10 versículos sobre esperança em tempos difíceis
A vida é feita de momentos de paz e de tormenta, mas, felizmente, a Bíblia nos oferece conforto e esperança em tempos difíceis por meio da Palavra de Deus. Confira abaixo 10 versículos que revelam o cuidado e a onipresença do Senhor conosco em momentos de dificuldade.
Lista de versículos:
1. Jeremias 29:11
क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, कि जो कल्पनाएँ मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानि की नहीं, वरन् कुशल ही की हैं, और अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूँगा।
2. Salmos 46:1
परमेश्वर हमारा शरणस्थान
परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है,
संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायकसंकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक: यहाँ सहायक अर्थात्, सहयोग एवं सहकारिता। संकट: अर्थात् तनाव और दुःख देनेवाली सब परिस्थितियाँ। ।
3. Romanos 15:13
परमेश्वर जो आशा का दाता है तुम्हें विश्वास करने में सब प्रकार के आनन्द और शान्ति से परिपूर्ण करे, कि पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए।
4. Isaías 41:10
मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूँ, इधर-उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूँ; मैं तुझे दृढ़ करूँगा और तेरी सहायता करूँगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्भाले रहूँगा। (यहो. 1:9, व्यव. 31:6)
5. Mateus 11:28
"हे सब परिश्रम करनेवालों और बोझ से दबेपरिश्रम करनेवालों और बोझ से दबे: जीवन की चिंताओं, पापों या धार्मिक संस्कारों की अनिवार्यता के कारण थके-हारे हुए। लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूँगा।
6. 2 Coríntios 4:17-18
क्योंकि हमारा पल भर का हलका सा क्लेश हमारे लिये बहुत ही महत्त्वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। और हम तो देखी हुई वस्तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएँ थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएँ सदा बनी रहती हैं।
7. Salmos 34:17-18
धर्मी दुहाई देते हैं और यहोवा सुनता है,
और उनको सब विपत्तियों से छुड़ाता है।
यहोवा टूटे मनवालों के समीप रहता हैयहोवा टूटे मनवालों के समीप रहता है: अर्थात् वह सुनने और सहायता करने को तत्पर रहता है। ,
और पिसे हुओं का उद्धार करता है।
8. Hebreus 10:23
और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामे रहें; क्योंकि जिसने प्रतिज्ञा की है, वह विश्वासयोग्य है।
9. 1 Pedro 5:7
अपनी सारी चिन्ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है।
10. Filipenses 4:6-7
किसी भी बात की चिन्ता मत करो; परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और विनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख उपस्थित किए जाएँ। तब परमेश्वर की शान्ति, जो सारी समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी। (यशा. 26:3)
Esses são apenas alguns exemplos, mas que podem lhe trazer paz. Nunca deixe de conversar com Deus sobre suas angústias, somente Ele pode acalmar o vosso coração.
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Deus abençoe!