34 बिरबान्नी कलीसिया की सभा म्ह चुपचाप रहवै, क्यूँके उन ताहीं बात करण का हुकम कोनी, पर अधीन रहण का हुकम सै, जिसा नियम-कायदे म्ह लिख्या भी सै। 35 जै वे किमे सिखणा चाहवै, तो घर म्ह अपणे-अपणे धणी तै बुझै, क्यूँके बिरबान्नी का कलीसिया म्ह घणा बोलणा शर्म की बात सै।
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