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Vida

Por Bíblia Online

A vida é um dom precioso de Deus. Desde a concepção até a eternidade, as Escrituras revelam o propósito, o valor e a plenitude da vida que o Senhor nos oferece.

Deus, o autor da vida

O Senhor é quem dá a vida e a sustenta. Cada ser humano foi formado por suas mãos com propósito e intenção divina.

ियहपरमवर आदम जमिबनो, अर ओकवन ाँूँिो; अर आदम िबन गयो।

A vida em Cristo

Jesus é o caminho, a verdade e a vida. Nele encontramos sentido, plenitude e a promessa de vida abundante e eterna.

ओसकही, "अऊर सहअऊर वन इच आय; िपरमवर पहुँसका।

अऊर पर वल करन अर कसअऊर खतम करन आवैं; एकआयि उनकवन िे, अऊर हमिे।

ओसकहयो, "ििकरन अर वन इच आय पर भरकरैं अदि मर ियगो, अर िैं अर ऊपर भरकरैं, कभमरन ो। पर भरकरैं?"

तब उनसो, वन आय, िदगैं। आवैं कभरहन ो, अर पर भरकरैं कभरहन ो।

पर भरकरैं ओखि, जसि कहाँ ैं, िदगओकतरफ बहिलग े।

मसपर चढ़ागयैं, अब िरयो, पर मसिैं; अर सरअबिैं िभरिैं परमवर िैं, करयअर अपनिो।

मसपर चढ़ागयैं, अब िरयो, पर मसिैं; अर सरअबिैं िभरिैं परमवर िैं, करयअर अपनिो।

Vivendo com sabedoria

A Bíblia nos orienta a viver com sabedoria, aproveitando bem o tempo, guardando o coração e buscando a vontade de Deus para cada dia.

एकखनु, ि कसचलैं: िअकल जसपर िजसचलो। बखत सहसमझनो, ि िैं।

A vida no dia a dia

Cada dia é uma oportunidade de glorificar a Deus. A Escritura nos chama a viver com propósito, confiança e fé prática.

Prioridades e eternidade

Jesus nos lembra que a vida é mais que comida e o corpo mais que roupa. O que importa é buscar o Reino de Deus e viver para a eternidade.

एकैं अपनिदगिकरनि हम अर अर अपनिदगि, पहिे, िदगअर सरकपड़ा बढ? बददल पकवह ैं ैं अर बखबटैं, हरवरउन िैं, उन कई िमतरहता? ैं िकर अपनउमर एक घड़ी बढ़ा सकह ैं?

अदि अदमअर अपनि ि उठे, ओखयद?

रभिचलन मतलब

अपनसमनजउनककहयो, "िआन , अपनकरअर अपनउठिचले। ि अपनबचओखयगो, पर अर समअपनयगो; बचएगो। अदि अदमअर अपनि ि उठे, ओखयद? अदमअपनबदले? िअर अर िअर लजे; िजब वरअपनि सकि सहिआहो; तब ओसलजे।"

अर ओसकहयो, "सतर रहनो, अर सब रकअपनबचरखनू; ि ि वन ओकधन-दऊलत ा।"

अर अननवन ैं ि अकतर सचपरमवर अर रभमस, ैं, े।

ि ि मजदऊत ैं, पर परमवर वरदहमरभमसआखरिदगैं।

अर िसदसबन; पर मन नयचलन बदलते, परमवर ि भली, अर वती, अर पस, अर अचपरख अनभव कर सकैं।

ि हम पर ी, पर िकर चल ैं

सब िरखो, अर दतिरभकभो।

अर जसहमनिैं, वसरहनअर अपनो-अपनकरनअर अपनो-अपनकमि हनत करो; ि हर न-समो, अर िकमरहन ी।

कहकरह ैं, तन मन करनु। समझ ि अदमपर रभकरतरहनू। ि ैं ि ऐकबदलरभलहे; रभमसकरतरहनू।

परिअर लच

धनैं िबत ियक रहवैं खडिकलनपर िदगिरभअपनवन करयैं। अपन करन आय

वर

अऊर समझदकऊन आय? असअपनअचचलन नमरतसहिपरगट करैं।

ि

"िदगरखह ैं,

अर अचिखन ूँ ैं,

अपने,

अर अपनि करन रह

उह़े, अर भलकर;

करन ूँे, अर ओखरहो।

सब एक बखत

हर एक एक मऊकअऊर हर एक ो, बधदल ै, एक बखत

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