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Quem é o meu vizinho na Bíblia e como tratá-lo?

O que a Bíblia ensina sobre o vizinho

Na Bíblia, a palavra traduzida como "próximo" significa literalmente aquele que está perto — o vizinho de porta, de terra ou de caminho. O mandamento bíblico não trata o amor ao próximo como um sentimento abstrato, mas como a recusa ativa de prejudicar quem vive ao lado e a disposição de buscar o seu bem prático.

और दुसरी आग्या जौ है, ‘कि तू अपने पड़ोसी से अपने हानी प्यार रखिये।’ जासे बड़ी और कोई आग्या नाय है।"(मरकुस 12:31)

काहैकि सब नियम जौ एक बात मैं पूरी हुई जाथै, तैं अपने परोसी से अपने हानी प्यार रख।(गलातियों 5:14)

काहैकि "व्यभिचार मत करियो, हत्या मत करियो, चोरी मत करियो, लालचौ मत करियो," और इनकै छोड़कै औरौ कोई सी आग्या होबै तौ जौ पूरे को तोड़ जौ बात मैं मिलथै, कि "अपने पड़ोसियन से अपनेई हानी प्यार करियो।"(रोमियों 13:9)

प्यारै है जो पड़ोसियन की कछु बुराई नाय करथै, तभईये प्यार रखनो तौ नियम कै माननो है।(रोमियों 13:10)

A chamada Regra de Ouro, ensinada por Jesus no Sermão do Monte, estabelece o critério básico para essa convivência: o tratamento que você espera receber é a medida exata do que deve oferecer.

"तभई जैसो व्यवहार तुम अपने ताहीं दुसरेन से चाहथौ बैसो ही व्यवहार तू दुसरन से करौ; जौ मूसा की नियम विधि और भविस्यवक्ता को जहे सार है।"(मत्ती 7:12)

O amor ao próximo em atitudes concretas

Nas Escrituras, o cuidado com quem está perto não depende de simpatia natural, mas de ações observáveis. Isso inclui hospitalidade com quem chega, auxílio material a quem passa necessidade e constância no trato com a comunidade.

एक-दुसरे से मसीह भईय्यन-बहेनियन के जैसी प्यार करत रहबौ। अनजान लोगन को आदर-सम्मान करन मत भूलियो, काहैकि जाके जरिया कितने लोग बिना जाने स्वर्गदूतन को आदर-सम्मान करीं हैं।(इब्रानियों 13:1,2)

हमरे परमेस्वर और दऊवा के झोने पवित्र और निरमल धर्म जौ है, कि अनाथन और बिधवन के कलेस मैं उनकै याद करै, अपने आपकै दुनिया से निर्दोस रखाबै।(Tiago 1:27)

काहैकि हमरे झोने मौका होथै, कि हर एक के ताहीं और खास तौर पर बे आदमिन के ताहीं अच्छो करनो जो हमरे परिवार के बिस्वास मैं है।(गलातियों 6:10)

सब कुछ से ऊपर, एक दुसरे कै पूरे दिल से प्रेम करौ, काहैकि प्रेम तमान पापन कै ढोंक देथै।(1 पतरस 4:8)

तुमरे जरिया सुरू से सुनो गौ संदेस जौ है: हमैं एक दुसरे से प्रेम करनो चाहिए।(1 यूहन्ना 3:11)

मैं तुमकै एक नई आग्या देथौं कि एक दुसरे से प्यार रखौ; जैसो मैं तुमसे प्यार रखो हौं, बैसिये तुम्हऊँ एक दुसरे से प्यार रखौ।(यूहन्ना 13:34)

Como conviver e buscar o bem de quem está ao redor

A convivência diária exige abrir mão do interesse puramente individual. O apóstolo Paulo orienta as comunidades do primeiro século a priorizarem a edificação mútua, sustentando os fardos uns dos outros em vez de impor preferências próprias.

जाके अलावा हम सब भईय्या और बहेनियन कै बिस्वास मैं बढ़ान के ताहीं उनकी भलाई के लै दुसरे विस्वासियन कै खुस करनो चाहिए।(रोमियों 15:2)

तुम एक दुसरे को बोझ उठाबौ, और ऐसे करकै मसीह के नियम कै पूरो करौ।(गलातियों 6:2)

और इसलै एक दुसरेन कै प्रोत्साहन देमैं और एक दूसरे की मदद करैं, जैसे तुम अभै कठोर हौ।(1 थिस्सलुनीकियों 5:11)

एक दुसरे से मसीह भईय्यौ और बहेनियन के हानी प्यार करैं; एक दुसरे को आदर करन मैं एक दुसरे से बढ़त चले जाबौ।(रोमियों 12:10)

प्रभु ऐसो कर दे, कि जैसो प्रेम हम तोसे करथैं; बैसिये तेरो प्रेम भी आपस मैं, सब जनी के संग बढ़ै, और बढ़ते जाबै।(1 थिस्सलुनीकियों 3:12)

Paciência, tolerância e resolução de conflitos

O atrito é inevitável quando pessoas dividem o mesmo espaço. O texto bíblico instrui a evitar o julgamento precipitado sobre decisões alheias, renunciar à arrogância e praticar o perdão antes que a discórdia se aprofunde.

स्वार्थी इच्छा से या घमंड करन की सस्ती इच्छा से कछु मत करौ, लेकिन एक दुसरे के प्रति विनम्र रहबौ, हमेसा दुसरेन कै अपने आप से अच्छो मानौं।(फिलिप्पियों 2:3)

अगर कोई किसी के खिलाप है तौ कोई बजह होबै, तौ एक दुसरे कै सहन कर लेबौ, और एक दुसरे के अपराध कै माफ करौ: जैसे प्रभु तुमरे अपराध कै माफ करी, बैसिये तुम्हऊँ करौ।(कुलुस्सियों 3:13)

अब हम एक दुसरे के ऊपर दोस ना लगामैं, लेकिन तुम जौ ठान लेबौ कि खुद से कहु ऐसो करन को फैसला नाय करनो चाहिए, जोसे दुसरे भईय्यन कै ठोकर लगै या बे पाप मैं गिरैं।(रोमियों 14:13)

कोई तौ एक दिन कै दुसरे दिन से बढ़कै मानथैं और कोई तौ सबै दिनन कै एक जैसो मानथैं। सबै अपने-अपने दिमाक मैं का बिस्वास करने है बाकै जानन ताहीं फैसला करनो जरूरी है।(रोमियों 14:5)

मेरे भईय्यौ, का तुम दुसरेन के ऊपर दोस लगाथौ? तुमरे झोने कोईये बहाना नाय है, तुम चाँहे जो होबौ; जब तुम दुसरेन को फैसला, और फिर बहे काम करथौ, जो बे करथैं, तौ तुम खुद को तिरस्कार करथौ।(रोमियों 2:1)

आखरी मैं, तुम सबन को दिमाक एक होनो चाहिए एक-दूसरे से सहानुभूति रखाबौ। एक-दुसरे से भईय्या-बहेनिया के जैसी प्रेम करौ। भोलेपन से पेस आबौ और नम्र बनौ।(1 पतरस 3:8)

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