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Verdade

Por Bíblia Online

A verdade é um dos atributos centrais de Deus e um pilar da vida cristã. Jesus se declarou o caminho, a verdade e a vida. Viver na verdade é viver em liberdade e integridade.

Deus é a fonte da verdade

O Senhor é fiel e verdadeiro em todas as suas palavras. Sua Palavra é a verdade absoluta que ilumina nosso caminho e nos sustenta.

उससकहा, "और सतऔर वन ैं ूँऔर सतऔर वन ैं ूँ: उनककहनमतलब यह ैं ि, और अनसभवल उनीं यम परमवर पहुँसकतै।; ििनहीं पहुँसकता।

और वचन हध; और अनरह और सचपरिकर हमें िा, और हमनउसकऐसमहिी, िएकलमहिा। (1 . 4:9)

ोंि यहवचन ोंि यहवचन ै: परमवर आजिरतिँ। वह कहतसहवरनसतै। ;

और उसकसब िपकषतै।

परमवर एक-एक वचन ै;

वह अपनशरणगतों ठहरै।

और यह नतैं, ि परमवर गयऔर उसनहमें समझ ै, ि हम उस सचपहचें, और हम उसमें सतै, अरउसकमसें रहतैं। सचपरमवर और अननवन यहै।

O Espírito da verdade

Jesus prometeu enviar o Espírito Santo, o Espírito da verdade, que nos guia, ensina e nos faz lembrar de tudo o que Cristo disse.

िैं सच कहतूँ, ि िअचै, ोंि यदि ैं ँ, वह सहयक आएगा, परनयदि ैं ा, उसूँा।

परनजब वह सहयक आएगा, िैं िओर ूँा, अरसतआतिओर िकलतै, वह गवा।

और वह अभि, उसकओर िगया, ें बनरहतै; और ें इसकरयजन नहीं, ि ें ि, वरनवह अभिउसकओर िगयें सब ें िै, और यह सचै, और नहीं और उसनें िउसमें बनरहतो। (. 14:26)

परमवर आतै, और अवशि उसकआरधनकरनआतऔर सचआरधनकरें।"

A verdade liberta

Jesus prometeu que conhecer a verdade nos torna livres. A mentira aprisiona, mas a verdade de Deus nos conduz à plenitude.

सतें वतकर

तब उन यहिों िोंउस पर ििा, कहा, "यदि वचन ें बनरहे, सचमठहरे। और सते, और सतें वतकरा।"

ैंसचिै,

ियमों ओर ैं िलगरहतूँ।

अपनसतपर चलऔर िे,

ोंि उदकरनपरमवर ै;

ैं िभर हतरहतूँ।

अपनआपकपरमवर रहणयऔर ऐसकरनठहररयतकर, लजि, और सतवचन ि ें ो।

उसनअपनइचहमें सतवचन उतपनिा, ि हम उसकि ििों पहलफल समो।

Vivendo e falando a verdade

Somos chamados a falar a verdade em amor e a rejeitar toda forma de engano. A integridade nas palavras é marca do cristão.

वरनें सच ें और सब ों ें उसमें िै, अरमसें बढँ,

इन ों पर लग

इसलि, इयों, ो-ें सतैं, और ो-ें आदरणैं, और ो-ें उचिैं, और ो-ें पविैं, और ो-ें वनैं, और ो-ें मनभवनैं, अर्, सदऔर रशें ैं, उनीं पर लगकरो।

वह िचलतवह िचलता: अरिवन और िआचरण रखतै। और धरकरतै,

और दय सच लतै;

अपनअपमनहीं करता,

और अनों करता,

और अपनपड़ोअपमनतै;

अपनरख,

और अपनुँकसकर ि

उससछल िकले। (ू. 1:26)

धररहणयसमझकर लतै,

परनों ुँउलट-फें िकलतैं।

़ी अपनुँमत ,

और लबें कहनरहे।

पर इयों, सबसयह ै, ि शपथ ा; वरी, िऔर वसी, पर तचाँ ाँ, और नहीं नहीं ो, ि दणठहरो।

िलकों, हम वचन और नहीं, पर और सतकरें।

यदि हम कहें, ि उसकहमसहभिै, और िधकें चलें, हम लतैं और सतपर नहीं चलते।

इससबढकर और आनननहीं, ि ैं ूँ, ि बचसतपर चलतैं।

ियक

अब िआशवसिचय, और अनदवसरमै।

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