शुभकामना
1 या चिट्ठी पतरस की ओड़ तै सै, जो यीशु मसीह का प्रेरित सै, मै या चिट्ठी परमेसवर के चुणे होए माणसां कै खात्तर लिखण लागरया सूं, जो परदेशी होकै पुन्तुस, गलातिया, कप्पदूकिया, आसिया अर बिथुनिया परदेसां म्ह तित्तर-बितर होकै रहवै सै।
एक सुर्गीय विरासत
3 म्हारे मसीह यीशु के पिता अर परमेसवर का धन्यवाद हो, जिसनै म्हारे पै बड़ी दया करकै म्हारे ताहीं नई जिन्दगी दी सै, क्यूँके परमेसवर नै यीशु मसीह ताहीं मुर्दां म्ह तै जिन्दा करया, उसनै म्हारे ताहीं बड़े बिश्वास कै साथ जीण कै लायक बणाया, ताके हम उन चिज्जां की आस राक्खां जिसका देण का उसनै वादा करया सै। 4 हम उस वसियत नै जो परमेसवर नै म्हारे खात्तर तैयार करी सै, उस ताहीं लेण की हम बाट देक्खां सां, उसनै म्हारे खात्तर उस ताहीं सुर्ग म्ह राख्या सै, जित्त वा कदे गळ न्ही सकदी, खराब न्ही हो सकदी, अर नाश न्ही हो सकदी। 6 थमनै इन सारी बात्तां तै खुश होणा चाहिए भलाए थम कुछ बखत खात्तर कई ढाळ की मुसीबतां के कारण दुखी सो।