं तुम्हें जताता हूँ कि किससे डरना चाहिए, उससे डरो जिसे इख़्तियार है कि क़त्ल करने के बाद जहन्नुम में डाले; हाँ, मैं तुम से कहता हूँ कि उसी से डरो।