Valioso
Cada ser humano é precioso aos olhos de Deus. As Escrituras revelam que fomos criados à imagem divina, resgatados por alto preço e chamados para um propósito eterno.
O valor que Deus nos dá
Nosso valor não vem de conquistas ou aparências, mas do fato de sermos amados pelo Criador. Deus cuida até dos passarinhos — quanto mais de nós!
क्या पैसे की दो चिड़ियाँ नहीं बिकतीं? और उन में से एक भी तुम्हारे बाप की मर्ज़ी के बग़ैर ज़मीन पर नहीं गिर सकती। बल्कि तुम्हारे सर के बाल भी सब गिने हुए हैं। पस डरो नहीं; तुम्हारी क़द्र तो बहुत सी चिड़ियों से ज़्यादा है।"
पस आदमी की क़द्र तो भेड़ से बहुत ही ज़्यादा है; इसलिए सबत के दिन नेकी करना जायज़ है।"
क्या दो पैसे की पाँच चिड़िया नहीं बिकती? तो भी ख़ुदा के सामने उनमें से एक भी फ़रामोश नहीं होती। बल्कि तुम्हारे सिर के सब बाल भी गिने हुए है; डरो, मत तुम्हारी क़द्र तो बहुत सी चिड़ियों से ज़्यादा है।
हवा के परिन्दों को देखो कि न बोते हैं न काटते न कोठियाँ में जमा करते हैं; तोभी तुम्हारा आसमानी बाप उनको खिलाता है क्या तुम उस से ज़्यादा क़द्र नहीं रखते?
Preciosos aos olhos de Deus
O Senhor declara que somos preciosos e valiosos aos seus olhos. Ele nos chama de propriedade exclusiva e nos reveste de glória.
चूँकि तू मेरी निगाह में बेशक़ीमत और मुकर्रम ठहरा और मैंने तुझ से मुहब्बत रख्खी, इसलिए मैं तेरे बदले लोग और तेरी जान के बदले में उम्मतें दे दूँगा।
इसलिए अब अगर तुम मेरी बात मानो और मेरे 'अहद पर चलो तो सब क़ौमों में से तुम ही मेरी ख़ास मिल्कियत ठहरोगे क्यूँकि सारी ज़मीन मेरी है।
उठ मुनव्वर हो क्यूँकि तेरा नूर आगया और ख़ुदावन्द का जलाल तुझ पर ज़ाहिर हुआ।
O verdadeiro valor
A Bíblia nos ensina que a fé, a integridade e o caráter são mais valiosos que ouro ou prata. O que tem valor eterno transcende o material.
और मसीह ईसा में न तो ख़तना कुछ काम का है न नामख़्तूनी मगर ईमान जो मुहब्बत की राह से असर करता है।
शफ़क़त और सच्चाई तुझ से जुदा न हों,
तू उनको अपने गले का तौक़ बनाना,
और अपने दिल की तख़्ती पर लिख लेना।
यूँ तू ख़ुदा और इंसान की नज़र में,
मक़्बूलियत और 'अक़्लमन्दी हासिल करेगा।
सादिक़ की ज़बान खालिस चाँदी है;
शरीरों के दिल बेक़द्र हैं
नेकोकार बीवी किसको मिलती है?
क्यूँकि उसकी क़द्र मरजान से भी बहुत ज़्यादा है।
लेकिन मैं अपनी जान को अज़ीज़ नहीं समझता कि उस की कुछ क़द्र करूँ; बावजूद इसके कि अपना दौर और वो ख़िदमत जो ख़ुदावन्द ईसा से पाई है, पूरी करूँ। या’नी ख़ुदा के फ़ज़ल की ख़ुशख़बरी की गवाही दूँ।