सेवकाई पै ध्यान राखणा
12 छोट्टी उम्र के कारण कोए तन्नै तुच्छ ना समझै पर वचन, अर चाल-चलण, अर प्यार, अर बिश्वास, अर पवित्रता म्ह बिश्वासियाँ कै खात्तर बढ़िया नमूना बण जा। 13 जिब ताहीं मै न्ही जाऊँ, जिब तक बखत लिकाड़कै पवित्र ग्रन्थ बिश्वासियाँ ताहीं पढ़कै सुणा, अर उन ताहीं उत्साहित अर वचन सिखाण म्ह लग्या रह। 14 उस आत्मिक वरदान कै बारै म्ह, जो तेरे म्ह सै, अर भविष्यवाणी कै जरिये कलीसिया के अगुवां के हाथ धरदे बखत तन्नै मिल्या था, निश्चिन्त मतना रह। 15 इन बात्तां नै सोचदा रह अर इन्नै म्ह अपणा ध्यान लाये रह, ताके तेरी बढ़ोतरी सारया पै दिख जावै। 16 यो ध्यान राक्खों के थम किस तरियां जिन्दगी जिओ सों, अर के सिखाओ सों। इन बात्तां पै स्थिर रह, क्यूँके इसा करदा रहवैगा तो तू अपणे अर अपणे सुणण आळा कै खात्तर भी उद्धार का कारण होगा।